AI Generated Deepfakes: डीपफेक के झांसे में आकर आप भी तो फेक न्यूज को नहीं मान लेते सच? जानें बचाव का तरीका
AI Generated Deepfakes: पिछले कुछ समय में एआई का इस्तेमाल करके डीपफेक वीडियो को लेकर कई चर्चित हस्तियों ने चिंता जाहिर की है। न्यूजीलैंड की संसद में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया था। केंद्र सरकार भी डीपफेक वीडियो और फेक न्यूज को लेकर अपनी सतर्कता जता चुकी है। पिछले कुछ समय में फेक न्यूज की वजह से कई बार असमंजस और कभी-कभी तो भारी तनाव की स्थिति भी बन गई है। डीपफेक वीडियो क्या होते हैं और इससे बचने का तरीका क्या होना चाहिए, जानिए इन सबके बारे में विस्तार से।
क्या होते हैं है AI Generated Deepfakes?
Deepfake एक तकनीक है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा और हाव-भाव को बारीकी से कॉपी करती है। यह इतना करीबी मामला है कि आप असली और नकली में फर्क नहीं कर पाएंगे।

कैसे शुरू हुई यह तकनीक?
इस तकनीक का उपयोग फिल्मों में VFX के रूप में शुरू हुआ था। अब इसका इस्तेमाल राजनीति, पत्रकारिता, मनोरंजन और यहां तक कि आम लोगों की निजी जिंदगी में भी घुसपैठ के लिए होने लगा है। मनोरंजन और स्पेशल इफेक्ट के लिए तकनीक का इस्तेमाल अब गलत कामों के लिए होने लगा है।
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Deepfake का इस्तेमाल कैसे फेक न्यूज के लिए हो रहा है?
भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या 80 करोड़ से ज़्यादा हो चुकी है। जब वायरल होने के लिए एक सेकंड काफी हो, तब Deepfake एक खतरनाक हथियार बन गया है। इसका इस्तेमाल कई जगहों पर हो सकता है जैसे कि:
चुनावी माहौल में नेताओं के झूठे बयान
धर्म या जाति से जुड़ी भड़काऊ क्लिप
सेलेब्रिटी के नाम पर अश्लील कंटेंट
आम नागरिकों की निजता का उल्लंघन
Deepfake भारत में बन रहा है गंभीर खतरा
2023 में IIT जोधपुर की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर महीने करीब 3,000 से अधिक Deepfake वीडियो सोशल मीडिया पर घूमते हैं। इनमें से 60% का मकसद किसी को बदनाम करना या भड़काना होता है। भारत में डीपफेक को लेकर सीधे तौर पर कोई कानून नहीं है, लेकिन IT Act की कुछ धाराओं और बीएनएस की बदनामी से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। हाल ही में केंद्र सरकार ने Digital India Act का ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें Deepfake कंटेंट पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। इसके तहत:
- Deepfake को बनाने और फैलाने वाले पर जुर्माना व सजा
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी तय
- तकनीकी टूल्स से जांच की व्यवस्था
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इसके अलावा, अब कई स्टार्टअप्स और साइबर एक्सपर्ट्स ऐसे AI-टूल्स बना रहे हैं जो Deepfakes की पहचान कर सकते हैं। Google, Meta और Microsoft जैसी कंपनियां भी AI Content Watermarking पर काम कर रही हैं। भारत में 'Truecaller' की तरह Deepfake डिटेक्टर ऐप्स का सुझाव भी सामने आया है। इसके अलावा, बतौर नागरिक भी हम सबकी जिम्मेदारी अहम है।
- इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया पर हर चीज पर भरोसा नहीं करना चाहिए। विवादित और आपत्तिजनक कंटेंट की रिपोर्ट करें। कोई भी न्यूज फॉरवर्ड करने से पहले सत्यता जांच लें।












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