AI De Addiction Centre: अब मशीनों की मदद से छूटेगी इंसानों की नशे की लत, जानें कैसे
AI De Addiction Centre: भारत में नशे की लत छुड़ाने के लिए कई सरकारी नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं। बहुत सी गैर-सरकारी संस्थाएं भी ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को नशे की लत से निकालने के लिए काम कर रही हैं। पूरी दुनिया में ड्रग्स और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए नशा मुक्ति केंद्र हैं। अब शराब-सिगरेट समेत किसी भी ऐसी लत को छुड़ाने के लिए आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं।
नई पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वर्चुअल काउंसलिंग और डिजिटल थेरेपी की शुरुआत हो चुकी है। इससे नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को अब मशीनें सुधारने का काम कर सकती हैं। सरकार और कुछ निजी हेल्थटेक कंपनियां मिलकर एक ऐसा AI सिस्टम तैयार कर रही हैं, जो मरीज की मनोस्थिति को समझेगा, उसका व्यवहार ट्रैक करेगा और उसी अनुसार सलाह देगा।

AI De Addiction Centre: नशे की लत छोड़ना होगा आसान
AI आधारित यह सिस्टम न सिर्फ 24x7 एक्टिव रहेगा, बल्कि यह व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, बोलचाल के पैटर्न और सोशल मीडिया को ट्रैक करेगा और उसके आधार पर मनोस्थिति का विश्लेषण करेगा। प्रत्येक मरीज को जरूरत के मुताबिक प्रेरक सलाह देगा। इन बॉट्स में CBT (Cognitive Behavioral Therapy), मेडिटेशन गाइड और पॉजिटिव बिहेवियर टेक्निक जैसे टूल्स भी इंटिग्रेट किए गए हैं।
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प्रोफेशनल काउंसलर की कमी को काफी हद तक करेगा दूर
माना जा रहा है कि इससे उन क्षेत्रों में बड़ी मदद मिल सकती है जहां प्रोफेशनल काउंसलर्स या साइकियाट्रिस्ट की भारी कमी है। भारत के कई राज्य जैसे कि बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में यह तकनीक बहुत मददगार साबित हो सकती है। बिहार जैसे राज्यों में जहां शराबबंदी लागू है, वहां चोरी-छिपे शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा देखा गया है। ऐसे में AI-बेस्ड यह 'डिजिटल साथी' उन लोगों की मानसिक स्थिति को पहचानकर उन्हें धीरे-धीरे नशे से दूर करने में मदद कर सकता है।
नशे जैसी लत को छोड़ने के लिए सिर्फ तकनीक काफी नहीं
विशेषज्ञ मानते हैं कि हर व्यक्ति को लगातार व्यक्तिगत स्तर पर सलाह और सुझाव न दे पाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे AI से काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। हालांकि इस टेक्नोलॉजी का मकसद यह नहीं है कि इंसानों की भूमिका खत्म हो जाए, बल्कि इसका उद्देश्य उन्हें एक स्मार्ट सपोर्ट देना है। नशे जैसी लत छोड़ने के लिए परिवार और समाज से प्रोत्साहन, प्रोफेशनल काउंसलिंग और अपनी इच्छाशक्ति बहुत महत्वपूर्ण है। ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिनकी जगह मशीनें और टेक्नोलॉजी कभी नहीं ले सकती हैं।
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