क्यों शनि शिंगणापुर मंदिर में नहीं जा सकतीं महिलाएं?
नई दिल्ली। अहमदनगर के मशहूर शनि शिंगणापुर मंदिर को लेकर महिलाओं ने जंग छेड़ दी है। महिलाएं अब 400 साल पुरानी परंपराओं को तोड़ने में आमदा है क्योंकि वो चाहती हैं कि उन्हें भी मंदिर में प्रवेश मिले लेकिन स्थानीय लोग और मंदिर प्रशासन इस बात के खिलाफ है जिसके कारण इस समय महिलाओं और मंदिर ट्रस्ट के बीच जंग छिड़ गई है।
आईये जानते हैं इस मंदिर के बारे में कुछ खास बातें और वो कारण जिसकी वजह से यहां महिलाएं दर्शन को नहीं आ सकतीं नीचे की स्लाइडों में...

मानक मंदिर
शनि शिंगणापुर काफी मानक मंदिर हैं, यहां लाखों की संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।

स्वयंभू मूर्ति काले रंग की
शनि भगवान की स्वयंभू मूर्ति काले रंग की है। 5 फुट 9 इंच ऊँची व 1 फुट 6 इंच चौड़ी यह मूर्ति संगमरमर के एक चबूतरे पर धूप में ही विराजमान है।

बिना छत्र धारण किए
यहाँ शनिदेव अष्ट प्रहर धूप हो, आँधी हो, तूफान हो या जाड़ा हो, सभी ऋतुओं में बिना छत्र धारण किए खड़े हैं।

किसी भी घर में दरवाजा नहीं
लगभग तीन हजार जनसंख्या के शनि शिंगणापुर गाँव में किसी भी घर में दरवाजा नहीं है, कहा जाता है कि ऐसा शनि भगवान की आज्ञा से किया जाता है।

कभी चोरी नहीं हुई
गाँव में लोगों के घर आधुनिक तकनीक से ईंट-पत्थर तथा सीमेंट का इस्तेमाल करके बनाए गए हैं। फिर भी दरवाजों में किवाड़ नहीं हैं। यहाँ दुमंजिला मकान भी नहीं है। यहाँ पर कभी चोरी नहीं हुई।

महिलाओं का जाना वर्जित
मुंबई के शिंगणापुर मंदिर में जहां शनि पत्थर स्थापित है उस चबूतरे पर महिलाओं का जाना वर्जित है ऐसा माना जाता है कि महिलाओं के पूजन से शनिदेव नाराज हो जायेंगे।

400 सालों से चल रही है परंपरा
हाल ही में अनीता शेटे को मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया है और वह भी शनि मंदिर में महिलाओं के लिए बने पिछले 400 सालों के नियमों को नहीं बदलना
चाहतीं।

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