संजीव गोयनका की मदद भी TMC को नहीं बचा पाई, बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी को दिए इतने अरब रुपये
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। 15 साल के ममता बनर्जी के शासन का अंत करते हुए भाजपा ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर बंगाल में परिवर्तन कर दिया है। इस ऐतिहासिक हार के बाद अब चर्चा उन आर्थिक स्तंभों की हो रही है जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इस चुनावी अभियान को अरबों रुपयों से सींचा था।
साल 2024 के इलेक्टोरल बॉन्ड के आंकड़ों और चुनावी खर्चों के विश्लेषण से साफ है कि कोलकाता के दिग्गज उद्योगपति और आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स के मालिक संजीव गोयनका (RPSG Group) ने ममता बनर्जी को सत्ता में बनाए रखने के लिए अपनी तिजोरी खोल दी थी, लेकिन अरबों रुपये का यह कॉर्पोरेट निवेश भी बंगाल की जनता के मूड को बदलने में नाकाम रहा।

चुनावी बॉन्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार संजीव गोयनका के ग्रुप ने TMC को कुल 403 करोड़ (4 अरब रुपये से अधिक) का चंदा दिया था। चुनावी बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 2024 में चंदे की जानकारी सार्वजानिक हुई थी, देश भर की पार्टियों का नाम इसमें शामिल था. संजीव गोयनका टीएमसी सर्वाधिक चंदा देने के मामले में दूसरे स्थान पर रहे। ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई।
- हल्दिया एनर्जी लिमिटेड: 281 करोड़
- धारीवाल इंफ्रास्ट्रक्चर: 90 करोड़
- क्रिसेंट पावर: 32 करोड़
2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों में भाजपा की प्रचंड जीत (207 सीटें) और TMC की सिमटती ताकत (80 सीटें) के बीच देखना होगा कि अब गोयनका क्या करते हैं। संजीव गोयनका कोलकाता में बिजली आपूर्ति (CESC) के बेताज बादशाह माने जाते हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद गोयनका के राजनीतिक रिश्तों में बदलाव आने के पूरे आसार हैं।
गोयनका ने चुनाव नतीजों के बाद किया पोस्ट
ममता बनर्जी की हार और भाजपा की प्रचंड जीत के तुरंत बाद संजीव गोयनका ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसके अब कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि मेरा जन्म यहां हुआ और यहीं अंतिम सांस लूंगा। मैं बंगाल और यहां के लोगों के विकास के लिए काम करता रहूंगा।
क्या पाला बदलेंगे संजीव गोयनका?
सवाल यह है कि क्या संजीव गोयनका अब भाजपा के पाले में जाकर खड़े होने वाले हैं? इतिहास गवाह है कि बड़े व्यापारिक घरानों के लिए विचारधारा से बड़ा हित होता है। गोयनका का मुख्य व्यवसाय (CESC) पूरी तरह से बंगाल और यहां की सरकारी नीतियों पर निर्भर है, इसलिए उनके पास पाला बदलने के अलावा शायद ही कोई विकल्प बचा हो।












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