Bangladesh On Bengal: बंगाल में चुनाव जीतते है बांग्लादेश ने PM मोदी से क्या मांगा? 1983 से अटका मामला- Video

Bangladesh On Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP की जीत को सिर्फ राज्य में ही नहीं, बल्कि सीमा पार बांग्लादेश में भी समर्थन मिला है। बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ढाका से BJP को बधाई संदेश भेजा और साथ ही लंबे समय से अटके तीस्ता जल-बंटवारा समझौते पर फिर से विचार करने की मांग भी रखी।

ममता बनर्जी को माना जाता था बड़ी बाधाढाका लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता विवाद सुलझाने में बड़ी रुकावट मानता रहा है। अब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद बांग्लादेश को इस मुद्दे पर नई उम्मीद दिखाई दे रही है।

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बीजेपी की जीत से बेहतर संबंधों की उम्मीद

बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल का मानना है कि राज्य में BJP की जीत से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव ढाका और कोलकाता के बीच बेहतर तालमेल और स्थिर द्विपक्षीय संबंधों का रास्ता खोल सकता है।

सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व की तारीफ

बीएनपी ने सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP के प्रदर्शन की सराहना की और औपचारिक रूप से बधाई भी दी। हेलाल ने कहा कि यह जीत दोनों क्षेत्रों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का एक बड़ा मौका है।

बयान में जताई बड़ी उम्मीद

हेलाल ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP की जीत से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सरकार के रिश्ते पहले से बेहतर होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग और तेजी से बढ़ेगा।

तीस्ता समझौते पर नई सरकार से उम्मीद

हेलाल ने जोर देकर कहा कि नई सरकार स्थानीय मुद्दों को समझते हुए तीस्ता जल-बंटवारा समझौते पर आगे बढ़ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बदलते हालात में इस समझौते पर गंभीरता से काम होगा। हालांकि अपने बयान में हेलाल ने पीएम मोदी का नाम नहीं लिया लेकिन इशारा उनकी ही तरफ था।

ममता सरकार पर लगाया आरोप

हेलाल ने दावा किया कि ममता बनर्जी की सरकार तीस्ता बैराज समझौते में बाधा थी। उनका मानना है कि अब BJP सरकार इस समझौते को आगे बढ़ाने में मदद करेगी और केंद्र की इच्छा के साथ तालमेल बिठाएगी।

क्या है तीस्ता विवाद?

तीस्ता जल-बंटवारा भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा अनसुलझा मुद्दा है। बांग्लादेश चाहता है कि 1996 की गंगा जल संधि की तरह इस नदी के पानी का भी बराबर बंटवारा हो। लेकिन पश्चिम बंगाल के विरोध के कारण 2011 का प्रस्तावित समझौता आज तक लागू नहीं हो सका।

सूखे में बढ़ जाता है विवाद

सूखे के समय बांग्लादेश भारत पर कम पानी छोड़ने का आरोप लगाता है। इससे निचले इलाकों में खेती और लोगों की आजीविका प्रभावित होती है। वहीं जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की कमी का खतरा और बढ़ गया है।

2011 का प्रस्तावित समझौता

2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बांग्लादेश दौरे के दौरान एक प्रस्ताव रखा गया था। इसमें 37.5% पानी बांग्लादेश और 42.5% भारत को देने की बात थी, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण यह लागू नहीं हो पाया।

1983 का अधूरा समझौता

1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें 36% पानी बांग्लादेश और 39% भारत को देने का फैसला हुआ था, जबकि 25% पानी पर बाद में निर्णय होना था। लेकिन यह समझौता भी पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

साझा नदियां, लेकिन कम समझौते

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो समझौते हुए हैं-गंगा जल संधि और कुशियारा नदी समझौता। तीस्ता और फेनी जैसी नदियों पर बातचीत अभी भी जारी है।

वैचारिक मतभेद के बावजूद सहयोग

बीएनपी और BJP के बीच विचारधारा अलग होने के बावजूद हेलाल ने कहा कि राष्ट्रीय हित ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि तीस्ता जैसे मुद्दों पर दोनों देश एकजुट हो सकते हैं। हेलाल ने कहा कि भले ही विचार अलग हों, लेकिन कई मुद्दों पर दोनों देश एक साथ हैं। उनका मानना है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंध और तेजी से मजबूत होंगे।

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