Thalapathy Vijay TVK MLAs Resign: क्या TVK के 107 MLA देने वाले हैं इस्तीफा? DMK-AIADMK गठबंधन बनाएगा सरकार?
Thalapathy Vijay TVK MLAs Resign Warning: तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों भूचाल के दौर से गुजर रही है। अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की तमिलगा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने मात्र दो साल में विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है, लेकिन बहुमत (118) से महज कुछ सीटें दूर है।
अब खबरें हैं कि अगर DMK और AIADMK हाथ मिलाकर सरकार बनाने का दावा करते हैं, तो TVK के सभी 107 विधायक (विजय द्वारा एक सीट छोड़ने के बाद) सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। यह कदम न सिर्फ राज्यपाल को नई चुनाव की ओर धकेल सकता है, बल्कि तमिलनाडु की 59 साल पुरानी द्रविड़ियन राजनीति की नींव हिला सकता है।

यह खबरें सिर्फ अफवाहें नहीं हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, TVK नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि अगर एमके स्टालिन की DMK या एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) की AIADMK राज्यपाल राजेंद्र अरलेकर से सरकार बनाने का दावा करती है, तो TVK के 107 विधायक इस्तीफा दे देंगे। यह कदम जनादेश की अनदेखी के खिलाफ विरोध का प्रतीक होगा। चेन्नई के राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। 8 मई क्या होगा? क्या DMK-AIADMK का गठबंधन बनेगा? या TVK सत्ता संभालेगी? पूरी कहानी को गहराई से समझाता है...
Tamil Nadu Assembly Elections 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026, TVK ने तोड़ा द्रविड़ियन द्वंद्व
23 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनावों ने तमिलनाडु की राजनीति का इतिहास बदल दिया। 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतीं। DMK को 59 और AIADMK को 47 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 5, PMK को 4 और अन्य छोटी पार्टियों को बाकी सीटें। वोट शेयर में TVK ने करीब 35% हासिल किया, जो एक नए दल के लिए अभूतपूर्व था।
यह जीत सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि भावनाओं की थी। थलापति विजय ने 2024 में TVK की स्थापना की। फिल्मों में 'थलापति' के नाम से मशहूर विजय ने राजनीति में उतरकर 'जनता की आवाज' बनने का वादा किया। उनकी पार्टी ने भ्रष्टाचार मुक्त शासन, युवा रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों के लिए बेहतर कीमत और द्रविड़ियन मॉडल को मजबूत करने का नारा दिया। TVK ने बिना किसी बड़े गठबंधन के अकेले लड़कर DMK-AIADMK के 59 साल के एकाधिकार को तोड़ दिया। यह MGR (एम.जी. रामचंद्रन) की तरह सिनेमा से राजनीति में आने का नया अध्याय था।
लेकिन बहुमत की कमी ने स्थिति जटिल बना दी। TVK के पास 108 सीटें हैं, लेकिन विजय ने दो सीटें जीतीं। संवैधानिक नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, यानी प्रभावी संख्या 107। कांग्रेस ने समर्थन दिया, जो 5 सीटें लाई, कुल 112। फिर भी 118 के बहुमत से 6 सीटें कम। TVK अब VCK (विदुतलई चिरुथैगल काची), CPI, CPM और IUML जैसे दलों से समर्थन मांग रही है।
मौजूदा गतिरोध: राज्यपाल का फैसला और बातचीत का दौर
राज्यपाल राजेंद्र अरलेकर ने TVK को बिना लिखित समर्थन के सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं दिया। विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की और 118 सीटों का दावा किया, लेकिन साक्ष्य मांगे गए। इसी बीच कांग्रेस ने पुराने साथी DMK को छोड़ TVK के साथ हाथ मिला लिया। यह DMK के लिए बड़ा झटका था। DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।
AIADMK में भी फूट है। कुछ नेता TVK को बाहर से समर्थन देना चाहते हैं, लेकिन EPS गुट सतर्क है। AIADMK ने अपने विधायकों की बैठक रद्द कर दी। छोटी पार्टियां 'VCK, वामपंथी और IUML' अभी फैसला टाल रही हैं। तीनों के नेता हाल ही में स्टालिन से मिले। DMK ने भी अपने विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक बुलाई। पुडुचेरी में AIADMK विधायकों की बैठक हुई। दोनों बैठकों में एक प्रस्ताव पास हुआ, पार्टी नेतृत्व जो फैसला लेगा, उसका पालन करेंगे।
इसी बीच सबसे बड़ी खबर आई ये है कि DMK और AIADMK के बीच गुप्त बातचीत। सूत्रों के मुताबिक, दोनों द्रविड़ियन प्रतिद्वंद्वी TVK को सत्ता से दूर रखने के लिए गठबंधन पर विचार कर रहे हैं। अगर DMK बाहर से AIADMK को समर्थन दे और EPS मुख्यमंत्री बनें, तो 59+47=106 सीटें हो जाएंगी। फिर भी बहुमत से कम, लेकिन छोटी पार्टियों को मंत्रिमंडल में जगह देकर सरकार बनाई जा सकती है।
TVK Major Ultimatum: 107 विधायकों का सामूहिक इस्तीफा?
पार्टी सूत्रों ने गुरुवार (7 मई) को बताया कि अगर DMK या AIADMK सरकार बनाने का दावा करती है, तो TVK के सभी 107 विधायक इस्तीफा दे देंगे। विजय ने खुद आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन पार्टी के अंदरूनी माहौल में यह फैसला पक्का है। TVK के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जनादेश खंडित है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह धमकी TVK के प्रवक्ता लोयाला मणि के पुराने बयान को हकीकत बना रही है। जब TVK शुरू हुई थी, तब उन्होंने कहा था कि DMK और AIADMK विजय का विरोध करने के लिए गठबंधन करेंगे। उस समय मजाक उड़ाया गया, लेकिन आज यह सच लग रहा है।
TVK नेतृत्व इस बात से खासा नाराज है कि DMK-AIADMK मिलकर विजय को सत्ता संभालने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि TVK सबसे बड़ी पार्टी है। अगर इस्तीफे हो गए, तो विधानसभा भंग हो सकती है और नए चुनाव कराए जा सकते हैं। TVK को विश्वास है कि दूसरे दौर में वह और मजबूत होकर आएगी।
DMK-AIADMK Alliance: संभव या असंभव?
DMK और AIADMK का गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में भूकंप जैसा होगा। दोनों दलों का इतिहास 1970 के दशक से चला आ रहा है। AIADMK ने DMK से अलग होकर बनाया था। जयललिता और करुणानिधि के जमाने में दोनों के बीच कटु दुश्मनी रही। लेकिन आज 'TVK खतरा' ने उन्हें करीब ला दिया है?
सूत्र बताते हैं कि DMK बाहर से समर्थन देकर EPS को CM बनाने पर विचार कर रही है। मंत्रिमंडल में VCK, CPI, CPM को जगह देने की बात भी चल रही है। लेकिन AIADMK में आंतरिक कलह है। कुछ नेता TVK को समर्थन देना चाहते हैं, क्योंकि BJP के साथ गठबंधन पहले ही टूट चुका है। अगर गठबंधन बना, तो TVK का इस्तीफा प्लान सक्रिय हो जाएगा। राज्यपाल को फैसला लेना पड़ेगा या तो TVK को मौका दें या नए चुनाव। संवैधानिक रूप से सबसे बड़ी पार्टी को पहले मौका मिलना चाहिए, लेकिन लिखित समर्थन जरूरी है।
क्या बदल जाएगा तमिलनाडु का भविष्य?
यह संकट सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के भविष्य का सवाल है। द्रविड़ियन पार्टियां 1967 से सत्ता में रही हैं। DMK और AIADMK ने बारी-बारी सरकार चलाई। लेकिन TVK ने 'नई पीढ़ी, नया विकल्प' का नारा देकर युवाओं, किसानों और मध्यम वर्ग को जोड़ा। विजय की लोकप्रियता फिल्मी छवि से आगे निकलकर सामाजिक न्याय और विकास पर टिकी है।
- TVK के फायदे: अगर TVK सरकार बनाती है, तो ताजा खून आएगा। भ्रष्टाचार पर सख्ती, शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश, IT हब को बढ़ावा - विजय के वादे यहीं हैं। कांग्रेस का समर्थन उन्हें स्थिरता दे सकता है।
- DMK-AIADMK गठबंधन के नुकसान: यह 'पुरानी व्यवस्था' की वापसी लगेगा। जनता ने TVK को वोट देकर बदलाव मांगा था। गठबंधन पर जनता नाराज हो सकती है। AIADMK के अंदर फूट बढ़ सकती है। DMK को कांग्रेस का साथ छूटने का नुकसान उठाना पड़ेगा।
- ऐतिहासिक तुलना: 1980 के दशक में AIADMK-DMK गठबंधन की कोशिशें हुई थीं, लेकिन टिक नहीं पाईं। 2016-2021 में AIADMK अकेले चली, लेकिन बाद में टूट गई। आज का गठबंधन मजबूरी का लगता है।
- छोटी पार्टियों की भूमिका: VCK, वामपंथी और IUML किंगमेकर बन सकते हैं। वे DMK-AIADMK को समर्थन देंगे या TVK को? उनकी मांगें 'जातीय न्याय, अल्पसंख्यक अधिकार' तय करेंगी।
- राज्यपाल की भूमिका: अरलेकर को निष्पक्ष रहना होगा। अगर TVK 118 का समर्थन जुटा लेती है, तो उन्हें निमंत्रण देना चाहिए। इस्तीफों की स्थिति में फ्लोर टेस्ट या नए चुनाव।
आगे क्या होगा?
- TVK सरकार: अगर छोटी पार्टियां समर्थन दे दें, तो विजय CM बन सकते हैं। 6 महीने का स्थिरता टेस्ट।
- DMK-AIADMK गठबंधन: 106+ समर्थन से सरकार, लेकिन TVK विधायकों के इस्तीफे की चेतावनी, नए चुनाव।
- अस्थिरता: इस्तीफे से राष्ट्रपति शासन या चुनाव। TVK फिर मजबूत होकर लौटेगी।
- AIADMK का समर्थन TVK को: EPS गुट अगर टूटा, तो TVK को बहुमत मिल सकता है।
तमिलनाडु का सियासी भविष्य अनिश्चित है। विजय की TVK ने साबित कर दिया कि सिनेमा स्टार राजनीति बदल सकती है। लेकिन पुरानी द्रविड़ियन ताकतें हार मानने को तैयार नहीं। कल (8 मई) या अगले कुछ दिनों में बड़े फैसले हो सकते हैं।
यह संकट सिर्फ चेन्नई तक सीमित नहीं। पूरे देश में नजरें टिकी हैं क्या दक्षिण भारत में नई राजनीति उभरेगी या पुरानी लौट आएगी? TVK के 107 विधायकों का इस्तीफा अगर हुआ, तो यह लोकतंत्र का नया अध्याय होगा। जनादेश की रक्षा के लिए।













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