Chandranath Rath शादीशुदा थे या नहीं? किस जाति से थे? एयफोर्स की नौकरी छोड़ क्यों आए राजनीति में?
Chandranath Rath Life Story: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, चंद्रनाथ रथ। मध्यमग्राम में गोली मारकर हुई उनकी हत्या ने सिर्फ बीजेपी ही नहीं, पूरे बंगाल की राजनीति को हिला दिया है। मध्यमग्राम की सड़कों पर जब सफेद स्कॉर्पियो को घेरकर गोलियां बरसाई गईं, तो सिर्फ एक इंसान की जान नहीं गई, बल्कि बंगाल की सियासत के सबसे 'पावरफुल' चेहरों में से एक, सुवेंदु अधिकारी ने अपना सबसे भरोसेमंद सिपाही खो दिया। चंद्रनाथ रथ, जिन्हें लोग सिर्फ सुवेंदु का पीए (PA) समझते थे, उनकी जिंदगी की परतें किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं हैं।
आखिर एक एयरफोर्स का जवान अचानक राजनीति के दलदल में कैसे आ गया? उनकी जाति क्या थी? क्या वो शादीशुदा थे? और वो कौन सी बात थी जिसने उन्हें संन्यास की दहलीज से लौटाकर सत्ता के गलियारों में ला खड़ा किया? आइए इस रिपोर्ट में चंद्रनाथ रथ की पूरी 'लाइफ स्टोरी' समझने की कोशिश करते हैं।

कौन थे चंद्रनाथ रथ और क्या थी उनकी पारिवारिक विरासत? (Who was Chandranath Rath and His Caste?)
41 साल के चंद्रनाथ रथ का ताल्लुक पूर्व मेदिनीपुर के चांदीपुर इलाके से था। यह वही इलाका है जिसे सुवेंदु अधिकारी का 'अभेद्य किला' माना जाता है। चंद्रनाथ की जड़ों की बात करें, तो वे उत्कल ब्राह्मण (ओडिशा मूल) समुदाय से आते थे। उनके सरनेम 'रथ' से ही उनकी जाति की पहचान जुड़ी थी। रिपोर्ट्स और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर "रथ" या "रथा" सरनेम ओडिशा मूल के उत्कल ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा माना जाता है। पूर्वी भारत में रथ उपनाम वाले कई परिवार ओडिशा की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जुड़े रहे हैं।
सियासत चंद्रनाथ के खून में थी लेकिन वे खुद कभी फ्रंटफुट पर नहीं आए। उनकी मां हासिरानी रथ, टीएमसी के दौर में स्थानीय पंचायत की कद्दावर नेता रह चुकी थीं। जब 2020 में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा, तो रथ परिवार की वफादारी भी सुवेंदु के साथ ही रही। सुवेंदु और रथ परिवार का रिश्ता आज या कल का नहीं, बल्कि पिछले दो दशकों से चला आ रहा एक अटूट विश्वास है।
शादीशुदा थे या नहीं? चंद्रनाथ के निजी जीवन का रहस्य (Was Chandranath Rath Married?)
सुवेंदु अधिकारी ने 7 मई को मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि चंद्रनाथ रथ की मौत के बाद भाजपा उनके पत्नी और बेटी के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी। हालांकि उनकी पत्नी कौन हैं और क्या करती हैं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट्स की मानें तो वे अपना पूरा जीवन सुवेंदु अधिकारी के कामकाज और पार्टी की सेवा में समर्पित कर चुके थे। उनके शांत स्वभाव और लो-प्रोफाइल रहने की आदत की वजह से उनकी निजी जिंदगी हमेशा पर्दे के पीछे ही रही।

रामकृष्ण मिशन से क्यों थे प्रभावित? एयरफोर्स की नौकरी और संन्यास की वो अधूरी इच्छा
चंद्रनाथ रथ का व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा था। उन्होंने करीब 20 साल तक भारतीय वायु सेना (IAF) में रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा की। एक अनुशासित फौजी की तरह उन्होंने जीवन जिया, लेकिन उनके भीतर एक आध्यात्मिक लौ भी जल रही थी। राहड़ा रामकृष्ण मिशन से पढ़ाई करने के दौरान उन पर धर्म और अध्यात्म का इतना गहरा असर हुआ कि एक समय वे सब कुछ छोड़कर संन्यास लेना चाहते थे।
करीबी लोगों के मुताबिक रामकृष्ण मिशन की सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिक सोच का उनके ऊपर गहरा असर था। बताया जाता है कि एक समय ऐसा भी आया था जब वह दुनियादारी छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने के बारे में गंभीरता से सोचने लगे थे। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने संन्यास लेने की इच्छा भी जताई थी। यही वजह थी कि एयरफोर्स और बाद में राजनीति में रहने के बावजूद उनके व्यवहार में एक अलग तरह की शांति दिखाई देती थी।

लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। एयरफोर्स से वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) लेने के बाद वे कुछ समय के लिए कॉर्पोरेट सेक्टर में भी गए, लेकिन सुवेंदु अधिकारी के साथ पुराने पारिवारिक संबंधों ने उन्हें राजनीति की ओर खींच लिया। 2019 से वे सुवेंदु के साये की तरह साथ रहने लगे और धीरे-धीरे उनके 'मिस्टर डिपेंडेबल' बन गए।
जब सुवेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में थे, उसी दौरान चंद्रनाथ उनके संपर्क में आए। साल 2019 के आसपास उन्होंने आधिकारिक तौर पर सुवेंदु की टीम में काम शुरू किया। उस समय सुवेंदु ममता बनर्जी सरकार में मंत्री थे। बाद में जब उन्होंने बीजेपी जॉइन की, तब चंद्रनाथ भी उनके साथ आ गए। धीरे-धीरे वह सिर्फ एक PA नहीं बल्कि सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हो गए।

6 मई की वो काली रात: कैसे बुनी गई हत्या की साजिश?
6 मई की रात करीब 10:30 बजे, जब चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम स्थित अपने घर लौट रहे थे, तभी काल उनकी गाड़ी का पीछा कर रहा था। हमलावरों ने जिस 'प्रिसिजन' के साथ इस वारदात को अंजाम दिया, वो किसी पेशेवर अपराधी का काम लगता है।
प्लानिंग: पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मर्डर के लिए 3-4 दिनों तक बकायदा रेकी की गई थी।
हथियार: घटनास्थल से मिले खोखे इशारा करते हैं कि इसमें ऑस्ट्रिया में बनी ग्लॉक (Glock) पिस्टल का इस्तेमाल हुआ होगा, जो बहुत सटीक निशाना लगाने के लिए जानी जाती है।
हमला: स्कॉर्पियो के सामने एक कार अड़ा दी गई और फिर एक बाइक सवार ने आकर बाईं तरफ से 10 राउंड फायरिंग की। चंद्रनाथ को 4 गोलियां लगीं, जिसमें से दो उनके सीने को चीरती हुई निकल गईं।

मां की मांग-फांसी नहीं, उम्रकैद चाहिए
जहां एक तरफ बीजेपी इस हत्या को ममता बनर्जी की हार (भवानीपुर में) का बदला बता रही है और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं चंद्रनाथ की मां हासिरानी रथ का बयान रूह कंपा देने वाला है। एक मां जिसने अपना जवान बेटा खो दिया, वो कहती हैं, "मैं नहीं चाहती कि हत्यारों को फांसी हो। मैं चाहती हूं कि वे ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे रहें और हर दिन उस दर्द को महसूस करें जो उन्होंने मुझे दिया है।"
हासिरानी का सीधा आरोप है कि जब से सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव जीता है, तब से उनका परिवार विरोधियों की आंखों में खटक रहा था। उन्होंने इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक हत्या करार दिया है।
सुवेंदु का 'दाहिना हाथ' छिनने के मायने क्या हैं?
चंद्रनाथ रथ सिर्फ एक पीए नहीं थे, वे सुवेंदु अधिकारी के चुनावी मैनेजमेंट (नंदीग्राम और भवानीपुर) की रीढ़ की हड्डी थे। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को संभालना हो या रणनीतिक मीटिंग्स को गोपनीय रखना, चंद्रनाथ हर काम में माहिर थे। उनकी हत्या ने सुवेंदु अधिकारी के 'इनर सर्कल' को हिलाकर रख दिया है।
पुलिस ने एक संदिग्ध कार जब्त की है जिसकी नंबर प्लेट सिलीगुड़ी की है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वह नंबर प्लेट फर्जी थी। असली नंबर वाली कार सिलीगुड़ी में खड़ी मिली। इससे साफ है कि साजिश बहुत गहरी थी और इसके तार दूर तक जुड़े हो सकते हैं।
चंद्रनाथ रथ का सफर भले ही एक फौजी के रूप में शुरू हुआ और एक रणनीतिकार के रूप में खत्म, लेकिन उनकी कहानी बंगाल की उस रक्तरंजित राजनीति का हिस्सा बन गई है जहाँ वफादारी की कीमत अक्सर जान देकर चुकानी पड़ती है।














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