UP News: ओडीओपी से खुला दुनिया का बाजार, बलिया के सत्तू का लड्डू अब अमेरिका और खाड़ी देशों में बिखेरेगा स्वाद
उत्तर प्रदेश की ओडीओपी योजना का हिस्सा, बलिया का पारंपरिक चना सत्तू, स्थानीय बाज़ारों से ई-कॉमर्स और अमेरिका और खाड़ी राज्यों सहित अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक विस्तार कर रहा है। इस पहल से काफी रोजगार सृजित हुआ है, जीआई टैगिंग मजबूत हुई है, और ब्रांडेड निर्यात के रास्ते खुले हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का बड़ा माध्यम बनती जा रही है। इसी कड़ी में बलिया का प्रसिद्ध चने का सत्तू अब देश की सीमाएं पार कर अमेरिका, चीन, नेपाल और दुबई समेत कई खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है। अब बलिया के सत्तू से तैयार होने वाले लड्डू को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

योगी सरकार की पहल से बलिया का यह पारंपरिक और पौष्टिक उत्पाद अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियो मार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में भी यूपी के इस उत्पाद की लोकप्रियता बढ़ी है।
बलिया का सत्तू ओडीओपी योजना में शामिल होने के बाद तेजी से पहचान बना रहा है। पहले जहां यह उत्पाद गांवों और स्थानीय बाजारों तक सीमित था, वहीं अब यह हेल्दी फूड के रूप में शहरी उपभोक्ताओं की पसंद बनता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों में इसकी मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
अब विदेशों में भेजे जाएंगे सत्तू के लड्डू
निधि उद्योग की संस्थापक नीति अग्रवाल ने बताया कि बलिया के सत्तू से तैयार लड्डू को अमेरिका और खाड़ी देशों में भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बलिया का यह पारंपरिक स्वाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान बनाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से बलिया में सत्तू का कारोबार कई गुना बढ़ा है और ओडीओपी योजना से जुड़ने के बाद इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
सात सौ महिलाओं को मिला रोजगार
सत्तू उत्पादन और पैकेजिंग के बढ़ते कारोबार से बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार मिला है। व्यवस्थापक सौरभ अग्रवाल के अनुसार करीब सात सौ महिलाएं इस कार्य से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके साथ ही द्वाबा क्षेत्र के किसानों का चना सीधे खरीदा जा रहा है, जिससे उन्हें फसल का उचित दाम मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद सत्तू को अलग पहचान मिलेगी और नकली उत्पादों पर रोक लगेगी। इससे देश-विदेश में ब्रांडिंग मजबूत होगी और निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे।
स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक जिला एक उत्पाद योजना का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि बलिया की सांस्कृतिक पहचान अब देशभर में फैल रही है और पीढ़ियों से लोकप्रिय सत्तू अब वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है।
एफपीओ मॉडल से किसानों को जोड़ा गया
मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने बताया कि भृगु मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में सत्तू के स्टॉल लगाए जाते हैं और लोग इसे बाबा का प्रसाद मानते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए चने के सत्तू को ब्रांड बनाने की योजना तैयार की गई। उन्होंने बताया कि आकर्षक पैकेजिंग के जरिए होली, दिवाली जैसे अवसरों पर विशिष्ट लोगों और पुलिस कर्मियों को सत्तू भेंट किया गया, जिससे इसकी पहचान बढ़ी। बाद में इंडस्ट्रियल एरिया में प्रोसेसिंग यूनिट शुरू कर एफपीओ मॉडल के जरिए किसानों और स्थानीय लोगों को जोड़ा गया। वर्तमान में करीब साढ़े छह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चने की खेती हो रही है और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
मंत्रियों और विधायकों तक पहुंचा बलिया का सत्तू
प्रदेश सरकार की पहल से ओडीओपी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों को भी बलिया के सत्तू के पैकेट भेजे हैं, ताकि इस पारंपरिक उत्पाद को व्यापक पहचान मिल सके।












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