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रोबोटिक्स: भविष्य का कृषि उपकरण

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हैदराबाद। मुनीरथम, कुप्पम के आंध्र प्रदेश का एक किसान है। मुनीरथम ने अपने फोन पर मिली अधिसूचना पर ध्यान नहीं दिया जिसकी वजह से उसकी आधी फसल नुकसान हो गई। जबकि पिछले साल फोन पर मिली सूचनाओं ने उसकी फसल को बचा लिया था। कौन भेज रहा था ये सुचनाएं? तो आपको बता दें कि ये सूचनाएं रोबोटिक्स नामक उपकरण द्वारा भेजी जा रही थी, जिसे मुनीरथम ने अपने खेत में लगाया था। इस उपकरण की बदौलत पिछले साल मुनिरथम अपनी फसल को सुरक्षित रख पाया। जबकि दूसरे साल इस उपकरण ने उसे अपनी गलतियों को समझने में मदद की।

रोबोटिक्स

वर्षा, गलत बीज का चयन, तथा कृषि का सही ज्ञान ना होने के कारण किसनों की फसल खराब हो जाती है। खराब फसल के कारण किसान कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं और कर्ज से छुटकारा पाने के लिए वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं। किसानों के जीवन को सुधारने के लिए रोबोटिक्स जैसे उपकरण को बनाया गया है। देश में खेती करने के तरीके को बदलना तथा किसानों के जीवन को सुधारना ही इस यंत्र का मुख्य उद्देश्य है। इस यंत्र की नजर फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों पर बनी रहेगी।

रॉबॉटिक्स को एक्साइबिट सिस्टम्स नामक कंपनी ने बनाया है। कंपनी के सीईओ, सत्यजीत महापात्र का मानना है कि खेती से जुडी समस्याओं को केवल सुधारा ही नहीं जा सकता बल्कि आने वाले समय में वैज्ञानिक खेती से भारत को विश्व का अन्नदाता बनाया जा सकता है। महापात्रा ने कहा, "रोबोटिक्स के माध्यम से किसान को केवल फसल बचाने के निर्देश प्राप्त नहीं होते बल्कि परिशुद्धता पद्धति का उपयोग करके किसान फसल के उत्पादन को भी बढ़ा सकता है।" "मैं इसे फसल की एमआरआई मशीन कहता हूं।"

रोबोटिक्स और यह उपकरण कैसे मदद करता है

यह उपकरण सौर ऊर्जा से चलता है। इसका वजन 2 किलो और इसकी लंबाई 40 सेंटीमीटर है। इसमें लगे सेंसर फसल, मिट्टी तथा नमी पर नज़र रखते हैं। यह उपकरण फोन सुचनाओं के माध्यम से किसानों को जानकारी प्रदान करता है। इसका एंड्रॉइड ऐप पांच भाषाओं में उपलब्ध है - तेलुगू, तमिल, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी। यह उपकरण अन्य विष्यों के अलावा खेती के लिए सही समय तथा सिंचाई के स्तर से जुडे विषयों पर सही निर्णय लेने में मदद करता है।

रोबोटिक्स: भविष्य का कृषि उपकरण

महापात्रा का मानना है, अगर यह उपकरण ना होता तो किसानों को सभी समस्याओं पर खुद नज़र रखनी पड़ती। इस तरह वे मनचाहे परिणाम नहीं पा पाते। खेती की समस्याओं के हल को रूप में कंपनी ने स्वचालन प्रौद्योगिकी का आविष्कार किया। यह प्रौद्योगिकी सिंचाई, निषेचन और मिस्टिंग जैसी समस्याओं के समाधान प्रदान करती है। इस तकनीक की मदद से किसान कहीं पर भी बैठकर जानकारी प्राप्त कर सकता है।

एक्साबिट सिस्टम के संस्थापक और सीओओ प्रशांत साहू ने कहा, "यह तकनीक यंत्र में जुडे वाल्व की मदद से खेतों में पानी लगा सकती है तथा ग्रीनहाउस खेती में पंखों को बंद या चालू कर सकती है।" इस सारी सुविधाओं के अलावा, यह उत्पाद किसानों को सही बीज, जलवायु और मिट्टी के आधार पर सही फसल को चयन करने में मदद करता है। यदि सभी मानदंड़ों का पालन किया जाए तो यह यंत्र ज़मीन के आधार पर सही फसल एवं उत्पादन की गणना भी कर सकता है। कंपनी किसानों को विशेषज्ञों के साथ भी जो़डती है ताकि किसानों को सही सलाह मिल सके।

इस टीम का अब तक का सफर

इस कंपनी को चार इंजीनियरिंग कॉलेज के दोस्तों द्वारा स्थापित किया गया है। इनके नाम है अमुल्या मिश्रा, अविनाश अग्रवाल, महापात्र और साहू। एक्सबाइट टीम के लिए यह सफर काफी आसान नहीं था। साहू का कहना है कि सब ने तय किया था कि वे खुद का कोई काम आरंभ करेंगे। परंतु पढाई के बाद सभी किसी ना किसी मल्टीनेश्नल कंपनी में काम करने लगे। साहू ने कह, "परंतु हम अपना लक्ष्य नहीं भूले।" 2013 में हमने अपने लक्ष्य पर काम करना आरंभ किया और सितंबर 2014 में हमने एक्सबाइट की शुरुआत की।

RobotiX, the farming tool of the future is here

पहले साल कंपनी ने फसल की कटाई से जुडी सेवाओं को प्रदान करना आरंभ किया और अक्टूबर 2015 में रोबोटिक्स के प्रोटोटाइप पर काम शुरू किया गया तथा इस उपकरण की बिक्री पिछले साल जुलाई में आरंभ हुई। निवेश के लिए हमने दोस्तों और रिश्तेदारों से मदद ली। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हमने फिल्ड पर भी काम किया। अब कंपनी के पास निवेशक भी हैं तथा 40 से भी अधिक ग्राहक इनके 200 नए रोबोटिक्स उपकरण को खरीदने के लिए तैयार बैठे हैं। अब तक इन चार साथियों की कंपनी ने लंबा सफर तय कर लिया है।

आखिरी चुनौती

महापात्रा का मानना है कि उत्पाद के डिजाइन तथा उसके प्रदर्शन के अलावा भी एक बहुत बड़ी चुनौती उनके सामने खडी है। महापात्रा का कहना है, "असली समस्या यह है कि भारतीय किसान बदलने के लिए तैयार नहीं है। वह अभी भी खेती के परंपरागत तरीके तथा विकल्पों को चुनना पसंद करता है।" इन्होंने आगे कहा, "रोबोटिक्स उनकी समस्याओं के समाधान के रूप में बनाया गया है परंतु भारत में कृषि के सुधार के लिए पुनारी सोच को तोडना बहुत जरूरी है तथा किसानों को नए हलों को बिना किसी हिचकिचाहट के अपनाना चाहिए।"

अगर यह बात सच है, तो हम समझ सकते हैं कि मुनीरथम को अपनी फसल पर नुकसान क्यों झेलना पडा। यदि उसने अपने फोन पर आए आंकडों पर ध्यान दिया होता या दी गई सलाह का पालन किया होता तो शायद वह नुकसान से बच सकता था। रोबोटिक्स जैसे उपकरण के होते हुए भी अगर किसान प्राप्त हुई जानकारी पर अमल ना करेगे नुकसान भोगते हैं तो उसकी वजह यंत्र नहीं बल्कि वे स्वयं हैं।

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English summary
Muniratham, a farmer in his mid-fifties, in Kuppam, Andhra Pradesh, witnessed his crop yield fall by half following damage to his crops as he was unable to take serious notice of the details being sent to him on his phone.
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