Indian Orange : क्या आपने इन 5 संतरों का स्वाद चखा ? जानिए जीआई टैग वाले नारंगी की खासियत

हॉर्टिकल्चर में संतरे की खेती (orange farming) काफी लोकप्रिय है। महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के किसान बड़ी मात्रा में संतरों का उत्पादन कर रहे हैं। जानिए देश के जीआई टैग वाले पांच संतरों की विशेषता

नई दिल्ली, 06 जून : कई मशहूर फलों में भारत के संतरे (Indian Orange) भी फलों को पसंद करने वाले लोगों के बीच खासे पॉपुलर हैं। वनइंडिया हिंदी के इस आलेख में हम बताएंगे पांच स्पेशल संतरों के बारे में। महाराष्ट्र के दो, कर्नाटक, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के एक-एक संतरों को उनकी विशेषता के कारण जीआई टैग दिया गया है। जिन ऑरेंज को जीआई टैग दिए गए हैं, इनमें हर एक की अपनी खासियत है। संतरे की खेती (orange farming) के बाद ताजे फलों का उपयोग आम तौर पर जूस के लिए किया जाता है। इसके अलावा संतरे का कई और तरीकों से भी इस्तेमाल किया जाता है। विशेष रिपोर्ट में पढ़िए संतरों की विशेषता

संतरा खाने से सेहत में लाभ

संतरा खाने से सेहत में लाभ

संतरे को लंबे समय से पौष्टिक और स्वादिष्ट आहार के के रूप में जाना जाता है। संतरे का साइट्रस (Citrus) अच्छे स्वाद के अलावा सेहत के लिए भी अच्छा होता है। इसका सेवन हृदय रोग को रोकने में मददगार होता है, क्योंकि संतरे पोटेशियम से भरपूर होते हैं। संतरे के फाइटोकेमिकल्स (phytochemicals) कैंसर से बचाव कर सकते हैं। इसके अलावा संतरा कई सामान्य बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी कारगर है।

फलों की खेती को बढ़ावा

फलों की खेती को बढ़ावा

2017-18 के बाद भारत में संतरों के उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2017-18 में 51.01 लाख टन, 2018-19 में 62.43 लाख टन संतरे का उत्पादन हुआ। 2019-20 में 63.97 लाख टन से अधिक संतरे का उत्पादन हुआ। भारत के बड़े संतरा उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा शामिल हैं। बता दें कि संतरे की खेती जैसे उद्यम को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन (MIDH) चला रही है। अप्रैल 2015 से कार्यान्वित इस मिशन के तहत फल, सब्जियों, के अलावा मशरूम, मसाले, फूल, सुगंधित पौधे, नारियल, काजू और कोको जैसे उत्पादों की खेती को शामिल किया गया है। MIDH के अंतर्गत सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आते हैं।

कर्नाटक का संतरा, एसिड और चीनी का उत्कृष्ट मिश्रण

कर्नाटक का संतरा, एसिड और चीनी का उत्कृष्ट मिश्रण

संतरों के विशेष गुणों के आधार पर सरकार की ओर से जीआई टैग दिए जाते हैं। कर्नाटक के कूर्ग ऑरेंज (Coorg Orange) को जीआई टैग दिया गया है। कूर्ग संतरा पश्चिमी घाट के पहाड़ी क्षेत्र में उगाया जाता है। यह किस्म मध्यम आकार की, टाइट छिलके वाली, पीले रंग की, गहरे नारंगी रंग की गूदे वाली होती है। कूर्ग ऑरेंज कर्नाटक के कोडागु, हासन और चिकमगलूर जिलों में उगाया जाता है।

कैसा होता है पेड़
कूर्ग भारत के पश्चिमी घाटों में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है। कूर्ग मैंडरिन संतरे (mandarin oranges) के लिए प्रसिद्ध है। कूर्ग संतरे की विशेषता गहरे नारंगी रंग का गूदा, कोमल, रसदार फल है। इसमें भरपूर स्वाद होता है। एसिड और चीनी के उत्कृष्ट मिश्रण इसकी गुणवत्ता को और बेहतर बनाता है। कूर्ग संतरे के पौधे की शाखाएं काफी फैली हुई होती हैं। जड़ से 1-2 मीटर की ऊंचाई पर शाखाएं फैलनी शुरू हो जाती हैं। शाखाएं मुख्य तने पर स्पाइरल (घुमावदार) रूप में होती हैं। इसकी टहनियां बहुत पतली होती हैं।

अरुणाचल के संतरे की दुबई में डिमांड

अरुणाचल के संतरे की दुबई में डिमांड

पूर्वोत्तर भारत में पैदा होने वाले अरुणाचल संतरे को भी जीआई टैग दिया जा चुका है। मीठे-खट्टे स्वाद के साथ गोल आकार के इस संतरे के ऊपर मध्यम मोटा छिलका होता है। फल के पूरी तरह पक जाने पर छिलके का रंग नारंगी हो जाता है। फलों व अन्य उत्पादों के निर्यात के लिए काम कर रही संस्था- एपीडा-APEDA ने अरुणाचल प्रदेश से लगभग 1 मीट्रिक टन ताजे मैंडरिन संतरे को साल 2018 में दुबई निर्यात किया था। विशेष रूप से अपने मीठे-खट्टे स्वाद और भरपूर रस के लिए जाना जाने वाला अरुणाचल संतरा अरुणाचल प्रदेश की जलवायु जैसी परिस्थितियों में अच्छी तरह से बढ़ता है।

नागपुर के संतरों की डिमांड, 15 मीट्रिक टन एक्सपोर्ट

नागपुर के संतरों की डिमांड, 15 मीट्रिक टन एक्सपोर्ट

महाराष्ट्र का नागपुर शहर संतरे के लिए खास तौर से पॉपुलर है। यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में अक्सर संतरे बिकते देखे जा सकते हैं। स्टेशन या बस अड्डों पर नागपुर की नारंगी का जूस बेचा जाता है। नागपुर के संतरों की लोकप्रियता और डिमांड का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि APEDA और महाराष्ट्र स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड (MSAMB) ने संयुक्त रुप से 15 मीट्रिक टन नागपुर संतरे का निर्यात दुबई में किया गया था।

जालना के संतरे छिलकों की मोटाई के लिए प्रसिद्ध

जालना के संतरे छिलकों की मोटाई के लिए प्रसिद्ध

महाराष्ट्र के जालना के संतरे को भी जीआई टैग दिया गया है। मीठा नारंगी का रस उच्च टीएसएस कंटेंट (TSS) के कारण स्वाद में मीठा होता है। जालना के मीठे नारंगी की किस्म को न्यूसेलर किस्म (Nucellar variety) के रूप में जाना जाता है। जालना के संतरे छिलकों की मोटाई के लिए प्रसिद्ध हैं। इन संतरों में पोटेशियम और नाइट्रोजन भरपूर मात्रा में होती है। इस कारण गूदे सुरक्षित रहते हैं।

मणिपुर के संतरों की लोकप्रियता

मणिपुर के संतरों की लोकप्रियता

मणिपुर का तामेंगलोंग मैंडरिन नारंगी (Tamenglong mandarin orange) आकार में बड़ा होता है। इसका वजन औसतन 232.76 ग्राम होता है। संतरे की ये वेराइटी अनोखे मीठा और खट्टे स्वाद के कॉम्बिनेशन के लिए जाना जाता है। इसमें भरपूर रस (लगभग 45 प्रतिशत) होता है। एस्कॉर्बिक एसिड (48.12 मिलीग्राम / 100 मिलीलीटर) होने से इसे जूस के लिए शानदार ऑप्शन माना जाता है।

जैविक तरीके से संतरे की खेती
मणिपुर के ये संतरे तामेंगलोंग की पहाड़ियों में 1,800 हेक्टेयर में उगाए जाते हैं। इनमें से 400 हेक्टेयर को MOMA (मणिपुर ऑर्गेनिक मिशन एजेंसी) द्वारा जैविक के रूप में प्रमाणित किया गया है। तामेंगलोंग संतरा / मैंडरिन (Citrus reticulata) एक अनोखी फसल है जो केवल मणिपुर राज्य के तामेंगलोंग जिले में पाई जाती है। तामेंगलोंग संतरा विटामिन ए, बी, सी और फास्फोरस से भरपूर होता है। इसका सेवन ताजा या जूस, जैम, स्क्वैश और सिरप के रूप में किया जाता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+