New Hybrid Chilli में कीड़े नहीं लगेंगे, जल्दी तैयार होती है फसल, किसान छप्परफाड़ कमाई कर सकेंगे, जानिए
New Hybrid Chilli की खेती मिर्च उगाने वाले किसानों के लिए शानदार ऑप्शन है। तेलंगाना में मिर्च पर शोध के दौरान NCH-6889 वेराइटी वाली मिर्च को काफी उन्नत किस्म का माना गया है। किसान फसल के नुकसान से बच सकते हैं।

किसानों के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कई बार लाभ का सौदा होता है। तेलंगाना में मिर्च की ऐसी हाइब्रिड प्रजाति विकसित की गई है, जिससे मिर्च की खेती करने वाले किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
किसानों को Nuziveedu Seeds Research की तरफ से विकसित मिर्च की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे उनका नुकसान कम किया जा सकेगा। जानिए मिर्च की इस खास वेराइटी के बारे में।
मिर्च की इस प्रजाति का नाम एनसीएच-6889 है। इसकी खेती से काली मिर्च के किसानों को काली यात्रा से बड़ी राहत मिलेगी। इसकी खेती करने वाले किसानों को इनकम सुधारने और नुकसान कम करने का मौका मिलेगा।
Nuziveedu Seeds बीजों में 50 साल से शोध करने वाली कंपनी है, जिसने नई मिर्च हाइब्रिड NCH-6889 पेश किया है। इससे किसानों के नुकसान पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
मिर्च की ये वेराइटी जल्द ही भारतीय किसानों के लिए उपलब्ध होगी। किसानों का कहना है कि वे कीड़े की नई प्रजाति से जूझ रहे हैं। नए कीट ब्लैक थ्रिप्स (थ्रिप्स परविस्पिनस) का प्रकोर होने पर मिर्च की फसल चौपट हो सकती है।
ये कीड़ा पौधों का रस चूसकर और रस चूसकर पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। भारी संक्रमण पौधे की वृद्धि को प्रभावित करता है, फूल गिरता है और फलों को पूरी तरह विकसित होने का मौका नहीं मिलता।
एनसीएच-6889 वाले किसानों को प्रमुख लाभ
- थ्रिप्स और एलसीवी के प्रति अच्छी सहनशीलता
- अन्य उपलब्ध मिर्च संकरों की तुलना में अगेती लगभग 10-15 दिन। इससे जल्दी तुड़ाई का लाभ मिलता है। बाजार में फसल जल्दी आएगी।
- उच्च तीखापन (86344 एसएचयू)
- मिर्च की फली में अधिक बीज। मिर्च का वजन (80-85)
- प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक उपज (35-40 क्विंटल/एकड़)
कीड़ों का प्रभाव होने पर उपज में कमी आती है। 2021 में मिर्च की फसल में देश के दक्षिणी भागों में अन्य थ्रिप्स प्रजातियों के विपरीत उत्तर पूर्व मानसून की भारी वर्षा के कारण टी. परविस्पिनस का भारी संक्रमण देखा गया था।
कई रसायनों के छिड़काव के बावजूद किसान कीट की नई प्रजाति को नियंत्रित नहीं कर सके और 60-70 फीसदी फसल बर्बाद हो गई। लाखों का नुकसान उठाना पड़ा। नई प्रजाति और कीड़ों से बचाव की दवा के छिड़काव पर 10 हजार तक बचता है।
इसी नुकसान से बचने के लिए संकर एनसीएच-6889 विकसित किया गया है। नई प्रजाति पत्तियों और फलों को खाने वाले ब्लैक थ्रिप्स को सहन कर सकता है। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और भारत के पूर्वी राज्यों में इसका लाभ हुआ।
मिर्च उगाने वाले अन्य राज्यों में पिछले दो वर्षों तक मल्टी-लोकेशन परीक्षण किए गए। हाइब्रिड का परीक्षण सफल रहा। इस पर लोगों का कहना है कि यह खेती की लागत घटाने, बेहतर गुणवत्ता और उपज की आस वाले किसान इस प्रजाति से उत्साहित हैं।












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