कृषि क्षेत्र पर रही वित्त मंत्री की मेहरबानी

मुखर्जी ने 2012-13 के अपने बजट भाषण में कहा, सरकार के लिये कृषि प्राथमिक क्षेत्र है। कृषि एवं सहकारिता के लिये कुल योजनागत व्यय 2012-13 में 18 प्रतिशत बढ़ाकर 20,208 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। वित्त वर्ष 2011-12 में यह 17,123 करोड़ रुपये था। देश के पूर्वी हिस्से में हरित क्रांति लाने की योजना के लिये आवंटन अगले वित्त वर्ष के लिये 600 करोड़ रुपये बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया गया है। इस कार्यक्रम की सफलता तथा 2011-12 के फसल वर्ष में 70 लाख टन अतिरिक्त धान उत्पादन को देखते हुए आवंटन राशि बढ़ायी गयी है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के लिए भी आवंटन 17 प्रतिशत बढ़ाकर 9,217 करोड़ रुपये किया गया है।
इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह राशि 7,860 करोड़ रुपये थी। मुखर्जी ने कहा, किसानों को समय पर सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। मैं 2012-13 के लिये कृषि ऋण की सीमा 1 लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर 5,75,000 करोड़ रुपये किये जाने का प्रस्ताव करता हूं। चालू वित्त वर्ष में कृषि ऋण का लक्ष्य 4,75,000 करोड़ रुपये था। अप्रैल-नवंबर अवधि के दौरान बैंकों द्वारा किसानों को 2,94,023 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया।
वित्त मंत्री ने कृषि में वैज्ञानिक खोज के लिए ज्यादा प्रोत्साहन देने का वादा किया। साथ ही किसानों को दिया जाने वाला किसान क्रेडिट कार्ड को स्मार्ट कार्ड के रूप में इस्तेमाल करने की भी घोषणा की। इससे इस कार्ड से एटीएम से पैसा निकाला जा सकेगा। वित्त मंत्री ने सिंचाई योजनाओं व कृषि क्षेत्र के अन्य कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की भी बात कही। उन्होंने अगले वित्तीय वर्ष में सिंचाई क्षेत्र के लिए 500 करोड़ का आवंटन किया। किसानों को समय पर कर्ज चुकाने पर 3 फीसदी ब्याज दर कम करने की भी घोषणा की जिससे काफी किसानों को मदद मिलेगा। वित्त मंत्री ने चौधरी चरण सिंह केंद्रीय कृषि विवि को 100 करोड़ व हैदराबाद में कृषि विश्वविद्यालय को 50 करोड़ देने का वादा दिया जिसका इस्तेमाल कृषि अनुसंधान में किया जायेगा।












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