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GI Tag Mango : 'फलों का राजा' क्या आपको मिला ? इन राज्यों की विशेषता हैं ये रसीले आम

भारत के मिट्टी में कई ऐसी चीजें पैदा होती हैं जो क्षेत्र विशेष की खासियत होती हैं। आम को फलों का राजा कहा जाता है। भारत में 10 आमों को जीआई टैग दिए गए हैं। जानिए क्या है जीआई टैग वाले इन आमों की विशेषता

नई दिल्ली, 02 जून : आम की वेराइटी में पाए जाने वाले खास गुणों के कारण सरकार की तरफ से आमों को जीआई टैग (GI Tag Mango) दिए जाते हैं। जीआई यानी ज्योगरॉफिकल इंडिकेशन। मतलब जिस भौगोलिक इलाके या जमीन पर आमों की वेराइटी पैदा होती है, वह यूनिक है। ज्ञात इतिहास में उस इलाके में ही वह आम पहली बार पैदा हुआ। बाद में उस आम की खेती किसी दूसरी जगह भी की जा सकती है लेकिन मूल रूप से उसे जीआई टैग वाले राज्य या क्षेत्र का ही माना जाएगा। उदाहरण के लिए बंगाल के मालदा जिले में पैदा होने वाला फजली आम या उत्तर प्रदेश का मलीहाबादी आम।

10 आमों को मिले जीआई टैग

गौरतलब है कि भारत के आमों की विदेश में भी भारी डिमांड है। यूएई और अमेरिका जैसे देशों में करोड़ों रुपये के आम निर्यात किए जाते हैं। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के अलावा कर्नाटक और बिहार के आमों को भी जीआई टैग दिया गया है। वनइंडिया हिंदी की इस रिपोर्ट में जानिए आम की उन 10 किस्मों के बारे में जिन्हें जीआई टैग दिए जा चुके हैं। जानिए किस राज्य के कौन से आम को किस विशेषता के कारण जीआई टैग दिया गया है।

महाराष्ट्र का अल्फोंसो

महाराष्ट्र का अल्फोंसो

कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA-एपीडा) के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर महाराष्ट्र में पैदा होने वाला आम अल्फोंसो को जीआई टैग दिए जाने की सूचना जारी की गई है। इसकी विशेषता में लिखा गया है कि यह आम पकने पर अल्फोंसो आम के छिलके पतले हो जाते हैं और रंग ऑरेंज येलो हो जाता है। अल्फोंसो के निचले हिस्से में रेड ब्लश जैसा रंग होता है जो इस फल को अलग पहचान देता है। केवल कोंकण रीजन में ही पैदा होने वाले अल्फोंसो में रेड ब्लश रंग वाली खासियत होती है, किसी दूसरे क्षेत्र में ऐसा नहीं पाया जाता। अल्फोंसो का स्वाद अनोखा होता है। ये अपने टेक्सचर, अरोमा और जल्दी पकने और लंबे समय तक क्वालिटी बरकरार रहने के लिए पॉपुलर है। अल्फोंसो का बोटैनिकल नाम मैंगीफेरा इंडिका एल है। पकने से पहले अल्फोंसो के छिलके मोटे और हरे होते हैं।

उत्तर प्रदेश के दो आमों को जीआई टैग

उत्तर प्रदेश के दो आमों को जीआई टैग

उत्तर प्रदेश के काकोरी तहसील का मलीहाबादी आम। मलीहाबादी आम को दशहरी नाम से भी जाना जाता है। आम की इस वेराइटी में फाइबर (रेशा) नहीं होता और इसके पल्प काफी मीठे होते हैं। गोमती नदी के किनारे पैदा होने वाला ये आम मलीहाबादी दशहरी के रूप में पॉपुलर है। लखनऊ में पैदा होने वाले मलीहाबादी आम के अलावा यूपी के बागपत जिले में पैदा होने वाला आम रातौल मैंगो को भी जीआई टैग मिल चुका है। रातौल को सितंबर, 2021 में जीआई टैग मिला। रातौल आम उत्पादक संघ (Rataul Mango Producers Association) के आवेदन पर जीआई टैग दिया गया।

बिहार का जर्दालु आम जीआई टैग के साथ

बिहार का जर्दालु आम जीआई टैग के साथ

जीआई टैग वाला जर्दालु आम भागलपुरी जर्दालु के नाम से भी लोकप्रिय है। बिहार के भागलपुर, बांका और मुंगेर जिलों के आसपास में उगाए जाने वाला जर्दालु आम शुरुआत से मध्य-मौसम में पैदा होने वाली आम की वेराइटी है।

कर्नाटक का अप्पेमिडी मैंगो

कर्नाटक का अप्पेमिडी मैंगो

कर्नाटक के अप्पेमिडी आम में कम रेशे होते हैं। आम की ये वेराइटी नाजुक होती है। स्वाद में ये आम खट्टा होता है। अप्पेमिडी आमों को उनके रंग, आकार, आकार, पल्प, शेल्फ-लाइफ और फसल के मौसम के अलावा उनकी अनूठी सुगंध और स्वाद से पहचाना जाता है। अप्पेमिडी मूल रूप से पश्चिमी घाट के जंगलों में पैदा होते हैं। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ और शिमोगा जिलों में अघनाशिनी, कुमुदवती, काली, वरदा, बेदती और शरवती नदियों की घाटियों में सदियों पुराने आम के प्राकृतिक वृक्षारोपण देखे जा सकते हैं। हालांकि, अप्पेमिडी कोई ऐसा आम नहीं जिसे पुराना कहा जा सके। यह आम के अचार उद्योग और कर्नाटक की खाद्य संस्कृति के केंद्र में है। कच्चे फलों का उपयोग मुख्य रूप से अचार के लिए किया जाता है।

आंध्र प्रदेश का बेगनपल्ले आम

आंध्र प्रदेश का बेगनपल्ले आम

आंध्र प्रदेश का बेगनपल्ले आम।आम की इस किस्म में भरपूर पल्प होता है। रेशेदार आम नहीं होने के कारण इसका उपयोग मैंगो शेक जैसी चीजें बनाने में होता है। समर ड्रिंक के रूप में मैंगो शेक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय होता है। बेगनपल्ले आम आकार में बड़े और तिरछे अंडाकार होते हैं। इस आम का रंग सुनहरा पीला होता इसकी शेल्फ लाइफ अच्छी होती है। यह आम का सीजन शुरू होने के बाद लगभग मध्य-मौसम में पैदा होता है।

ऑस्ट्रेलिया भेजे गए आम
APEDA के आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक के मालुर (Malur) में बनाए गए इनोवा बायो पार्क लिमिटेड से 19 मीट्रिक टन आम ऑस्ट्रेलिया में एक्सपोर्ट किए गए। इसमें बेगनपल्ले के अलावा हिमम्पासंद (Himampasand) और नीलम (Neelam) आम की किस्मों भी शामिल थीं।

पश्चिम बंगाल का फजली आम

पश्चिम बंगाल का फजली आम

पश्चिम बंगाल के तीन आमों को जीआई टैग दिया गया है। फजली आम मालदा जिले में उगाए जाने वाले आम की एक किस्म है। फजली आकार में बड़ा होता है और एक आम का वजन 700-1500 ग्राम के बीच वैरी करता है। इसके छिलके खुरदरे और मध्यम मोटाई के होते हैं। फजली बड़े, सख्त से मुलायम पल्प के साथ पसंद किए जाते हैं। आम की इस वेराइटी का गूदा मीठा और रेशे रहित होता है। जीआई टैग वाले फजली आम को मध्य पूर्वी देश बहरीन में बड़ी मात्रा में निर्यात किया गया था।

 पश्चिम बंगाल के मालदा का खिरसापति आम

पश्चिम बंगाल के मालदा का खिरसापति आम

पश्चिम बंगाल के मालदा का खिरसापति आम अपने आकार को लेकर लोकप्रिय है। फजली की तरह खिरसापति या हिमसागर मैंगो का उत्पादन भी पश्चिम बंगाल के मालदा में ही होता है। इक आम की साइज मीडियम से लार्ज के बीच होती है। 250-340 ग्राम के बीच आम का वजन वैरी करता है। ओवल शेप का खिरसापति आम पीले और हरे रंग (Yellowish Green) में आता है। आम के छिलके खुरदुरे होते हैं। स्वाद में ये आम भी काफी मीठा होता है।

मालदा का लक्ष्मण भोग आम

मालदा का लक्ष्मण भोग आम

मालदा का लक्ष्मण भोग आम अपने रंग को लेकर लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है। फजली और खिरसापति आम की तरह लक्ष्मणभोग आम की वेराइटी भी मालदा में होती है। लक्ष्मण भोग आम हल्की मिठास के लिए जाना जाता है। इस आम में भी रेशे नहीं होते यानी फाइबर फ्रीम मैंगो खाने वाले लोगों को ये आम आकर्षित करता है। लक्ष्मणभोग आम का रंग लाल रंग और सुनहरा पीला मिला हुआ होता है।

गुजरात का गिर केसर, शुगर / एसिड का बेहतरीन मिश्रण

गुजरात का गिर केसर, शुगर / एसिड का बेहतरीन मिश्रण

गिर केसर आम गुजरात का विशेष उत्पाद है। जूनागढ़ क्षेत्र का प्रसिद्ध आम गिर केसर गूदे के केसर रंग के आधार पर गिर केसर मैंगो का नामकरण किया गया है। गिरकेसर आम स्वाद, सुगंध, गूदे के रंग और मिठास की विशिष्टता के लिए जाना जाता है। प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऑर्गेनोलेप्टिक (organoleptic) विशेषताओं के लिए भी गिर केसर आम खाने के शौकीन लोगों की पॉपुलर चॉइस है। गिर केसर में शुगर / एसिड का मिश्रण बेहतरीन होता है।

मराठवाड़ा का केसर आम

मराठवाड़ा का केसर आम

मराठवाड़ा केसर आम में पल्प भरपूर होता है। अल्फोंसो और अन्य आम की तुलना में इसकी कीमत काफी कम होती है। मराठवाड़ा मैंगो ग्रोवर एसोसिएसन के मुताबिक इस आम की खेती लगभग दो लाख हेक्टेयर जमीन पर होती है। केवल औरंगाबाद जिले में 40 हजार हेक्टेयर में मराठवाड़ा केसर का उत्पादन होता है। इसके अलावा जालना, बीड और लातूर में भी मराठवाड़ा केसर किस्म के आम का उत्पादन बढ़ रहा है।

अमेरिका जापान में भारी डिमांड
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मराठवाड़ा केसर की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इसके मुताबिक इस आम की लोकप्रियता के मद्देनजर डाक विभाग की ओर से स्पेशल पोस्टल कवर मराठवाड़ा केसर पर जारी किया गया। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान और खाड़ी देशों में इस आम की काफी डिमांड है। मार्च 2022 में सरकार ने बताया कि महाराष्ट्र के किसानों से मराठवाडा केसर खरीदने के बाद पहली बार इनका निर्यात किया गया।

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