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हरित क्रांति : भारत के धरतीपुत्रों ने 61 साल में रिकॉर्ड फसल उपजाई, खाद्यान्न पैदावार में तीन गुना उछाल

केंद्र सरकार का दावा है कि भारत में हरित क्रांति के कारण खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है। सरकार का कहना है कि खाद्यान्न उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बना और कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है। Green Revolution India Aatmanirbhar

नई दिल्ली, 30 अगस्त : भारत में हरित क्रांति की बदौलत खाद्यान्न उपज में तीन गुना वृद्धि हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1960 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति की मदद से गत 61 साल में भारत की प्रति हेक्टेयर उपज बढ़कर 2.39 टन हो गया है। केंद्र ने मंगलवार को एक डेटा चार्ट जारी कर कहा, खाद्यान्न का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1960 के दशक के मध्य में 757 किलोग्राम थी। साल 2021 में प्रति हेक्टेयर खाद्यान्न उत्पादन 2.39 टन हो गया।

कृषि उत्पादकता बढ़ी, भारत आत्मनिर्भर बना

कृषि उत्पादकता बढ़ी, भारत आत्मनिर्भर बना

केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि 'हरित क्रांति' के कारण भारत में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा, देश आत्मनिर्भर बना और कृषि उत्पादकता बढ़ी। सरकार के मुताबिक प्रमुख कृषि फसलों के उत्पादन के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2021-22 सीज़न के दौरान भारत में खाद्यान्न का उत्पादन रिकॉर्ड 315.72 मिलियन टन होने का अनुमान है। पिछले साल 2020-21 के दौरान कटाई की तुलना में उत्पादन 4.98 मिलियन टन अधिक होने की संभावना है। बता दें कि केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 17 अगस्त को उत्पादन अनुमान जारी किया।

केंद्र सरकार की किसान हितैषी

केंद्र सरकार की किसान हितैषी

सरकार ने कहा, 2021-22 में उत्पादन पिछले पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के औसत उत्पादन की तुलना में 25 मिलियन टन अधिक होने का अनुमान है। धान, मक्का, चना, दलहन, रेपसीड और सरसों, तिलहन और गन्ना का रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का मानना ​​है कि फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन केंद्र सरकार की किसान हितैषी नीतियों के साथ-साथ किसानों और वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा है।

 कृषि मंत्रालय का अनुमान

कृषि मंत्रालय का अनुमान

रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन पर समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक नवीनतम अनुमानों के अनुसार कृषि मंत्रालय ने कहा, चावल का कुल उत्पादन 130.29 मिलियन टन होने की संभावना है। अन्य अनाजों के उत्पादन अनुमान पर एक नजर-

गेहूं 106.84 मिलियन टन
पोषक/मोटा अनाज 50.90 मिलियन टन
मक्का 33.62 मिलियन टन
दलहन 27.69 मिलियन टन
अरहर 4.34 मिलियन टन
चना 13.75 मिलियन टन
तिलहन 37.70 मिलियन टन
मूंगफली 10.11 मिलियन टन
सोयाबीन 12.99 मिलियन टन
रेपसीड और सरसों 11.75 मिलियन टन
गन्ना 431.81 मिलियन टन
कपास 31.20 मिलियन गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम)
जूट और मेस्टा 10.32 मिलियन गांठ (bales) (प्रत्येक 180 किलोग्राम)।

पांच वर्षों में औसत खाद्यान्न

पांच वर्षों में औसत खाद्यान्न

पिछले पांच वर्षों के दौरान चावल और गेहूं जैसे अनाज का औसत उत्पादन कितना हुआ ? इस पर भी केंद्र सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। बताया गया है कि 2021-22 के दौरान 13.85 मिलियन टन अधिक चावल उत्पादन का अनुमान है। गेहूं की पैदावार 2.96 मिलियन टन अधिक होने की संभावना है। पिछले पांच वर्षों के औसत खाद्यान्न उत्पादों के आंकड़ों पर एक नजर-

  • गेहूं 103.88 मिलियन टन
  • दालों (Pulse) 23.82 मिलियन टन
कम जमीन पर धान की बुआई

कम जमीन पर धान की बुआई

खरीफ सीजन में खाद्यान्न उत्पादन के बारे में अनुमान को उत्पादन कम होने की आशंका भी जताई गई। नवीनतम रकबे के आंकड़ों के अनुसार, धान की खेती का रकबा पिछले सीजन की तुलना में 8 प्रतिशत घटा है। इस सीजन में 343.7 लाख हेक्टेयर कम जमीन पर धान की बुआई हुई।

बारिश की कमी, खरीफ सीजन में कम बुआई

बारिश की कमी, खरीफ सीजन में कम बुआई

खबरों के मुताबिक भारत में किसानों ने इस खरीफ सीजन में कम धान की बुवाई की है। बता दें कि खरीफ की फसलें ज्यादातर मानसून-जून और जुलाई के दौरान बोई जाती हैं। फसलों की कटाई अक्टूबर और नवंबर के दौरान काटी जाती है। बुवाई क्षेत्र में गिरावट का प्राथमिक कारण जून के महीने में मानसून की धीमी प्रगति और देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में बारिश की कमी होना रहा। हालांकि ओवरऑल खरीफ की बुआई बेहतर बताई जा रही है। इस सीजन में 1013 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई जो 2021 की तुलना में 2 प्रतिशत कम है। कृषि और किसान कल्याण मंत्री के अनुसार 2021 में, कुल बुवाई 1038 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

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