Rajnigandha : इस फूल की खेती में लागत कम, मुनाफा लाखों, खिल उठेंगे किसानों के चेहरे
पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों के किसान भी फूलों की खेती कर रहे हैं। रजनीगंधा के फूलों की खेती किसानों के लिए कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाने का ऑप्शन है। जानिए कैसे
नई दिल्ली, 05 मई : भारत के किसान अब पारंपरिक खेती से एक कदम आगे बढ़कर वैज्ञानिक उपकरणों और इनोवेटिव तरीकों को अपनाकर खेती में शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। फूलों की खेती ऐसे ही इनोवेटिव फार्मिंग का उदाहरण है। फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की खेती में किसानों को शुरुआत में निवेश तो करना पड़ता है, लेकिन कई वर्षों तक इसका मुनाफा मिलता रहता है, यानी फूलों की खेती फायदे का सौदा है। वनइंडिया हिंदी की इस रिपोर्ट में हम बात करेंगे एक खूबसूरत फूल- रजनीगंधा (Rajnigandha) की खेती की।

कहां इस्तेमाल होता है रजनीगंधा
रजनीगंधा की खेती कर किसान मालामाल हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस शानदार फूल की मार्केट डिमांड काफी अच्छी है। कई जगहों पर रजनीगंधा का उपयोग महिलाओं के बालों में लगाए जाने वाले गजरा की तरह किया जाता है। इसके अलावा शादी समारोह और घरों के गुलदस्ते की सजावट में भी रजनीगंधा का इस्तेमाल होता है।
फूलों की खेती से फायदे
दरअसल, पारंपरिक फसलों की खेती के कारण कई जगहों पर भूगर्भ जलस्तर नीचे जाने की खबरें आई हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक लगातार एक ही फसल लगाने के कारण मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी प्रभावित होती है। उचित तरीकों से किसानी न करने या जानकारी के अभाव में भी किसानों की लागत बढ़ती जाती है। ऐसे में खेती में नुकसान होना स्वाभाविक है। इस नुकसान की भरपाई के लिए कुछ किसानों ने रोमांचक और इनोवेटिव तरीकों से खेती की शुरुआत की है। यानी कम लागत में मुनाफा कमाने का नुस्खा। रजनीगंधा की खेती में पानी कम लगता है। इसलिए किसी भी कृषि कार्य की सबसे बड़ी चिंता- पर्याप्त पानी की उपलब्धता लेकर किसान भाईयों को आशंकाओं से मुक्ति।
कई दिनों तक फ्रेश रहता है रजनीगंधा
फ्लोरीकल्चर में कई विदेशी फूलों की खेती को लेकर भी किसानों के बीच उत्साह है, लेकिन रजनीगंधा फार्मिंग किसानों को कम लागत में मुनाफा देने वाली खेती है। रजनीगंधा के फूलों की खेती लोकप्रिय हो रही है। बाजार में रजनीगंधा की भारी डिमांड को देखते हुए किसानों को इसकी खेती रास आ रही है। रजनीगंधा की खास बात ये भी है कि इसे कई दिनों तक ताजा रखा जा सकता है ऐसे में उत्पाद खराब होने की टेंशन से मुक्ति।
किन राज्यों के किसान उपजा रहे रजनीगंधा
दरअसल, रजनीगंधा का फूल अपनी सुगंध के कारण लोकप्रिय है। शादी समारोह के दौरान होने वाली सजावट में रजनीगंधा का बड़ी मात्रा में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा माला बनाने, घरों के गुलदस्तों को सजाने और महिलाओं के बालों में गजरा लगाने के दौरान भी रजनीगंधा का इस्तेमाल होता है। फिलहाल, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश के किसान रजनीगंधा की खेती कर रहे हैं। महाराष्ट्र के अलावा दक्षिण भारत में कर्नाटक और तमिलनाडु के किसान भी रजनीगंधा के फूलों की खेती कर रहे हैं।
कब होती है रजनीगंधा की खेती
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में जून के महीने में रजनीगंधा की खेती शुरू की जाती है, जबकि मैदानी इलाकों वाले राज्यों के किसान सितंबर के महीने में रजनीगंधा की खेती शुरू करते हैं। रजनीगंधा की खेती के लिए हवादार और पर्याप्त प्रकाश यानी सूरज की रोशनी वाली जगह बेहतर मानी जाती है। रजनीगंधा के फूलों की सिंचाई में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती। कम पानी में तैयार होने वाला यह फूल किसानों को खेती की बढ़ती लागत से बचाता है।
साल में 5 लाख रुपये तक का मुनाफा
किसानों की मानें तो रजनीगंधा के पौधों की रोपाई के लगभग 4 से 5 महीने के बाद फूल खिलने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद फूलों को तोड़कर बाजारों में भेजा जाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक हेक्टेयक जमीन पर रजनीगंधा की खेती करने का खर्च लगभग 1-2 लाख रुपये के बीच आता है। एक हेक्टेयर जमीन पर लगभग 90 से 100 क्विंटल रजनीगंधा के फूलों का उत्पादन हो जाता है। मार्केट रेट को देखते हुए किसानों को एक साल में लगभग 4-5 लाख रुपये का मुनाफा होता है। यानी लागत के मुकाबले लगभग दो से तीन गुना दामों पर रजनीगंधा के फूल बिकते हैं और किसानों को मालामाल कर जाते हैं।
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