Return of the jungle Review: जब दादा की कहानियां बन जाएं बच्चों की सबसे बड़ी ताकत

Return of the Jungle Review: भारतीय एनीमेशन सिनेमा में ऐसी फिल्में कम देखने को मिलती हैं जो मनोरंजन के साथ-साथ अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को भी सहजता से पेश करें। आज बात कर रहे हैं 'रिटर्न ऑफ द जंगल' की, फिल्म 29 मई को रिलीज हुई। लेकिन हमने इसे आज देखा। इसलिए रिव्यू थोड़ी देरी से दे रहे हैं।

निर्देशक वैभव कुमारेश बच्चों की दुनिया को समझते हैं और यही समझ उनकी फिल्म में भी दिखाई देती है। यह फिल्म किसी बड़े रोमांच या असाधारण कल्पना की बजाय उन कहानियों पर भरोसा करती है जो पीढ़ियों से बच्चों को सुनाई जाती रही हैं। नतीजा एक ऐसी पारिवारिक फिल्म के रूप में सामने आता है जो बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी पसंद आ सकती है।

Return of the Jungle Review

कहानी

फिल्म का केंद्र है मिहिर और उसके स्कूल के दोस्त, जो स्कूल के एक दबंग और शरारती लड़के से परेशान हैं। डर और असहायता के बीच वे अपने दादा के पास पहुंचते हैं। दादा बच्चों को सीधे समाधान देने के बजाय उन्हें जंगल की रोचक कहानियां सुनाते हैं।

इन कहानियों में पंचतंत्र की झलक दिखाई देती है, जहां जानवरों और जंगल के किरदारों के माध्यम से दोस्ती, साहस, समझदारी और सहानुभूति जैसे मूल्यों की सीख दी जाती है। धीरे-धीरे बच्चे इन कहानियों के संदेश को अपनी जिंदगी में लागू करना सीखते हैं और अपनी समस्याओं का रास्ता खुद खोज लेते हैं। फिल्म का यही हिस्सा इसे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सीख से भरपूर पारिवारिक फिल्म बनाता है।

निर्देशन और एनीमेशन

वैभव कुमारेश की सबसे बड़ी ताकत हमेशा से उनकी सरल लेकिन प्रभावी कहानी कहने की शैली रही है और यहां भी वह नजर आती है। फिल्म का एनीमेशन रंगों से भरपूर और जीवंत है। जंगल की दुनिया बेहद आकर्षक दिखाई देती है, जहां हर पेड़, हर जानवर और हर दृश्य में एक अलग ऊर्जा महसूस होती है।
किरदारों की डिजाइनिंग भी शानदार है। मुख्य पात्रों के साथ-साथ छोटे-छोटे सहायक किरदार भी अपनी अलग पहचान छोड़ते हैं। बच्चों के लिए यह दुनिया रोमांचक लगती है, जबकि बड़े दर्शकों को इसमें अपने बचपन की कहानियों की झलक दिखाई देती है।

फ़ाइनल वर्डिक्ट

'रिटर्न ऑफ द जंगल' की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह अपनी भारतीय जड़ों को पूरी ईमानदारी से अपनाती है। पंचतंत्र से प्रेरित कथाएं और दादा-पोते के रिश्ते की गर्माहट फिल्म को एक भावनात्मक आधार देती है, जो आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में कहीं न कहीं खोता जा रहा है।

भजन और लोकधुनों से प्रेरित गीत फिल्म के माहौल को और अधिक जीवंत बनाते हैं। संगीत बच्चों को आकर्षित करता है और कहानी के साथ सहज रूप से आगे बढ़ता है।

यह फिल्म किसी बड़े ट्विस्ट या हाई-वोल्टेज ड्रामे पर निर्भर नहीं करती। इसकी ताकत इसकी सादगी और सकारात्मक सोच में छिपी है। बच्चों को जहां इससे मनोरंजन मिलेगा, वहीं उन्हें दोस्ती, समझदारी और आत्मविश्वास की सीख भी मिलेगी।

कुल मिलाकर, 'रिटर्न ऑफ द जंगल' एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर है जो बच्चों को मुस्कुराने का मौका देती है और बड़ों को अपने बचपन की गलियों में वापस ले जाती है। भारतीय एनीमेशन की दुनिया में यह एक प्यारी, सच्ची और दिल को सुकून देने वाली पेशकश है।

रिव्यू : रिटर्न ऑफ जंगल
निर्देशक: वैभव कुमारेश
शैली: एनीमेशन
रेटिंग: 3

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