Trump controversy: डोनाल्ड ट्रंप के उड़ गए होश! $10 अरब के घोटाले में फंसे, कुर्सी पर संकट?
Kennedy Center Donald Trump controversy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड को कानूनी मोर्चे पर एक ही दिन में दो बड़े झटके लगे हैं। एक तरफ मियामी की फेडरल कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे 10 अरब डॉलर के टैक्स केस को दोबारा खोलने का आदेश दिया है, तो दूसरी तरफ वॉशिंगटन की कोर्ट ने केनेडी सेंटर का नाम ट्रंप के नाम पर रखने के फैसले को गैर-कानूनी बता दिया है।
इन दोनों फैसलों ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब ट्रंप और उनकी लीगल टीम को कोर्ट में कई मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

10 अरब डॉलर का टैक्स केस फिर बना ट्रंप की परेशानी
मियामी की फेडरल जज Kathleen M. Williams ने ट्रंप के IRS से जुड़े 10 अरब डॉलर के मुकदमे को दोबारा खोलने का आदेश दिया है। यह मामला कुछ दिन पहले समझौते के बाद बंद हो गया था, लेकिन अब कोर्ट को इस समझौते की प्रक्रिया पर संदेह है। जज ने कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। कोर्ट यह जांचना चाहती है कि कहीं समझौते का इस्तेमाल किसी पक्ष को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए तो नहीं किया गया।
कोर्ट को गुमराह करने के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
मामले में सबसे बड़ा विवाद उस समझौते को लेकर है, जिसके तहत कथित तौर पर 1.8 अरब डॉलर का मुआवजा फंड बनाया गया था। आरोप है कि इस प्रक्रिया से ट्रंप, उनके परिवार और उनके बिजनेस हितों को बड़ा टैक्स लाभ मिल सकता था। अदालत अब यह जानना चाहती है कि क्या सभी तथ्य सही तरीके से कोर्ट के सामने रखे गए थे। यदि अदालत को लगता है कि जानकारी छिपाई गई या गलत पेश की गई, तो ट्रंप की लीगल टीम के लिए नई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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35 पूर्व जजों की एंट्री से केस में आया नया मोड़
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब 35 पूर्व फेडरल जजों के समूह ने अदालत में दस्तावेज जमा कर मामले की गहराई से जांच की मांग की। उनका दावा है कि मुकदमे और समझौते की प्रक्रिया में कई सवाल अनुत्तरित हैं। कोर्ट ने ट्रंप की लीगल टीम को 12 जून तक जवाब देने का आदेश दिया है। उन्हें बताना होगा कि अदालत को गुमराह करने के आरोपों पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
केनेडी सेंटर पर कोर्ट ने पलटा बोर्ड का फैसला
वॉशिंगटन में यूएस डिस्ट्रिक्ट जज Kasey Cooper ने केनेडी सेंटर का नाम बदलकर ट्रंप के नाम पर रखने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि John F. Kennedy Center for the Performing Arts राष्ट्रपति John F. Kennedy की याद में स्थापित राष्ट्रीय स्मारक है और इसका नाम बदलने का अधिकार बोर्ड के पास नहीं है। कोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। इसलिए बोर्ड का फैसला कानूनी रूप से मान्य नहीं माना गया।
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ट्रंप के नाम वाले साइन हटाने और सेंटर बंदी पर रोक
कोर्ट ने आदेश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर सेंटर परिसर से ट्रंप के नाम वाले सभी साइनबोर्ड हटाए जाएं और वेबसाइट से भी संबंधित बदलाव वापस लिए जाएं। साथ ही रेनोवेशन के नाम पर सेंटर को दो साल तक बंद रखने की योजना पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत का मानना है कि बिना स्पष्ट योजना के ऐसा फैसला कलाकारों, कर्मचारियों और दर्शकों के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। अब ट्रंप समर्थित बोर्ड इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।












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