Farmers Crop Loss: ओले और बारिश से फटा किसानों का कलेजा, देशभर में बर्बाद हो रहीं फसलें, जानिए कितना नुकसान

Farmers Crop Loss के कारण संघर्ष कर रहे हैं। बिन मौसम बरसात के कारण कई राज्यों के किसानों की फसल चौपट हो गई है। जानिए प्रमुख खेती आधारित राज्यों में कितने नुकसान की आशंका है।

Farmers Crop Loss

Farmers Crop Loss से जूझ रहे हैं। बिना मौसम हुई बारिश और ओले पड़ने के कारण फसल बर्बाद होने की खबरें हैं। परंपरागत अनाज के साथ-साथ सब्जियां उगाने वाले किसानों पर भी बुरा असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक समेत कई प्रदेशों के किसानों की फसल बरसात और खैतों में जलभराव जैसे कारणों से नष्ट हो रहे हैं। ओले गिरने के कारण टमाटर और आम भी प्रभावित हुए हैं। इस रिपोर्ट में आकलन का प्रयास, किस राज्य के किसान को कितने रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

प्रयागराज में फसलों का नुकसान

किसानों का बड़ा सूबा यूपी भी बिन मौसम बरसात की मार झेल रहा है। प्रयागराज में जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 19 मार्च को बेमौसम बारिश के कारण प्रयागराज के किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई। 21 मार्च को फिर से बारिश और ओलावृष्टि के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई।

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10,030 से अधिक किसानों की फसल नष्ट

19 मार्च को प्रयागराज में 22.6 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, गेहूं के साथ तिलहन और दलहन की 30 से 50% फसलें नष्ट हो गई हैं। आम के बौर भी प्रभावित हुए हैं। इससे इस साल आम के उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। अनुमान के अनुसार बारिश और ओलावृष्टि से प्रयागराज के 10,030 से अधिक किसानों की फसल नष्ट हुई है। जिला प्रशासन ने कहा, ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण के लिए पहुंची टीम को केवल दो दिनों में 10,000 से अधिक किसानों को हुए नुकसान के बारे में पता चला है।

₹ 6.86 करोड़ मुआवजे की डिमांड

एडीएम (वित्त और राजस्व) जगदंबा सिंह के अनुसार, किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए ₹ 6.86 करोड़ मुआवजे की डिमांड सरकार से की जा चुकी है। नुकसान और प्रभावित लोगों के आकलन के लिए सर्वेक्षण करना शुरू कर दिया है। प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित सभी मामलों के प्रभारी जिला नोडल अधिकारी एसडीएम ही हैं। उप निदेशक (कृषि) विनोद कुमार शर्मा के अनुसार, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम के सर्वेक्षण के दौरान कोरांव में 2 करोड़ रुपये की फसल खराब होने की आशंका है। बारा तहसील क्षेत्र में 50 लाख रुपये की फसल खराब।

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तेलंगाना के 80 हजार किसानों पर मार, 1.50 लाख करोड़ का नुकसान

तेलंगाना में भी अचानक बारिश के कारण फसल को बड़ा नुकसान हुआ है। रायथु बंधु समिति के अध्यक्ष और एमएलसी पल्ला राजेश्वर रेड्डी के अनुसार अब तक फसल नुकसान की गणना से पता चला है कि 80,000 किसानों को 1.50 लाख एकड़ तक का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया, "पिछले वर्षों में, 7,000 करोड़ रुपये तक की फसल का नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा, बारिश के कारण जिलों में फसलों के नुकसान की गणना के बाद जिला कलेक्टर अंतिम रिपोर्ट जमा करेंगे। इसके बाद किसानों को मुआवजा देने पर फैसला होगा।

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हरियाणा में सरसों और गेहूं की फसलों को भारी नुकसान

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार बारिश, ओलावृष्टि के कारण रबी की फसल चौपट हुई है। करनाल में तेज हवा के साथ हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। हरियाणा के महेंद्रगढ़, अंबाला और पानीपत जैसे किसानी प्रधान क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कहर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 56,000 हेक्टेयर (1.4 लाख एकड़) में फैली सरसों और गेहूं की फसलों को भारी नुकसान हुआ। कनीना और महेंद्रगढ़ ब्लॉक में सबसे अधिक करीब 49,750 हेक्टेयर में खड़ी फसल खराब हो गई। इस सीजन में कनीना ब्लॉक में 20,500 हेक्टेयर में सरसों और 9,250 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई थी। गेहूं की फसल को 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। 4,000 हेक्टेयर में सरसों को 75 फीसदी तक के नुकसान की आशंका है।

मुआवजे की आस में 11 जिलों के 34 हजार से अधिक किसान

हरियाणा में किसानों के नुकसान पर दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में 11 जिलों के 2700 से अधिक गांवों में 1.57 लाख एकड़ जमीन पर खड़ी फसल खराब होने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार 34 हजार से अधिक किसानों ने मुआवजे के लिए पंजीकरण कराया है। गेहूं और सरसों के अलावा चने और सब्जी की खेती करने वाले किसानों पर भी मार पड़ी है।

गुजरात में 50 प्रतिशत रबी फसल खराब हुई

खराब मौसम के कारण रबी फसलों को 50 फीसदी नुकसान होने की आशंका है। गुजरात में अमरेली, जूनागढ़ और राजकोट जिलों के कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण लगभग 50 प्रतिशत रबी फसल खराब हुई है। सरकारी सर्वेक्षणों के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सौराष्ट्र में मंगलवार को लगातार 15 वें दिन भी मौसम खराब रहा।

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33 में से 27 जिलों में बेमौसम बारिश

सीएम भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर सौराष्ट्र, कच्छ और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि के बाद गेहूं, चना (Gram), धनिया (coriander) और जीरा (cumin seeds) सहित अन्य फसलों का भी सर्वेक्षण हुआ। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, 18 जिलों में 5 से 9 मार्च के बीच 10 मिलीमीटर (मिमी) या उससे अधिक बारिश हुई। राज्य के 33 में से 27 जिलों में बेमौसम बारिश हुई। कृषि मंत्री राघवजी पटेल के अनुसार, किसानों को कितना नुकसान हुआ इसकी सटीक जानकारी सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही हो सकेगी।

24,288 हेक्टेयर में रबी की फसल और धनिया-जीरा खराब हुए

अमरेली के जिला कृषि अधिकारी (डीएओ) जिग्नेश कनानी ने बताया कि चार तालुकों के 123 गांवों में बारिश से 24,288 हेक्टेयर में रबी की फसल और 1,300 हेक्टेयर में बागवानी फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि अमरेली में, कई किसान कपास की कटाई के बाद दिसंबर के अंत में रबी की बुआई करते हैं। देर से बुवाई के कारण राजकोट जैसे जिलों की तुलना में देर से कटाई होती है। रबी की कटाई तेजी से हो रही थी, लेकिन बेमौसम बारिश से गेहूं और चने की क्वालिटी खराब हुई है, जबकि धनिया और जीरा को लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गए।

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PM के होम स्टेट में भी फसल बीमा नहीं करा रहे किसान

चौंकाने वाली बात ये है कि पीएम मोदी का गृह राज्य होने के बावजूद गुजरात सरकार ने 2020 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को लागू न करने का फैसला लिया। इसके बाद से राज्य के किसान अपनी फसलों का कोई बीमा नहीं करा पा रहे हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार राजकोट जिला विकास अधिकारी देव चौधरी ने बताया कि जसदान, कोटडा संगानी, राजकोट, गोंडल और उपलेटा तालुका में 1.24 लाख हेक्टेयर का सर्वेक्षण हुआ। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार सर्वे में 166 गांवों में 792 हेक्टेयर में फसल खराब होने की जानकारी मिली है।

गेहूं और चना के किसान प्रभावित

जूनागढ़ के 26 गांवों में 3,000 हेक्टेयर में फसलों का सर्वे हुआ। डीएओ जेडी गोंडालिया ने बताया कि 120 हेक्टेयर में गेहूं, धनिया और चना को 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान हुआ है, जबकि अन्य क्षेत्रों में दोनों फसलें 10 प्रतिशत से 32 प्रतिशत तक खराब हुई हैं। समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गत रविवार गांधीनगर के जिला कलेक्टरों के साथ मीटिंग में किसानों को हुए नुकसान का आकलन किया।

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गुजरात के आम पर भी असर पड़ा

जूनागढ़, गिर सोमनाथ और अमरेली में आम के बागों को भी ओले गिरने के कारण नुकसान हुआ है। सावरकुंडला और धारी जैसे क्षेत्रों में केसर किस्म के आम के बागों में भी नुकसान की आशंका है। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार आम की खेती करने वाले सरदारसिंह चौहान ने कहा, जनवरी-फरवरी में देर से फूल आने के बाद फल लगना बहुत अच्छा होता है, लेकिन बारिश, ओलावृष्टि और 15 दिनों तक लगातार उमस भरे मौसम के कारण बड़े पैमाने पर फल झड़े। कीटों का हमला भी हुआ। इससे आम को काफी नुकसान हुआ है। राजकोट क्षेत्र में संयुक्त बागवानी निदेशक रमणिक लदानी के अनुसार गीला मौसम कीटों के हमले का कारण बन सकता है। ओले गिरने से फल गिर सकते हैं। लगातार गीला मौसम रस-चूसने वाले कीटों के संक्रमण का कारण बन सकता है।

बिहार-झारखंड के किसानों को नुकसान

बिहार में भी किसान बड़े पैमाने पर खेती करते हैं। यहां बेमौसम बारिश और ओले के कारण 14 हजार हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और पूर्वी चंपारण समेत एक दर्जन से अधिक जिलों के किसानों की फसल चौपट हुई है। पड़ोसी राज्य झारखंड के किसानों को भी नुकसान हुआ है। चार जिलों में अधिक नुकसान की खबर है। रांची, रामगढ़, देवघर और साहिबगंज में अधिक नुकसान हुआ है। दुमका के कई इलाकों में भी फसल पर ओले और बिन मौसम बारिश की मार पड़ी है। दोनों राज्यों की सरकारें नुकसान के आकलन के लिए सर्वे कराएंगी। इस रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में भी लगभग 15 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है।

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महाराष्ट्र में 1.39 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल खराब हुई

खेती-किसानी के मद्देनजर महाराष्ट्र भी भारत के कृषि प्रधान राज्यों में एक है। इस राज्य में बिन मौसम बरसात में 1.39 लाख हेक्टेयर की फसल चौपट होने की आशंका है। दो दिन पहले हुई बारिश में 40 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में भी किसानों को नुकसान की सूचना है। सीएम जगन मोहन रेड्डी ने किसानों की प्रभावित फसलों का सर्वे करने का निर्देश दिया है। नुकसान के आकलन के बाद मुआवजे का आश्वासन भी दिया गया है।

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    पंजाब के सात जिलों में किसानों को बड़ा नुकसान

    गेहूं और सब्जी उत्पादन करने के लिए पंजाब के किसान भी जी तोड़ मेहनत करते हैं। इस राज्य में भी ओले और बिन मौसम बारिश का प्रभाव देखा गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के सात जिलों में 4 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल प्रभावित होने की आशंका है। पटियाला, संगरूर, फतेहगढ़साहिब, मोगा और लुधियाना के गेहूं और सब्जियों के किसानों पर खराब मौसम की मार पड़ी है।

    राजस्थान के 10 जिलों में करीब 40 फीसद नुकसान

    राजस्थान में भी 40 फीसद प्रभावित होने की आशंका है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार खेती के अनुकूल माहौल न होने के कारण तीन महीनों में 5182 गांवों के 21.12 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के 10 जिलों में गेहूं के किसानों के अलावा जीरा, अरंडी और इसगोल में करीब 40 फीसद का नुकसान हुआ है।

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    'मामा' मवेशी, फसल और घरों के नुकसान की भरपाई करेंगे

    मध्य प्रदेश में भी किसानों को नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 32 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा ऐसे किसान जिनकी फसल ओले और बिना सीजन की बरसात से 50 फीसद से अधिक खराब हुई है, ऐसे किसानों के नुकसान की सरकार भरपाई करेगी। फसल बीमा के लाभ का आश्वासन देते हुए सीएम शिवराज ने किसानों की horticulture crops के सर्वे का निर्देश भी दिया है। प्रदेश में मामा के रूप में लोकप्रिय सीएम शिवराज ने विदिशा जिले में प्रभावित किसानों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, गाय-भैंस के नुकसान पर 37,000 रुपये, भेड़-बकरी के नुकसान पर 4,000 रुपये, बछड़ा-बछिया के नुकसान पर 2000 रुपये और मुर्गी के नुकसान पर 100 रुपये दिए जाएंगे। मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी सरकारी सहायता दी जाएगी।

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    तमिलनाडु के किसानों को क्या देगी सरकार

    दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में भी सरकार ने लगातार बारिश के कारण फसलें खराब हुई हैं। तंजावुर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम और माइलादुधुराई में नुकसान सहने वाले किसानों के लिए राहत राशि के रूप में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 20,000 रुपये प्रति हेक्टेयर देने की घोषणा की। मुआवजा वैसे किसानों को मिलेगा जिनकी उपज में 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान हुआ हो। बेमौसम बारिश के कारण जल्दी फसल खराब होने पर किसानों को 3000 रुपये प्रदान मिलेंगे।

    काले चने की फसल खराब होने पर सरकारी सहायता

    नुकसान कम करने के लिए फसलों की तत्काल कटाई के लिए मशीनरी पर 50 फीसद सब्सिडी का ऐलान किया गया है। सीएम स्टालिन ने जिस राहत पैकेज की घोषणा की उसमें काले चने की खेती करने वाले किसान भी शामिल हैं। फसल के नुकसान की भरपाई के लिए 50 फीसदी सब्सिडी के साथ 8 किलो काले चने के बीज भी दिए जाएंगे।

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    चुनावी राज्य कर्नाटक में किसानों को रिकॉर्ड फसल बीमा!

    कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां के किसानों को हो रहे नुकसान पर सरकार क्या कर रही है? इस पर सबकी नजरें हैं। सीएम बसवराज बोम्मई ने एक सवाल के जवाब में मार्च के दूसरे हफ्ते में बताया था कि हावेरी जिले में 1.65 लाख किसानों को 438 करोड़ रुपये का फसल बीमा वितरित किया गया है, जो राज्य सरकार का रिकॉर्ड प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि 67 लाख किसानों को 80 करोड़ रुपये का बीमा कवर दिया गया है।

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