Heatwave : किसानों के साथ सब्जी और फसलों पर भीषण गर्मी की मार, जानिए कैसे करें बचाव

प्रचंड गर्मी (heatwave) एक ओर जहां इंसानों और मवेशियों को झुलसा रही है, तो दूसरी तरफ किसानों की फसलों पर भी सूरज की ताप का बुरा असर हो रहा है। जानिए, भीषण गर्मी में फसल कैसे बचाएं

नई दिल्ली, 07 जून : मौसम की मार झेल रहे किसानों को अपनी फसलों को बचाने में संघर्ष (Heat wave hit farmers) करना पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में लगातार बढ़ रहा तापमान (heatwave) किसानों की फसल की 'अग्निपरीक्षा' ले रहा है। खास तौर से सब्जियों पर बुरा असर पड़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों को सब्जियों को झुलसने से बचाने के लिए पर्याप्त नमी बनाए रखने की जरूरत है। समय-समय पर सिंचाई करते रहना चाहिए।

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    गर्मी से फसल झुलसने की आशंका

    दरअसल, जून का ये महीना पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए विशेष रूप से अहम है। ऐसा इसलिए क्योंकि आम तौर से किसान खरीफ फसलों की बुआई जून के दूसरे हफ्ते से शुरू कर देते हैं। खरीफ फसलों में पंजाब और हरियाणा के किसान बड़ी मात्रा में धान का उत्पादन करते हैं। पंजाब में 26 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर धान की खेती होती है। धान की नर्सरी पर भी भीषण गर्मी का असर होने की आशंका है। जानकारों के मुताबिक तापमान बढ़ने से धान का बीहन (नर्सरी में तैयार पौधे) प्रभावित हो सकता है, जो बाद में बुआई के लायक नहीं बचेगा। ऐसे में गर्मी से इन्हें बचाने के लिए तापमान कंट्रोल करने की जरूरत है।

    सब्जियों को कैसे बचाएं ?

    नींबू, कद्दू, खरबूजा और बेबी कद्दू जैसी फसलों को गर्मी से बचाने के संबंध में पंजाब हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के एलएस बराड़ ने बताया, लू से सब्जियों को बचाने के लिए सिंचाई जरूरी है। गर्म मौसम के कारण पौधे मुरझा जाते हैं और इससे प्रकाश संश्लेषण की गतिविधि प्रभावित होती है। यानी पौधे खुद के लिए खाना-पीना तैयार नहीं कर पाते और फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।

    कपास के किसानों का संकट

    गर्मी के मौसम में पंजाब हरियाणा में कॉटन कल्टीवेशन भी बड़े पैमाने पर होता है। उत्तर भारत में भीषण गर्मी के कारण लू चल रही है और इतनी गर्मी में कॉटन यानी कपास की फसल भी प्रभावित होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कपास की फसल को झुलसने से बचाने के लिए भी सिंचाई ही एकमात्र विकल्प है। बता दें कि पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान प्रदेशों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से उपर है।

    सिंचाई से ही बचेंगे पौधे

    कपास की फसल को बचाने के बारे में हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के एसएस गोसल ने बताया, गर्मी में चल रही लहर कपास की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि कपास की फसल गर्मी में अधिक संवेदनशील होती है। बकौल गोसल, अंकुरण के चरण के अलावा भी कपास के पौधों को झुलसने से बचाने के लिए हल्की सिंचाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि तापमान में कमी ही कपास की फसल को गर्मी की लहर से बचा सकती है। किसानों को नियमित रूप से अपनी फसलों की निगरानी करनी चाहिए और खेतों में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। गोसल ने बताया कि कपास की बुआई करने पर लहर के कारण फसल को नुकसान होगा। इससे ओवरऑल प्रोडक्शन भी प्रभावित होने की आशंका होती है।

    आसमान से बरस रही आग !

    गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री से भी अधिक है। मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो-तीन दिन भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना नहीं है। IMD ने कहा है कि झारखंड, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के अलावा उत्तरी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में लू चलने की आशंका है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को उत्तर प्रदेश के बांदा (46.8 डिग्री सेल्सियस) और फतेहगढ़ (46.4 डिग्री सेल्सियस) जिले देश में सबसे गर्म रहे।

    सब्जियां उगाने वाले किसानों की बेबसी !

    जागरण डॉटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में सब्जियों की खेती कर रहे किसानों ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण सब्जियां खराब हो रही हैं। उत्पादन कम हुआ है। सब्जियों को बचाने के लिए सामान्य से अधिक सिंचाई करनी पड़ रही है, इसके बावजूद सब्जियां झुलस रही हैं। बाजार में कीमत अच्छी नहीं मिल रही।

    बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पर असर

    धान की खेती करने वाले किसानों के मुताबिक धान की बुआई के लिए नर्सरी में तैयार पौधे भी लू के थपेड़े नहीं झेल पा रहे हैं। किसानों का मानना है कि ट्यूबवेल से सिंचाई कम पड़ रही है। बारिश नहीं होने से धान के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि सिर्फ सिंचाई, नमी और तापमान नियंत्रण जैसे उपायों से ही किसानों के उत्पादों की रक्षा हो सकती है।

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