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Black Pepper : इसकी खेती से पद्मश्री तक पहुंचे किसान, आप भी कमा सकते हैं तगड़ा मुनाफा, जानिए जरूरी बातें

काली मिर्च की खेती (black pepper cultivation) कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। आइडिया पर भरोसा हो तो लाखों कमाए जा सकते हैं इसकी मिसाल हैं मेघालय के किसान नैनंदरो मारक। उनकी सफल खेती और किसानों को प्रेरित करती है।

नई दिल्ली, 12 जून : मुनाफा कमाने के लिए किसान कई तरह के विकल्प आजमा रहे हैं। ऐसा ही एक विकल्प है काली मिर्च की खेती। काली मिर्च को अंग्रेजी में ब्लैक पेपर (black pepper) भी कहा जाता है। ब्लैक पेपर फार्मिंग से किसान अच्छे पैसे कमा सकते हैं। खास बात ये है कि इस खेती की शुरुआत महज 10 हजार रुपये के निवेश के साथ की जा सकती है। काली मिर्च को कुछ इलाकों की स्थानीय भाषा में गोलकी भी कहा जाता है। जानिए ब्लैक पेपर की खेती से जुड़ी कुछ अहम बातें जानिए।

kali mirch

काली मिर्च के किसान को पद्मश्री

खेती के जरिए बंपर कमाई करने के योजना बना रहे किसानों के लिए परंपरागत खेती से हटना जरूरी है। परंपरागत खेती से हटकर इनोवेटिव फार्मिंग कर रहे हैं किसान लाखों रुपए कमा रहे हैं। ऐसे ही सक्सेस की कहानी मेघालय की है। दरअसल, काली मिर्च की काली मिर्च की खेती, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के अलावा पूर्वोत्तर भारत में भी हो रही है। मेघालय के नैनंदरो बी मारक 5 एकड़ खेत में काली मिर्च की खेती करते हैं। खेती में कमाल करने वाले मारक को केंद्र सरकार ने पद्मश्री से अलंकृत किया है। मारक खुद खेती करने के अलावा 8000 लोगों को प्रशिक्षित भी कर चुके हैं।

marak

करीमुंडा वेराइटी की काली मिर्च

मारक बताते हैं कि सबसे पहले उन्होंने अपने खेत में करीमुंडा नाम की काली मिर्च के किस्म लगाई थी। वे अपने खेत में हमेशा ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में 10 हजार रुपये के निवेश के साथ उन्होंने मिर्च के लगभग 10,000 पौधों की रोपाई की। समय बीतने के साथ-साथ पौधों की संख्या बढ़ाई। अब मारक के काली मिर्च की डिमांड दुनिया भर में होती है।

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना खेती

मेघालय की पश्चिमी गारो हिल्स की पहाड़ियों में रहने वाले सफल किसान मारक ने पेड़ों की कटाई के बिना और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना काली मिर्च की खेती का दायरा बढ़ाया है। गारो हिल्स पूरा पहाड़ी और जंगली इलाका है। न्यूज़ 8डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक जैसे ही लोग मारक के इलाके में प्रवेश करते हैं उन्हें काली मिर्ची जैसे मसालों की खुशबू मिलने लगती है। इसी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मारक की काली मिर्च की खेती के काम में मेघालय की कृषि और बागवानी विभाग से सहयोग मिला।

19 लाख रुपये की काली मिर्च का उत्पादन

रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में नैनंदरो बी मारक ने अपने बाग से 19 लाख रुपए की काली मिर्च का उत्पादन किया। उनकी कमाई लगातार बढ़ रही है। खेती के क्षेत्र में मारक की मेहनत देखते हुए भारत सरकार ने उनकी सराहना की। 72 में गणतंत्र दिवस के मौके 2021 में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास करने और दूसरे किसानों के लिए इंस्पिरेशन बनने वाले मारक को पद्मश्री से अलंकृत किया गया।

ऐसे तैयार होती है काली मिर्च

काली मिर्च की खेती के तरीकों के बारे में मारक बताते हैं कि 8 फीट की दूरी पर काली मिर्च के पौधों की रोपाई करनी चाहिए। दो पौधों के बीच इतनी दूरी जरूरी है, क्योंकि पौधों को फैलने की पर्याप्त जगह मिलती है। वे बताते हैं कि पेड़ से काली मिर्च की फलियां तोड़ने के बाद सुखाया जाता है। काली मिर्च निकालने में काफी एहतियात बरतना पड़ता है। दाने निकालने के लिए पेड़ से तुड़ाई के बाद कुछ समय तक को पानी में डुबो कर रखा जाता है, और फिर सुखाया जाता है। ऐसा करने से दानों का रंग अच्छा निकालता है।

काली मिर्च के दानों पर विशेष ध्यान

मारक बताते हैं कि खेती के दौरान एक पौधे में 10 से 20 किलो तक गाय के गोबर से बनी वर्मी कंपोस्ट डाली जाती है। पौधों से तुड़ाई के लिए थ्रेसिंग मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि तेजी से फलों को तोड़ा जा सके। शुरू में काली मिर्च की फली में 70 फ़ीसदी तक नमी होती है। जिसे सुखाने के बाद कम किया जाता है। ज्यादा नमी होने पर काली मिर्च सड़ने की आशंका भी होती है। दाने खराब होने पर मार्केट में अच्छी कीमत नहीं मिलती।

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