बासमती की डिमांड से उत्साह, इन 10 केमिकल्स का प्रयोग बैन कर सकती है सरकार !
बासमती राइस को पेस्टिसाइड फ्री (basmati rice pesticide free) बनाने की कवायद हो रही है। पंजाब सरकार बासमती को कीटनाशकों के बिना उपजाने संबंधी आदेश दे सकती है।
नई दिल्ली, 18 जून : पंजाब में पैदा होने वाली चावल की किस्म- बासमती अपनी विशेष सुगंध और लंबे दानों के लिए विदेशों में काफी डिमांड में रहती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में खेती में इस्तेमाल होने वाले रसायन (agro chemicals) के छिड़काव की खबरें चिंताजनक हैं। इसी कारण बासमती की कुछ खेपों को विदेश में अस्वीकार कर दिया गया। अब पंजाब का कृषि विभाग, बासमती उपजाने वाले किसान और चावल के निर्यातक केमिकल के अत्यधिक उपयोग को लेकर अलर्ट हैं।
बासमती पर केमिकल का इस्तेमाल !
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के कृषि विभाग ने कृषि-रसायनों (कीटनाशकों और खरपतवार नाशकों) के 10 कंपाउंड्स पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है। किसान आमतौर पर प्रीमियम सुगंधित बासमती धान पर छिड़काव के लिए इन रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। इनका मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्वीकृति से बचना होता है। पढ़िए रिपोर्ट, किस कारण से बासमती पर कीटनाशकों के इस्तेमाल को बंद करने का आदेश देने पर विचार कर रही है पंजाब सरकार।

पंजाब से बड़ी मात्रा में चावल का निर्यात
पंजाब में पैदा होने वाली चावल की खास किस्म- बासमती अपनी विशेष सुगंध और लंबे दाने के लिए उत्तरी अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व सहित विदेश में काफी लोकप्रिय है। भारत से 40,000 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात होता है। इसका लगभग 40% पंजाब से एक्सपोर्ट होता है। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि-रसायन के इस्तेमाल का सुराग मिलने के कारण बासमती की कुछ खेपों को अस्वीकृत कर दिया गया है। लौटाई गई खेप में ट्राइसाइक्लाज़ोल और कार्बेन्डाजिम के इस्तेमाल की खबरें मीडिया रिपोर्ट में सामने आ चुकी है।

सरकार से केमिकल पर बैन की सिफारिश
हिंदुस्तान टाइम्स डॉटकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक बासमती पर ट्राइसाइक्लाज़ोल और कार्बेन्डाजिम कंपाउंड के अलावा, एसेफेट, बुप्रोफेज़िन, क्लोरपाइरीफोस, मेथैमिडोफोस, प्रोपिकोनाज़ोल, थियामेथोक्सम, प्रोफेनोफोस और आइसोप्रोथियोलेन के छिड़काव की खबरें भी मिली हैं। इस खबर में कहा गया कि इन कृषि-रसायनों को भी प्रतिबंध सूची में रखा गया है। एचटी की खबर के मुताबिक कृषि निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग की ओर से इस संबंघ में रिपोर्ट बनाकर सरकार से प्रतिबंध की सिफारिश की है।

केमिकल बैन : सरकारों की भूमिका
बता दें कि केंद्र सरकार के कीटनाशक अधिनियम, 1968 के अनुसार, राज्य सरकार केमिकल के इस्तेमाल पर 60 दिनों का प्रतिबंध लगा सकती है। इसके बाद बैन खुद ब खुद बेअसर हो जाता है। स्थायी प्रतिबंध लगाना केंद्र सरकार के उर्वरक मंत्रालय का विशेषाधिकार है। एचडी की रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से बताया गया, जरूरत पड़ने पर हम प्रतिबंध को 60 दिन और के लिए बढ़ा सकते हैं।'

ऐसे करें कीड़े मकोड़ों का सामना
गौरतलब है कि बासमती चावल की बुवाई जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में होती है। अक्टूबर-नवंबर में कटाई होती है। राज्य सरकार का कृषि विभाग और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना की ओर से बासमती चावल पर केमिकल या उर्वरक के इस्तेमाल को लेकर सलाह जारी होने की उम्मीद है। एडवाइडरी में बताया जाएगा कि बासमती की फसल पर अवांछित खरपतवारों और कीट-पतंगों के अटैक से कैसे लड़ा जाए।

300 करोड़ रुपये की बचत
बासमती निर्यातक संघ के निदेशक अशोक सेठी के अनुसार, कृषि-रसायनों पर प्रतिबंध से किसानों को कम से कम ₹ 300 करोड़ बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, अगर हम सुधारात्मक कदम उठाते हैं, तो यह आयातकों पर अच्छा प्रभाव डालता है क्योंकि वे हमारी उपज के लिए अधिक स्वीकार्य हो जाते हैं और बेहतर कीमतों पर उत्पादों की पेशकश करते हैं।

कीमतों में उछाल की आशंका
कृषि उत्पाद कारोबार व अनाज के लेनदेन से जुड़े लोगों की राय में
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस सीजन में बासमती की कीमतों में तेजी आने की उम्मीद है। पिछले सीजन (2021), में बासमती 3,000 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचा गया था। इससे पहले 2020 में कीमतों में गिरावट के कारण, बासमती सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से मिले मोटे किस्म के धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बराबर कीमत पर बेचा गया था।
बासमती उत्पादन को प्रोत्साहन !
6 लाख हेक्टेयर को बासमती की खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब कृषि निदेशालय ने पिछले सीजन हुई बासमती की खेती का दायरा बढ़ाकर 6 लाख हेक्टेयर करने लक्ष्य रखा है। पिछली बार 4.85 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती की गई थी। एक अनुमान के मुताबिक देश में धान की बुवाई 30 लाख हेक्टेयर (कम से कम 74 लाख एकड़) में की जाती है। इसमें राज्य के कृषि विभाग ने 12 लाख हेक्टेयर में सीधी बुवाई विधि (डीएसआर) द्वारा धान की बुवाई और बिक्री के लिए मोटे किस्म के धान का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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