Dekha Dekhi Bhawan: 'यहां लाइन मारना गलत नहीं', क्या है देखा-देखी भवन? क्यों हुआ वायरल?

Dekha Dekhi Bhawan: सोशल मीडिया पर कब क्या वायरल हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है, कभी -कभी तो कुछ ऐसी चीजें इंस्ट्रा या ट्विटर पर ट्रेंड करने लग जाती हैं, जिसे देखकर काफी हंसी भी आती है। ऐसा ही एक फनी वीडियो इस वक्त लोगों के बीच में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और वो वीडियो किसी व्यक्ति का नहीं है बल्कि एक भवन का है, जो अपने नाम के कारण लोगों के बीच चर्चित हो गया है।

दरअसल यहां बात हो रही है बिहार के जमुई के 'देखा-देखी' भवन की, जिसके वीडियो ने इंटरनेट पर गदर काट दी है। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर सन्नी गुप्ता (@heysunny_7) नाम के कंटेंट क्रिएटर ने शेयर किया है, वीडियो में एक पीले रंग का बिल्डिंग हैं, जिसपर गेरुए रंग से लिखा है 'देखा-देखी भवन'।

Dekha Dekhi Bhawan

जिसका इस्तेमाल वो लोग करते हैं जो कि शादी के लिए लड़का-लड़की की मुंह दिखाई करवाते हैं। सन्नी ने अपनी वीडियो कैप्शवन में लिखा है - Bihar is not for beginners😅🔥 इस भवन की पड़ताल करने पर पता चला कि इस भवन की कहानी काफी रोचक है।

सांसद जय प्रकाश नारायण यादव ने बनवाया था भवन

पहले ये यात्रा शेड के नाम से जाना जाता था, जिसका निर्माण तत्कालीन सांसद जय प्रकाश नारायण यादव ने करवाया था लेकिन वक्त गुजरने के साथ ये अनदेखी का शिकार हो गया और बुरी हालत में पहुंच गया। इस भवन के बाद एक मंदिर है, जिसके संस्थापक अशोक सिंह हैं।

Dekha Dekhi Bhawan में तय होता है बच्चों का रिश्ता

जिन्होंने इसका रेनोवेशन करवाया , उन्होंने कहा कि 'मंदिर के पास गरीब परिवारों को अक्सर मैंने 'देखा-देखी' की रस्म करते देखा था इसलिए मैंने सोचा इस भवन का नाम ही 'देखा-देखी' रख देता हूं , ये गरीब लोगों के काम आएगा, तब से यहां लोग अपने बच्चों का रिश्ता करवाते हैं।'

'मतलब यहां लाइन मारना गलत ना होगा', यूजर्स ने लिए मजे

इस वीडियो के वायरल होने पर यूजर्स ने बहुत मजेदार कमेंट किए हैं। एक ने लिखा- 'कमाल है , ऐसा भवन केवल बिहार में ही हो सकता है , कहीं दूसरा ना होगा।' तो वहीं एक यूजर ने लिखा- 'वैसे इसमें हंसने जैसी कोई बात नहीं ये अच्छा है', एक ने लिखा- 'मतलब यहां लाइन मारना गलत नहीं' तो एक ने लिखा- 'हमारे बिहार मे जानता को जो चाहिए सरकार सब देती है 😂'।

कुछ खास बातें जमुई के बारे में जानिए

  • बिहार का छोटा लेकिन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जिला जमुई कई खास वजहों से जाना जाता है। जमुई को 21 फरवरी 1991 को मुंगेर से अलग होकर एक जिले के रूप में गठित किया गया था
  • माना जाता है कि यह इलाका प्राचीन काल में मगध साम्राज्य का हिस्सा रहा और इसका संबंध महावीर जन्मभूमि (जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर) से भी जोड़ा जाता है
  • जमुई स्वतंत्रता से पहले गिधौर रियासत के अधीन था , जिसकी स्थापना चंदेल राजपूतों ने की थी और उन्होंने 1262 से 1952 तक इस पर शासन किया।
  • 2006 में पंचायती राज मंत्रालय ने जमुई को देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में से एक घोषित किया था, यह बिहार के उन 36 जिलों में से एक है जो वर्तमान में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि कार्यक्रम (बीआरजीएफ) से धनराशि प्राप्त कर रहे हैं।
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