Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

'भागो-भागो वो नसबंदी करा देगी', कौन थी वो खूबसूरत महिला जिससे डरते थे लोग? Amrita Singh से है खास रिश्ता

Rukhsana Sultana Kaun Thi: इमरजेंसी भारतीय इतिहास का वो काला पन्ना है, जिसे कोई भूल नहीं सकता है, भाजपा इसे 'संविधान की हत्या दिवस' के रूप में इंगित करती है। आज आपातकाल को 50 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन आज भी इसकी वजह से चोट खाए लोगों का दर्द कम नहीं हुआ है। आपको बता दें कि 25 जून 1975 की रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में Emergency की घोषणा की थी।

यह आपातकाल 21 महीने तक चला और 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ था। इस कालखंड ने भारतीय राजनीति की एक नई तस्वीर लोगों को सामने पेश की थी जिसके बाद देश की सियासत का रंग ही बदल गया था, उस वक्त देश में विद्रोह और दर्द का ऐसा भूकंप आया था, जिसने लोगों की आत्मा और अधिकारों को चोटिल किया था, जिसकी कसक आज भी लोगों के अंदर है।

Rukhsana Sultana

आपातकाल की घोषणा कैसे हुई?

मालूम हो कि 25 जून 1975 की देर रात राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आग्रह पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए देश में आपातकाल लागू किया था, इसकी पृष्ठभूमि में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य ठहराना, जेपी आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता और विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन शामिल थे।

देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन

साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि 'आपातकाल के दौरान देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था जो कि सही नहीं था।'

'रूखसाना सुल्ताना' के नाम से डरते थे लोग

लेकिन इस दौरान एक खूबसूरत चेहरा भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना था लेकिन उस चेहरे को देखते ही लोग घरों से भाग जाते थे क्योंकि वो क्रूरता का पर्याय था। आप सोच रहे होंगे कि हम यहां किसकी बातें कर रहे हैं तो यहां जिक्र हो रहा है 'रूखसाना सुल्ताना' का।

किसी अप्सरा से कम नहीं थी Rukhsana Sultana

जो कि उस वक्त इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की काफी करीबी और उनके 'नसबंदी प्रोग्राम' का अहम हिस्सा थीं, देखने में अप्सरा जैसी रूखसाना का उस वक्त कांग्रेस पार्टी में बड़ा दबदबा था।

'24 अकबर रोड' में बड़ा खुलासा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रशीद किदवई ने अपनी किताब '24 अकबर रोड' में लिखा है कि 'रूखसाना सुल्ताना' को कांग्रेस कार्यकर्ता 90 डिग्री से सलाम करते थे।

Rukhsana Sultana को देखते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था

संजय गांधी ने उन्हें दिल्ली के मुस्लिम इलाके के लोगों की नसबंदी कराने की जिम्मेदारी दी थी। जिसकी वजह से 'रूखसाना सुल्ताना' को देखते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था, लोग डर के मारे घरों से भाग जाते थे।

'रूखसाना सुल्ताना' पर जबरन नसबंदी कराने का आरोप

दरअसल 'रूखसाना सुल्ताना' पर जबरन नसबंदी कराने का आरोप लगा था। किदवई ने किताब में लिखा कि 'रुखसाना सुल्ताना ने 1 साल में करीब 13000 लोगों की नसंबदी कराई थी, जिसके लिए उन्हें भारी-भरकम रकम भी ईनाम में मिली थी।'

Rukhsana Sultana

अमृता सिंह की मां हैं Rukhsana Sultana

हालांकि आपातकाल के भूकंप के बाद 'रूखसाना सुल्ताना' भी खबरों और सियासी दुनिया से एकदम से गायब हो गईं और सालों बाद वो तब खबरों में आईं जब उनकी बेटी अमृता सिंह ने फिल्म 'बेताब' के जरिए फिल्मी दुनिया में कदम रखा।

खुशवंत सिंह के भतीजे से की थी रूखसाना ने शादी

आपको बता दें कि रूखसाना ने मशहूर लेखक खुशवंत सिंह के भतीजे और आर्मी ऑफिसर शविंदर सिंह से शादी करके राजनीति की दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। हालांकि मीडिया की सुर्खियों से दूर होकर रूखसाना ने अपनी एक अलग दुनिया बना ली थी, जहां के बारे में उनके परिवार को छोड़कर किसी को कोई भी जानकारी नहीं थी।

एक तानाशाही सोच वाली महिला की छवि

लेकिन उन्हें आज भी एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जाता है जिसने सत्ता के नाम पर आम जनता से क्रूरता दिखाई हालांकि उनके खिलाफ कभी कोई कानूनी कार्यवाही नहीं हुई, लेकिन जनता की नजरों में उनकी छवि हमेशा एक तानाशाही सोच वाली महिला की रही, जिसे देखकर लोग डर से कांप जाते थे और सड़कों पर कर्फ्यू पसर जाता था।

क्यों लगी थी इमरजेंसी? (Emergency)

  • विपक्षी दल इंदिरा गांधी से इस्तीफा मांग रहे थे और जन आंदोलन पूरे देश में फैल चुका थी, जिससे इंदिरा सरकार पर संकट मंडरा रहा था।
  • जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में 'संपूर्ण क्रांति' का नारा जन-जन तक पहुंच गया था, जिसने लोगों को कांग्रेस के खिलाफ कर दिया था।
  • 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी को चुनावी गड़बड़ी के आरोप में दोषी ठहराया और उनका सांसद पद रद्द कर दिया था, आलोचकों का मानना था कि इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए आपातकाल का सहारा लिया था।

आपातकाल में क्या-क्या हुआ? (Emergency)

  • नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे, खासकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खत्म हो गई थी।
  • प्रेस और मीडिया पर कड़ी सेंसरशिप लागू की गई थी।
  • विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया।
  • संजय गांधी के नेतृत्व में जबरदस्ती नसबंदी कार्यक्रम चलाया गया था।

आपातकाल का अंत और चुनाव (Emergency)

21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ और आम चुनावों की घोषणा की गई। इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा था और जनता पार्टी सत्ता में आई थी।

Take a Poll

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+