चित्रकूट धाम: जहां भगवान राम ने बिताए थे वनवास के 11 साल, माता अनुसूया से भी जुड़ा है इसका इतिहास
Chitrakoot Dham: ''चित्रकूट के घाट पर, भई संतन की भीर, तुलसीदास चन्दन घिसे, तिलक देत रघुबीर॥'' गोस्वामी तुलसीदास के इस दोहे का अर्थ है कि, 'चित्रकूट के घाट पर भगवान राम ने उन्हें दर्शन दिए थे।' चित्रकूट वही जगह है, जहां भगवान राम ने माता सिता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास के 14 में से 11 वर्ष यहीं बिताए थे।

'चित्रकूट में रमि रहे, 'रहिमन' अवध-नरेस। जा पर बिपदा परत है , सो आवत यहि देस॥' इस दोहे के जरिए चित्रकूट धाम के महत्व को भी दर्शाया गया है, इसमें कहा गया है कि, 'अयोध्या के राजकुमार अपनी नगरी छोड़कर चित्रकूट में बस गए हैं। इस अंचल में वही आता है, जो किसी विपदा का मारा होता है।'
इतना ही नहीं, यह वही चित्रकूट धाम है, जहां ऋषि अत्री और माता सति अनुसूया ने भी ध्यान लगाया था। कहा जाता है कि माता अनुसूया के तप से ही यहां मंदाकिनी नदी का उद्गम हुआ था। माता अनुसूया ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को चित्रकूट में ही बाल स्वरूप में अपने घर में रखा था। यहां माता सति अनुसूया का भव्य मंदिर भी है और आश्रम भी है।
आज भी यहां रामघाट मौजूद है, जहां भगवान श्रीराम स्नान किया करते थे। इसी घाट पर राम भरत मिलाप मंदिर भी है। इसी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा भी है। रामघाट से 2 किलोमीटर की दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनार जानकी कुण्ड भी है, जहां माता सीता स्नान करती थीं। इन बातों से आप समझ सकते हैं कि चित्रकूट धाम का कितना महत्व है।
कैसे जाए चित्रकूट धाम?
चित्रकूट धाम उत्तर विंध्य रेंज में स्थित एक पर्यटन शहर है। चित्रकूट धाम उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला और मध्य प्रदेश के सतना जिले में पड़ता है। यहां जाने के सबसे अच्छा साधन रेलगाड़ी है।
चित्रकूट से 8 किलोमीटर की दूर चित्रकूट धाम यहां से सबसे पास रेलवे स्टेशन है। उत्तर प्रदेश के हर बड़े शहर से यहां के लिए ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा शिवरामपुर रेलवे स्टेशन पर उतकर सड़क के जरिए चित्रकूट धाम पहुंचा जा सकता है।
अगर आप विमान से आना चाहते हैं तो आप इलाहाबाद या लखनऊ एयरपोर्ट आ सकते हैं। लखनऊ और इलाहाबाद हवाई अड्डों से चित्रकूट आप ट्रेन या सड़क के जरिए जा सकते हैं। इन दोनों जगहों से चित्रकूट के लिए बस और ट्रेनें लगातार उपलब्ध हैं।












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