Muharram 2026: 'मातम का महीना' क्यों कहलाता है मुहर्रम? जानिए कब से कब तक और इमाम हुसैन की कुर्बानी का पैगाम

मुहर्रम 2026 कब से शुरू और कब खत्म होगा, आशूरा कब है, इसे 'मातम का महीना' क्यों कहते हैं और इमाम हुसैन की कुर्बानी का पैगाम क्या है, जानिए आसान भाषा में।

Muharram 2026: इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम इस बार जून में दस्तक दे रहा है, और इसी के साथ इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी की भी शुरुआत हो रही है। यह वही महीना है जिसे पूरी दुनिया में 'मातम का महीना' कहा जाता है। आपको बता दें कि मुहर्रम की शुरुआत चांद के दीदार पर निर्भर करती है, ऐसे में तारीख में एक-दो दिन का फर्क मुमकिन है। आइए आसान भाषा में जानते हैं कि मुहर्रम 2026 कब से कब तक है, इसे मातम का महीना क्यों कहते हैं और इमाम हुसैन की कुर्बानी का इससे क्या रिश्ता है।

मुहर्रम सिर्फ गम का महीना नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी और हक की राह पर डटे रहने की मिसाल भी माना जाता है। यही वजह है कि दुनियाभर के मुसलमान, खासकर शिया समुदाय, इस महीने को बेहद अकीदत और गम के साथ मनाते हैं।

Muharram 2026

मुहर्रम 2026 कब से शुरू और कब खत्म?

भारत में मुहर्रम का महीना 17 जून 2026 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है, हालांकि 16 जून की शाम चांद नजर आने पर इसकी शुरुआत एक दिन पहले भी हो सकती है। मुहर्रम का सबसे अहम दिन यानी 10वीं तारीख 'आशूरा' भारत में करीब 26 जून 2026 को पड़ने की उम्मीद है, जिस दिन कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश रहता है। वहीं यह महीना करीब 14 से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा।

एक नजर अहम तारीखों पर:

  • मुहर्रम की शुरुआत: 17 जून 2026 के आसपास (चांद दिखने पर 16 जून की शाम से भी मुमकिन)
  • इस्लामी नववर्ष: 1448 हिजरी
  • आशूरा (10 मुहर्रम): करीब 26 जून 2026
  • महीने का समापन: करीब 14-15 जुलाई 2026

आपको बता दें कि इस्लामी कैलेंडर पूरी तरह चांद पर आधारित है, इसलिए हर शहर में स्थानीय चांद दीदार के मुताबिक तारीखों में एक दिन का फर्क हो सकता है।

मुहर्रम को 'मातम का महीना' क्यों कहते हैं?

मुहर्रम को मातम का महीना इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसी महीने की 10 तारीख यानी आशूरा के दिन इराक के कर्बला के मैदान में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने अपने परिवार और चंद साथियों के साथ शहादत दी थी। माना जाता है कि इमाम हुसैन ने जुल्म और नाइंसाफी के आगे सिर झुकाने से इनकार कर दिया और हक की राह पर अपनी जान कुर्बान कर दी।

कर्बला की इसी कुर्बानी की याद में मुसलमान, खासकर शिया समुदाय, मुहर्रम के दौरान गम और मातम मनाते हैं। यही गम, अकीदत और कुर्बानी की भावना इस पूरे महीने को 'मातम का महीना' बना देती है।

इमाम के मुताबिक मुहर्रम का असल पैगाम

[मस्जिद का नाम] के इमाम [इमाम साहब का नाम] के मुताबिक, मुहर्रम सिर्फ गम मनाने का नहीं, बल्कि सब्र, इंसाफ और इंसानियत का पैगाम देने वाला महीना है। उनके मुताबिक, इमाम हुसैन की शहादत यह सिखाती है कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, सच और हक का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए और जुल्म के आगे कभी झुकना नहीं चाहिए। (नोट: संपादक कृपया यहां किसी प्रतिष्ठित मस्जिद के इमाम का असली नाम और उनका सत्यापित कथन जोड़ें।)

आशूरा और मुहर्रम की प्रमुख परंपराएं

मुहर्रम और खासकर आशूरा के दिन देशभर में कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं:

  • मजलिस और मातम: इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद कर मजलिस आयोजित की जाती हैं।
  • ताजिया का जुलूस: कई शहरों में ताजिया निकाले जाते हैं और जुलूस की शक्ल में अकीदत जताई जाती है।
  • सबील: राहगीरों को पानी और शरबत पिलाया जाता है, जो कर्बला में हुसैन और उनके साथियों की प्यास की याद दिलाता है।
  • आशूरा का रोजा: कई सुन्नी मुसलमान आशूरा के दिन रोजा रखते हैं।
  • दान-पुण्य: गरीबों और जरूरतमंदों की मदद कर सवाब कमाया जाता है।

कुल मिलाकर, मुहर्रम गम के साथ-साथ कुर्बानी, सब्र और इंसानियत का ऐसा पैगाम है, जो हर दौर में हक और इंसाफ के साथ खड़े रहने की प्रेरणा देता है।

FAQs

सवाल: मुहर्रम 2026 कब से शुरू है?
जवाब: भारत में मुहर्रम 17 जून 2026 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है, जो स्थानीय चांद दीदार पर निर्भर करता है।

सवाल: आशूरा 2026 कब है?
जवाब: आशूरा (10 मुहर्रम) भारत में करीब 26 जून 2026 को पड़ने की उम्मीद है।

सवाल: मुहर्रम को मातम का महीना क्यों कहते हैं?
जवाब: क्योंकि इसी महीने की 10 तारीख को कर्बला में इमाम हुसैन ने शहादत दी थी, जिसकी याद में गम और मातम मनाया जाता है।

सवाल: मुहर्रम पर सबील (पानी पिलाना) क्यों किया जाता है?
जवाब: यह कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों की प्यास की याद में किया जाता है।

नोट: यह लेख आम जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। मुहर्रम और आशूरा की तारीखें स्थानीय चांद दीदार के मुताबिक बदल सकती हैं।

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