Rupee Crash Explained: डॉलर के सामने औंधे मुंह क्यों गिरा भारतीय रुपया? 3 बड़ी वजह, आपकी जेब पर कितना असर

Rupee Crash Explained: भारतीय रुपये में एक बार फिर कमजोरी देखने को मिली है। गुरुवार (18 जून) को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे टूटकर 94.71 के स्तर तक पहुंच गया। एक दिन पहले ही रुपये ने मामूली मजबूती दिखाई थी, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। एक आम भारतीय नागरिक के लिए रुपये का गिरना सीधे तौर पर महंगाई बढ़ने का संकेत होता है, क्योंकि अब भारत को विदेशों से कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य जरूरी चीजें आयात करने के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे।

सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि भारतीय मुद्रा फिर दबाव में आ गई? क्या इसका असर पेट्रोल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश से आने वाले सामानों पर पड़ सकता है? आइए समझते हैं कि आखिर रुपये में इस बड़ी गिरावट के पीछे कौन से 3 सबसे बड़े कारण हैं।

Rupee Crash Explained

1. अमेरिकी सेंट्रल बैंक का कड़ा रुख और ब्याज दरें बढ़ने का इशारा (US Federal Reserve Hawkish Policy)

रुपये के टूटने की सबसे मुख्य वजह अमेरिकी सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिजर्व का 'हॉकिश' (सख्त) रवैया है। फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया मीटिंग में जमा दरों को तो फिलहाल नहीं बदला, लेकिन उसने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस साल के अंत तक ब्याज दरों में कम से कम एक चौथाई फीसदी (0.25%) की बढ़ोतरी की जा सकती है।

जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं या बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो दुनिया भर के ग्लोबल इनवेस्टर्स भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी संपत्तियों (Assets) में लगाने लगते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें वहां निवेश करना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद लगने लगता है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ती है और रुपया कमजोर होने लगता है।

Crude Oil की कीमतों में भारी गिरावट, क्या भारत में ₹10 तक सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जनता को और क्या-क्या फायदे?
Crude Oil की कीमतों में भारी गिरावट, क्या भारत में ₹10 तक सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जनता को और क्या-क्या फायदे?

2. ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर का बढ़ता दबदबा

फेडरल रिजर्व के इस फैसले के बाद दुनिया की छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.14% की बढ़त के साथ 100.23 के स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले चार महीनों में डॉलर इंडेक्स का सबसे ऊंचा स्तर है।

जब डॉलर वैश्विक स्तर पर मजबूत होता है, तो दुनिया भर की अन्य प्रमुख करेंसी पर दबाव आना स्वाभाविक है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, डॉलर के इस आक्रामक रुख के सामने लगभग सभी तरह के एसेट क्लास कमजोर नजर आ रहे हैं, जिससे डॉलर को हर तरफ से सपोर्ट मिल रहा है और भारतीय करेंसी लगातार बैकफुट पर जा रही है।

Petrol Diesel Prices: US-Iran के बीच MOU साइन, क्रूड ऑयल धड़ाम, भारत में घटे या बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
Petrol Diesel Prices: US-Iran के बीच MOU साइन, क्रूड ऑयल धड़ाम, भारत में घटे या बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?

3. एशियाई बाजारों में कमजोरी और घरेलू शेयर बाजार की सुस्ती

रुपये के गिरने का तीसरा बड़ा कारण यह है कि आज सुबह से ही भारत के पड़ोसी एशियाई देशों की करेंसी में भी डॉलर के मुकाबले भारी कमजोरी देखी जा रही है। जब पूरा एशियाई बाजार दबाव में होता है, तो उसका संक्रामक असर भारतीय रुपये पर भी पड़ता है।

इसके साथ ही, आज घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 111.23 अंक गिरकर 77,044.39 पर और निफ्टी 26.85 अंक फिसलकर 24,058.85 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में इस सुस्ती ने भी रुपये के सेंटिमेंट को कमजोर करने का काम किया, हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अभी भी भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं और उन्होंने बुधवार को 101.59 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? (Impact On Consumers)

रुपये की कमजोरी का सबसे सीधा असर आयातित वस्तुओं पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। जब डॉलर महंगा होता है तो कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य आयातित उत्पादों की लागत बढ़ जाती है। सरल शब्दों में कहें तो अगर रुपया लगातार कमजोर रहता है तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ विदेशी उत्पादों की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि बाजार में कुछ सकारात्मक संकेत भी दिखाई दिए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हालिया कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदारी की है। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबी अवधि को लेकर निवेशकों का भरोसा अभी बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में हुए समझौते से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों की जल्द होने वाली बैठक पर भी बाजार की नजर है।

दिलचस्प बात यह है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। सामान्य तौर पर सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए अच्छी खबर माना जाता है क्योंकि इससे आयात बिल कम होता है। लेकिन इस बार डॉलर की वैश्विक मजबूती का असर इतना ज्यादा रहा कि कच्चे तेल में आई राहत रुपये को मजबूती नहीं दे सकी। यही वजह है कि तेल सस्ता होने के बावजूद भारतीय मुद्रा दबाव में रही।

मिडिल ईस्ट शांति समझौता और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से बड़ी उम्मीद

इस चौतरफा दबाव के बीच बाजार को संभालने के लिए कुछ सकारात्मक खबरें भी बैकग्राउंड में काम कर रही हैं। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर हुए हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट सुधरा है। इस डील की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 1.68% घटकर $78.21 प्रति बैरल पर आ गया है, जो भारत के लिए बड़ी राहत है।

इसके अलावा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के अधिकारियों को एक संतुलित और फायदेमंद व्यापार समझौते (Trade Agreement) पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया है। इसी सिलसिले में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इन सकारात्मक कदमों से आने वाले दिनों में रुपये को निचली कीमतों पर अच्छा सपोर्ट मिल सकता है।

आने वाले दिनों में अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर रुपये की चाल काफी हद तक निर्भर करेगी। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं अगर वैश्विक माहौल सुधरता है तो भारतीय मुद्रा को कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल इतना तय है कि रुपये की यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका असर धीरे-धीरे आम उपभोक्ताओं, कारोबार और पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+