'अखिलेश,डिंपल और चाचा को छोड़ सपा में कोई नहीं रहेगा', टूटने वाली है समाजवादी? योगी के मंत्री के दावे से हलचल
Samajwadi Party Split: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संभावित टूट की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक ऐसा दावा कर दिया है, जिसने समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में खलबली मचा दी है।
राजभर का कहना है कि सपा में बहुत जल्द एक ऐसी बड़ी टूट होने वाली है, जिसके बाद पूरी पार्टी में अखिलेश यादव, डिंपल यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के अलावा कोई दूसरा बड़ा चेहरा नहीं बचेगा। राजभर ने यह भी बताया है कि आखिर सपा के कौन-कौन से सांसद टूटने वाले हैं।

दूसरी तरफ शिवपाल यादव और सपा सांसद सनातन पांडेय ने राजभर को खुली चुनौती दे दी है। उन्होंने साफ कह दिया है कि अगर वह सपा से बागी हुए तो राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे। राजभर के इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वाकई समाजवादी पार्टी के सांसद बगावत की राह पर हैं या फिर यह महज 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले की कोई राजनीतिक नूराकुश्ती है। आइए जानें किसने क्या-क्या दाने किए हैं।
राजभर की 'भविष्यवाणी' और बागी बलिया के लाल का जिक्र
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर पिछले 24 घंटे में एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने का दावा कर चुके हैं। उन्होंने 18 जून गुरुवार की सुबह-सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सपा के बागी सांसदों के गुट का नेतृत्व उत्तर प्रदेश की 'बागी भूमि' का एक लाल करने जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राजभर का सीधा इशारा 'बागी बलिया' से सपा के मौजूदा सांसद सनातन पांडेय की तरफ था।
राजभर ने अपनी पोस्ट में एक नया एंगल जोड़ते हुए दावा किया कि लखनऊ में सपा कार्यालय में ब्राह्मण सम्मेलन के नाम पर ब्राह्मण समाज का तिरस्कार किया गया है। इसी घटना से आहत होकर बलिया के सांसद बागी रुख अख्तियार कर रहे हैं। राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वह ट्विटर, एसी कमरों और प्रेस कॉन्फ्रेंस वाली राजनीति छोड़कर अब 'सांसद बचाओ अभियान' शुरू कर दें और नाराज सांसदों के घर जाकर उनसे माफी मांगें।
ओपी राजभर में एक्स पोस्ट में कहा,
''कल से सब पूछ रहे हो कि सपा में क्या टूट होने वाली है? तो सुनो! सपा के बागी सांसदों के गुट का नेतृत्व उत्तर प्रदेश की 'बागी भूमि' का एक लाल करेगा। और करे भी क्यों न? कल जिस तरह से सपा कार्यालय में सम्मेलन के नाम पर ब्राह्मणों को तिरस्कृत किया गया, उससे 'बागी बलिया' का लाल बहुत आहत है। योजना पहले से थी लेकिन कल कि घटना ने आग में घी डालने का काम कर दिया है। टूट होकर रहेगी। मेरी एक प्रतिक्रिया पर जिस तरह से पूरा सैफई खानदान मुझे गाली देने और सफाई देने में जुट गया, उससे ज्यादा बेहतर है कि अखिलेश बाबू ट्विटर, ऐसी और पीसी वाली नेतागिरी छोड़कर अब सांसद बचाओ अभियान शुरू कर दें। और दुखी एवं निराश सांसदों के घर जाकर उनसे माफी मांगे।''
ओपी राजभर का दावा- 'अखिलेश, डिंपल और उनके चाचा को छोड़ सपा में कोई नहीं रहेगा'
न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू मं 18 जून को ओपी राजभर ने कहा,
"मैंने कल अखिलेश यादव का बयान पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा कि BJP ने हमारे MLC और MLA तोड़ दिए हैं। अब आने वाले दिनों में जो कमजोर और डरपोक हैं, उन्हें तोड़ा जाएगा। अकेले उनके परिवार के 4-5 सदस्यों को छोड़कर - चाहे वह धर्मेंद्र हो, अखिलेश हो, डिंपल हो, राम गोपाल का बेटा हो, या शिवपाल का बेटा हो...हर कोई उन्हें (सपा) छोड़ने को तैयार है...अखिलेश खुद कह रहे हैं कि डरपोक चले जाएंगे, और हिम्मत वाले और बहादुर हमारे साथ रहेंगे।''
क्या है राम गोपाल यादव की अमित शाह को भेजी गई उस सीक्रेट चिट्ठी का सच? (Ram Gopal Yadav Letter to Amit Shah)
इस पूरे विवाद में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव और देश के गृह मंत्री अमित शाह के बीच हुई एक कथित चिट्ठी का जिक्र किया। राजभर का दावा है कि रामगोपाल यादव ने गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन नेताओं के नाम हैं जो पाला बदलने को तैयार हैं।
राजभर ने पुराने मुकदमों का हवाला देते हुए कहा कि सीबीआई की एफआईआर में गायत्री प्रजापति के साथ-साथ कई बड़े नाम शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की जांच की आंच से अपने परिवार और शिवपाल यादव के करीबियों को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी के अंदरखाने यह सब खिचड़ी पक रही है। राजभर के मुताबिक, अखिलेश यादव खुद इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि जो कमजोर और डरपोक होंगे, वे पार्टी छोड़ देंगे और सिर्फ बहादुर लोग ही सपा के साथ टिकेंगे।
सनातन पांडेय का पलटवार: 'अखिलेश से बागी हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा'
ओम प्रकाश राजभर के इस तीखे हमले पर बलिया के सांसद सनातन पांडेय ने भी बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें समाजवादी पार्टी से अलग नहीं कर सकती है। सनातन पांडेय ने भावुक होते हुए कहा कि वह साल 1986 से राजनीति में हैं और सपा ने उन्हें विधायक से लेकर सांसद बनने तक का मौका दिया है। वह पार्टी को अपने परिवार से बढ़कर मानते हैं।
राजभर के दावे पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि राजभर के इस बयान ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर कर दिया है, लेकिन अगर बगावत वाली बात में रत्ती भर भी सच्चाई निकली तो वह राजनीति से हमेशा के लिए संन्यास ले लेंगे। सांसद के प्रतिनिधि हिमांशु त्रिपाठी ने भी राजभर पर निशाना साधते हुए कहा कि लखनऊ की बैठक में सनातन पांडेय को बहुत सम्मान मिला है और वह जल्द ही एक बड़ी रैली करने जा रहे हैं। उन्होंने राजभर के बयानों को पूरी तरह से गैर-गंभीर बताया।
सनातन पांडे कहते हैं,
"मुझे ये सब बातें मजाकिया लग रही हैं। मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि कोई मेरे बारे में ऐसे कमेंट करेगा। मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस पर क्या जवाब दूं। अभी तक समाजवादी पार्टी ने MLA और MP बनने की मेरी इच्छा पूरी की, लेकिन अब राजभर ने मुझे इंटरनेशनल लेवल पर पॉपुलर कर दिया है। हर साल 5 अगस्त को (समाजवादी नेता) जनेश्वर मिश्रा की जयंती मनाने के लिए एक इवेंट होता है। हमने आने वाले 2027 के सेलिब्रेशन के लिए एक बड़ा प्रोग्राम रखा था। वहां जमा हुए सभी लोग इससे बहुत उत्साहित थे; कोई ब्राह्मण परेशान नहीं था। असल में, एक ब्राह्मण ने लोगों को लाने-ले जाने के लिए 10 बसें दीं..."
शिवपाल यादव का करारा जवाब
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और अखिलेश के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने राजभर के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कि भारतीय जनता पार्टी के लोग हमेशा झूठ बोलते हैं और समय-समय पर विपक्षी पार्टियों को कमजोर दिखाने के लिए ऐसी साजिशें रचते रहते हैं। उन्होंने दावा किया कि सपा का कोई भी सांसद या विधायक कहीं नहीं जा रहा है और साल 2027 में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है।
शिवपाल ने कहा,
''भाजपा के लोग झूठ बोलते हैं। बीच-बीच में षड्यंत्र भी करते रहते हैं। समाजवादी पार्टी का कोई भी सांसद टूटेगा नहीं। ये लोग अपनी TRP बढ़ाने के लिए और चुनाव के समय सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए ये बोलते हैं। मुझे तो लगता है इन्हें ट्वीट करने का भी पैसा मिलता है इसलिए इस तरह की बातें करते हैं, झूठ बोलते हैं...अखिलेश यादव के नेतृत्व में 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनेगी...ओम प्रकाश राजभर को पूरे उत्तर प्रदेश में कोई सीरियस नहीं लेता है।"
शिवपाल यादव ने राजभर पर तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में ओम प्रकाश राजभर की बातों को कोई भी गंभीरता से नहीं लेता है। इससे पहले खुद अखिलेश यादव ने भी राजभर पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था कि जो लोग दूसरों की पार्टी टूटने की भविष्यवाणी कर रहे हैं, उन्हें पहले अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए कि बीजेपी उन्हें आने वाले चुनाव में कितनी सीटें दे रही है या सिर्फ आश्वासन से काम चला रही है।
डिप्टी CM केशव मौर्य के दावे ने बढ़ाई सियासी हलचल
सपा में टूट की इस बहस को सिर्फ राजभर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक बयान से भी हवा मिली है। कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के करीब 25 से 26 सांसद इस समय पार्टी छोड़ने की स्थिति में हैं और वे लगातार शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं।
हालांकि, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने यह भी साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी तोड़फोड़ की राजनीति पर भरोसा नहीं करती है। इस बयान के बाद यूपी के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है कि क्या वाकई पृष्ठभूमि में कोई बड़ा सियासी उलटफेर चल रहा है या फिर यह विपक्षी खेमे के मनोबल को तोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
दावों में कितना दम और कितनी हवा?
अगर इस पूरे घटनाक्रम का निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावों से पहले इस तरह की बयानबाजी बहुत आम बात है। ओम प्रकाश राजभर अपनी आक्रामक और सुर्खियां बटोरने वाली राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। उनके दावों में जहां एक तरफ सपा को रक्षात्मक मुद्रा में लाने की कोशिश दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि बलिया के सांसद सनातन पांडेय समेत पार्टी के अन्य प्रमुख चेहरों ने खुलकर अखिलेश यादव के प्रति अपनी वफादारी साबित कर दी है।
सपा कार्यालय में हुए ब्राह्मण सम्मेलन के बाद जिस तरह से जातिगत समीकरणों को साधने की होड़ मची है, उसने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है। फिलहाल, समाजवादी पार्टी में किसी बड़ी टूट के पुख्ता प्रमाण नहीं दिख रहे हैं और विपक्ष इसे पूरी तरह से बीजेपी और उसके सहयोगियों का एक प्रोपेगैंडा बता रहा है।















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