क्या है 'Made in India AI' मिशन? ChatGPT और DeepSeek को कैसे टक्कर देगा भारत? जानें सब कुछ
Made in India AI mission: अमेरिका के ChatGPT को टक्कर देने के लिए चीन के DeepSeek एआई मॉडल की चर्चा जोरों पर हैं। इसी बीच अब भारत भी दोनों को बीट करने के लिए तैयार है। भारत ने भी मेड इन इंडिया AI के मिशन पर कदम बढ़ा दिए हैं। जल्द ही भारत के पास भी अपना खुद का का जेनरेटिव AI मॉडल होगा, जो ChatGPT और DeepSeek को कड़ी टक्कर देगा। भारत अपने एआई मॉडल को भारतीय यूजर्स के हिसाब से तैयार करने जा रहा है, जिसमें ChatGPT और DeepSeek से प्रतिस्पर्धा के लिए कई लेटेस्ट फीचर्स शामिल किए जाएंगे। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेड इन इंडिया AI के मिशन की घोषणा की और कहा कि साल के अंत तक भारत जेनरेटिव AI मॉडल विकसित कर लेगा।

इंडिया AI मिशन क्या है?
दुनिया में एआई की रेस में शामिल होने के लिए इंडिया AI मिशन एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को AI तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना और इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस मिशन के तहत भारत के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और व्यावसायिक क्षेत्र को अत्याधुनिक AI संसाधन प्रदान किए जाएंगे। मंत्री ने जानकारी दी कि इस परियोजना में 1,480 NVIDIA H200 GPU, 12,896 NVIDIA H100 GPU और 742 MI325 और MI325X GPU जैसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली AI चिप्स शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek को केवल 2,000 GPU पर प्रशिक्षित किया गया था, जबकि OpenAI का ChatGPT 25,000 GPU पर प्रशिक्षित हुआ था। ऐसे में भारत का इंडिया AI मिशन मजबूत आधार के साथ आगे बढ़ रहा है।
GPU प्रोवाइडर्स की क्या रहेगी भूमिका?
केंद्र सरकार की इस योजना में प्रमुख GPU प्रोवाइडर्स के रूप में जियो प्लेटफॉर्म्स, टाटा कम्युनिकेशंस, योट्टा और नेक्स्टजेन डेटा सेंटर काम कर रहे हैं। अब तक 15,000 हाई-एंड GPU खरीदे जा चुके हैं, जिनमें से 10,000 GPU पहले से ही उपयोग के लिए तैयार हैं, जबकि बाकी को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा। मंत्री ने बताया कि यह परियोजना रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स और बिजनेस सेक्टर को अत्याधुनिक संसाधन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही भारत में एक सामान्य कंप्यूट फैसिलिटी शुरू की जाएगी।
सबसे सस्ती AI कंप्यूट फैसिलिटी
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इंडिया AI कंप्यूट फैसिलिटी दुनिया की सबसे सस्ती AI कंप्यूट सुविधा होगी। भारत में AI कंप्यूट के लिए औसत लागत ₹115.85 प्रति GPU घंटा तय की गई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह दर $2.5-$3 प्रति GPU घंटा होती है। इसके अलावा, छात्रों और शिक्षाविदों के लिए 40% सब्सिडी दी जाएगी, जिससे यह सुविधा ₹100 प्रति GPU घंटा से भी कम पर उपलब्ध हो सकेगी।
भारत का अपना फाउंडेशनल AI मॉडल
मंत्री ने भारत के लिए एक फाउंडेशनल AI मॉडल बनाने की घोषणा की, जो खासतौर पर भारतीय संदर्भ, भाषाओं और संस्कृतियों के अनुकूल होगा। इस मॉडल को विकसित करने के लिए डेवलपर्स से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए भारत-केंद्रित डेटासेट का इस्तेमाल किया जाएगा, जो देश की स्थानीय जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा।
4 से 10 महीनों में तैयार होगा AI मॉडल
मंत्री के अनुसार, भारत में कम से कम 6 प्रमुख डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और टीमें इस AI मॉडल को 4 से 10 महीनों में विकसित करने में सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह AI मॉडल दुनिया के सबसे बेहतरीन AI मॉडल्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।
डेटा प्राइवेसी और वास्तविक समस्याओं का समाधान
भारत के AI मिशन को केवल तकनीक के विकास तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उपयोग हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, और मौसम अनुमान जैसी प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए किया जाएगा। इस पहल से भारत को AI के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक मजबूत स्थान प्राप्त होगा।
भारत की AI क्षमता: चीन और अमेरिका से तुलना
भारत में AI के विकास के लिए GPU इंफ्रास्ट्रक्चर तेज़ी से बढ़ रहा है। इसकी तुलना में, चीन के DeepSeek AI को 2,000 GPU पर प्रशिक्षित किया गया है, जबकि OpenAI के ChatGPT को 25,000 GPU पर। भारत के बढ़ते GPU इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत की AI क्षमता भी तेज़ी से बढ़ेगी।












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