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DeepSeek AI: क्या लॉन्च के साथ ही भारत में बैन हो जाएगा चीन का AI? सवालों के घेरे में डेटा सुरक्षा

DeepSeek AI: चीन के स्टार्टअप DeepSeek AI ने दुनिया भर के टेक मार्केट में तहलका मचा दिया है। इसने अमेरिकी टेक सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। DeepSeek AI के लॉन्च के बाद से अमेरिकी चिप निर्माता Nvidia को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

DeepSeek AI एक सस्ता और लोकप्रिय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म है। इसकी उन्नत क्षमताओं और कम लागत के कारण यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन इसके डेटा सुरक्षा और चीन से जुड़े संबंधों को लेकर विवाद भी बढ़ते जा रहे हैं।

DeepSeek AI

DeepSeek की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें यूजर्स के डेटा को चीन में स्टोर किए जाने की बात सामने आई है। इसी कारण भारत सरकार इस प्लेटफॉर्म पर खास नजर रख रही है और इसकी गतिविधियों की जांच कर रही है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और यूजर्स की प्राइवेसी को गंभीर खतरा हो सकता है।
ये भी पढ़ें: DeepSeek: चीन की DeepSeek AI ने मचाया तहलका, Nvidia को $593 अरब का झटका, टेक मार्केट में भूचाल

भारत में DeepSeek AI को लेकर क्यों चिंता है?

DeepSeek की प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक, यह यूजर्स के निजी डेटा (जैसे व्यक्तिगत जानकारी और अपलोड की गई फाइलें) चीन में मौजूद सर्वरों पर स्टोर करता है। भारत सरकार का नियम है कि महत्वपूर्ण डेटा देश के अंदर ही स्टोर किया जाए, इसलिए यह प्लेटफॉर्म सरकार और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

भारत ने पहले भी TikTok और PUBG जैसे चीनी ऐप्स को सुरक्षा कारणों से बैन किया था। Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियों को टेलीकॉम सेक्टर से बाहर कर दिया गया था। अगर DeepSeek को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया, तो इसे भी प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।

DeepSeek के AI मॉडल की कमियां

DeepSeek AI को लेकर यूजर्स ने शिकायत की है कि इसका AI मॉडल कई बार भारत से जुड़ी गलत जानकारी देता है। ऐसा ही मामला पहले Google के Gemini AI में भी सामने आया था। यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि AI प्लेटफॉर्म पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होते और कई बार गलत सूचनाएं फैला सकते हैं।

भारत में AI नियम और DeepSeek की चुनौती

भारत में अभी AI प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियम नहीं बने हैं। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट में एक मामला लंबित है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि भारत विदेशी AI कंपनियों को कैसे नियंत्रित कर सकता है। इसके अलावा, DeepSeek की डेटा पॉलिसी भारत के आगामी "डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून, 2025" के नियमों से मेल नहीं खाती।

DeepSeek पर साइबर हमला

DeepSeek पर हाल ही में साइबर अटैक हुआ था, जिसके बाद इसने चीन के बाहर के यूजर्स के लिए एक्सेस सीमित कर दिया। इसके बावजूद, DeepSeek का AI असिस्टेंट अपनी कम लागत के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को डेटा सुरक्षा के सख्त नियम लागू करने चाहिए ताकि यूजर्स की जानकारी सुरक्षित रहे और राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो।

क्या DeepSeek भारत में बैन होगा?

कानून के जानकारों का कहना है कि अगर DeepSeek भारत में सेवाएं देता है, तो यह डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। भारत सरकार का DeepSeek पर लिया गया फैसला यह तय करेगा कि भविष्य में विदेशी AI कंपनियों पर भारत में कैसे नियंत्रण रखा जाएगा। अगर DeepSeek को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया, तो इसे भी TikTok और PUBG की तरह बैन किया जा सकता है। अब देखना होगा कि भारत सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।
ये भी पढ़ें: What is DeepSeek: चीन का वो AI मॉडल क्या है, जिसने Chatgpt और NVIDIA को दी चुनौती? कैसे है बेहतर?

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