महिला आरक्षण विधेयक: फिर से धरना देंगी बीआरएस एमएलसी कविता

बीआरएस एमएलसी के. कविता विधायी निकायों में लंबे वक्त से महिला आरक्षण की मांग कर रही हैं। उन्होंने फिर से महिला आरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया और इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये कोई व्यक्तिगत एजेंडा नहीं है बल्कि पूरे देश में महिलाओं की एक महत्वपूर्ण मांग है।

मीडिया से बात करते हुए कविता ने कहा कि डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण के लिए लड़ने के बावजूद, आजादी के बाद से किसी भी राजनीतिक दल ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय संसद में महिलाओं की संख्या केवल 12 प्रतिशत है, जबकि पहली लोकसभा में आठ प्रतिशत थी। ऐसे में देखा जाए तो उसमें मामूली वृद्धि हुई है।

Women Reservation Bill

उन्होंने कहा कि क्या महिलाओं को सरपंच, एमपीटीसी और जेडपीटीसी के पद पर बने रहना चाहिए? बीआरएस सरकार द्वारा विधानसभा में कानून लाने के बाद ही तेलंगाना के स्थानीय निकायों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या 14 लाख हो गई। उन्होंने पूछा कि महिला आरक्षण विधेयक, जिसे 2010 में राज्यसभा में मंजूरी दे दी गई थी, को मंजूरी क्यों नहीं मिली।

कविता ने दिसंबर में दिल्ली में एक और विरोध प्रदर्शन करके महिला आरक्षण विधेयक के लिए नए सिरे से प्रयास करने की अपनी योजना की घोषणा की। उसमें शामिल होने के लिए वो सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, स्मृति ईरानी समेत अन्य महिला नेताओं को आमंत्रित करेंगी।

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