जब लता दी के लिए PM इंदिरा गांधी ने धीमी कर दी थी अपनी कार, जानिए क्या है वो वाक्या
नई दिल्ली, फरवरी 06। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को संगीत से भी बहुत लगाव था। वे अच्छा गाती भी थीं। इस बात की जानकारी भारत रत्न लता मंगेशकर ने दी थी। इंदिरा गांधी की 33वीं पुण्यतिथि पर 31 अक्टूबर 2017 को लता दी ने एक ट्वीट किया था, भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी की आज पुण्यतिथि है। मेरी उनको भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उसी दिन एक दूसरे ट्वीट में लिखा था, इंदिरा जी के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध थे। उन्हें संगीत में भी बेहद दिलचस्पी थी। मैंने सुना है कि वे अच्छा गाती भी थीं। इंदिरा गांधी को भारत की लौह महिला कहा जाता है। उनको साहसिक राजनीतिक फैसलों के लिए जाना जाता है। वे प्रशासक के रूप में सख्त थीं लेकिन एक व्यक्ति के रूप में बहुत संवेदनशील थी। कहा जाता है कि वे अपने दैनिक दिनचर्या में दोपहर के भोजन के बाद जब आराम करती थीं तब मेहंदी हसन की गजलें सुना करती थीं।

जब लता दी के लिए इंदिरा गांधी ने धीमी कर दी थी अपनी कार
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी लता मंगेशकर का बहुत आदर करते थे। लता दी का नेहरू परिवार से गहरा रिश्ता था। वे इंदिरा गांधी से भी बहुत करीब थीं। चर्चित अभिनेत्री और गायिका दुर्गा जसराज ने एक बार लता दी और इंदिरा गांधी के भावपूर्ण संबंध के बारे में बड़ा रोचक वाकया सुनाया था। दुर्गा जसराज भारत के महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज के बेटी हैं। भारत के महान फिल्मकार वी शांताराम दुर्गा जसराज के नाना थे। एक बार दुर्गा जसराज अपने नाना वी शांताराम के घर गयी हुई थीं। उस समय मुम्बई में वी शांतराम का घर लता मंगेशकर के घर से बिल्कुल सटा हुआ था। एक बार एक राजनीतिक कार्यक्रम के लिए भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुम्बई आयी हुई थीं। प्रधानमंत्री का काफिला जब लता दी के घर के नजदीक आया तो वे कैमरा लेकर अपनी बाल्कनी में खड़ी हो गयीं। लता दी इंदिरा गांधी की तस्वीर उतारने लगीं। यह देख कर इंदिरा गांधी के एक सहयोगी ने बताया कि लता जी आपकी तस्वीर उतार रही हैं। यह सुन कर इंदिरा गांधी ने अपने ड्राइवर को आदेश दिया कि कार की गति बिल्कुल धीमा कर दे। प्रधानमंत्री की कार धीरे धीरे रेंगने लगी। उनका पूरा काफिला धीमा हो गया। उन्होंने अपनी कार से हाथ निकाल कर लता दी का अभिवादन किया। लता दी मुस्कुराते हुए आराम से इंदिरा गांधी की तस्वीर लेती रहीं।
एक सांसद के रूप में लता दी ने कोई पैसा नहीं लिया
अगल-अलग दल के कई नेताओं से लता मंगेशकर के अच्छे रिश्ते थे। लेकिन उन्होंने किसी दल के प्रति कोई रुचि नहीं दिखायी थी। वे नेहरू और इंदिरा गांधी के करीब थीं तो अटल बिहारी वाजपेयी और नरेन्द्र मोदी से भी उनके अच्छे ताल्लुकात थे। भाजपा के समर्थन से उन्हें 1999 में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था। 2001 में उन्हें वाजपेयी सरकार ने भारत रत्न से नवाजा था। 2004 में वाजपेयी सरकार की हार हो गयी। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस नीत सरकार बनी। लता दी। 2005 तक राज्यसभा की सदस्य रहीं। लेकिन न तो उन्होंने कभी भाजपा का समर्थन किया और न कभी कांग्रेस का। राज्यसभा सांसद के रूप में लता दी न तो कोई वेतन- भत्ता लिया और न कोई चेक स्वीकार किया। राज्यसभा कार्यालय की तरफ से जो भी चेक या पैसे उन्हें भेजे गये थे, लता दी ने वापस लौटा दिया था। ये बात सूचना के अधिकार से मालूम हुई थी। हां, सदन में उनकी गैरहाजिरी को लेकर जरूर कुछ आलोचना हुई थी। वे छह साल के कार्यकाल में केवल 12 दिन राज्यसभा में आयीं थीं। एक इंटरव्यू में लता दी ने कहा था, मैं राजनीति में असहज महसूस कर रही थी। संसदीय कार्यवाही के दौरान मैं अपने को अनुपयुक्त महसूस करती थी। इसके बावजूद एक सांसद के रूप में चुने जाने पर मैं गर्व महसूस करती थी।
कई नेताओं से आत्मीय संबंध लेकिन राजनीति में रुचि नहीं
लता मंगेशकर ने दो विरोधी ध्रुवों के लिए एक जैसी आस्था रखी। पंडित नेहरू के लिए उनके मन में जितना सम्मान था उतना ही अटल बिहारी वाजपेयी के लिए था। 2018 में वाजपेयी जी की निधन के बाद लता दी ने ट्वीट किया था, मैं उन्हें (अटल बिहारी वाजपेयी) पिता तुल्य मानती थी। मुझे वे इतने प्रिय थे कि मैं उन्हें दद्दा कह कर बुलाती थी। उनके जाने से मुझे लता दी वे राजनीति से परे थीं। सिर्फ व्यक्ति विशेष के लिए उनके मन में प्रेम था। शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे से भी लता दी का बहुत आत्मीय संबंध था।
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