धुर विरोध भी कर रहे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रशंसा

धुर विरोध भी कर रहे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य की प्रशंसा

प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों गजब की बेचैनी दिखाई दे रही है। भाजपा में अंदरखाने बहुत कुछ चल रहा है। कोई भी नेता खुलकर किसी के पक्ष में सामने नहीं आ रहा है। भाजपा में लगातार ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रशंसा कर रहे हैं। इनमें वैसे लोगों की भी अच्छी तादाद है, जो कभी सिंधिया के धुर विरोधी थे। क्रिकेट की राजनीति के कारण किसी समय सिंधिया के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। इंदौर में तो सिंधिया समर्थकों की संख्या पहले से अच्छी-खासी है, अब विजयवर्गीय खेमे के उनके साथ आने से ताकत और बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये प्रशंसा यूं ही नहीं हो रही है। सिंधिया के करीब जा रहे लोगों में ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनका पार्टी में कद तो है लेकिन फिलहाल खास पूछ-परख नहीं है।

Union Minister Jyotiraditya Scindia

इंदौर में कलेक्टर बनाए गए इलैया राजा टी का नाम सभी को चौंका रहा है। बताया जा रहा है कि राजा का नाम काफी सोच-विचार और कई बैठकों में चर्चा के बाद तय किया गया है। चर्चा में सबसे पहला नाम उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह का आया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद भी आशीष सिंह ही थे। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने सीएम को बताया कि इंदौर को लेकर लोगों में गलत संदेश जा रहा है कि जो अधिकारी वहां पहले रह लेता है, उसे ही वहां का कलेक्टर बनाया जाता है। सीएम को भी यह बात समझ में आई। इसके अलावा उज्जैन में श्री महाकाल महालोक का काम सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल है। मुख्यमंत्री और सरकार चाहती है कि विधानसभा चुनाव के पहले यह काम पूरा हो। चूंकि आशीष सिंह ने इस काम को बखूबी संभाल रखा है, ऐसे में उन्हें उज्जैन से हटाया जाना उचित नहीं समझा गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के सामने हर कोई शक्ति प्रदर्शन करना चाहता है। पिछले दिनों वे इंदौर आए, तो उनके कई पुराने समर्थक विमानतल पर उनका स्वागत करने पहुंचे। लेकिन शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने किसी को भी उनसे मिलने नहीं दिया। इसे लेकर प्रदेश सचिव गजेंद्र वर्मा ने तो बाकलीवाल पर जानबूझकर अपमानित करने का आरोप तक लगा दिया। इसका वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर छाया हुआ है। बाकलीवाल पर पहले भी नाथ समर्थक पुराने कांग्रेसियों को नजरअंदाज करने के आरोप लगते रहे हैं। बाकलीवाल को लगता है कि यदि पुराने समर्थक कमल नाथ से मिलेंगे, तो उनके बारे में भी बात होगी। कहना न होगा कि शहर में कांग्रेस की सबसे बुरी गत बाकलीवाल के कार्यकाल में ही हुई है। बाकलीवाल को हटाने की चर्चा भी कई दिनों से चल रही है। उनकी जगह अश्विन जोशी, गोलू अग्निहोत्री जैसे कई नेता शहर अध्यक्ष की दौड़ में हैं।

इंदौर अभिभाषक संघ के चुनाव परिणाम में इस बार भारी फेरबदल देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और ब्राह्मण वोटों के सहारे अब तक चुनाव में दबदबा रखने वाले पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश पांडे 'गुरु" इस बार हार गए। इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। पांडे भाजपा से पार्षद भी रह चुके हैं, अब उनकी पत्नी रूपा पांडे पार्षद हैं। अब तक जिला अभिभाषक संघ में उन्हें अच्छा समर्थन मिलता था, लेकिन इस बार वे तीसरे नंबर पर रहे। कोर्ट के गलियारों में चर्चा है कि चुनाव के पूर्व में गुरु ने कुछ विवदित मामलों में आरोपितों की जमानत करवाई थी। चर्चा है कि विवादित मामलों में वर्चस्व का उपयोग कर वे जमानत करवा रहे हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी का पार्षद होना भी उन्हें भारी पड़ गया। मतदाताओं के बीच यह भी चर्चा थी कि एक ही परिवार को कई पद क्यों दिए जाएं।

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