Uttarakhand: यूनिफॉर्म सिविल कोड उत्तराखंड की जरूरत थी: सीएम धामी
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 'समान नागरिक संहिता' किसी भी व्यक्ति या धर्म के खिलाफ नहीं है लेकिन ये राज्य के लिए बहुत जरूरी था।

Uttarakhand: 'यूनिफॉर्म सिविल कोड उत्तराखंड की जरूरत थी, ना कि ये एक चुनावी एजेंडा था', ये कहना है सीएम पुष्कर सिंह धामी का, जिन्होंने ये बात आज तक के कार्यक्रम 'उत्तराखंड का एजेंडा' में कही। मुख्यमंत्री धामी ने धर्मांतरण को लेकर कहा कि 'उत्तराखंड धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र बिंदू है लेकिन पिछले कुछ वक्त से वहां तेजी से धर्मांतरण हो रहा था। वहां के भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर, बहला-फुसलाकर और कुछ मनगड़ंत चीजें बताकर, उनका जोर जबरदस्ती से धर्मातरण किया जा रहा था।'
'ये वहां एक बड़ी समस्या बन गई थी इसलिए हमने इस पर कानून बनाने का फैसला किया, इस कानून के तहत, अगर कोई भी धर्मांतरण करेगा तो जिलाधिकारी से इसकी इजाज़त लेनी होगी और अगर कोई ऐसा जबरदस्ती करवाते पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ प्रशासन कार्यवाही करेगा और इसमें 10 साल की सजा का भी प्रावधान रखा गया है। हमारे प्राकृतिक स्रोत उत्तराखंड में हैं, जो पूरे देश के काम आते हैं, जो उत्तराखंड से शुरू होता है ,वो पूरे देश में जाता है, इसमें कोई पॉलिटिकल बात नहीं है. ये समाज हित में, राज्य हित में और राष्ट्र के हित में है।'
'समान नागरिक संहिता' को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि 'यह किसी के खिलाफ नहीं है। 12 फरवरी 2022 को हमने इसे लेकर संकल्प जताया था और सरकार बनने पर कमेटी बनाई। हमारे बाद तमाम राज्य इस पर आगे आ रहे हैं।' इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि 'उत्तराखंड में चुनाव से 6 माह पहले ही मुझे मुख्यमंत्री का दायित्व मिला था। पार्टी ने मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को यह जिम्मा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भरोसा जताया। इसी का नतीजा रहा कि हम उत्तराखण्ड में यह मिथक तोड़ने में कामयाब रहे कि वहां हर 5 साल में सरकार बदलती है।'












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