तेलंगाना के मुख्यमंत्री निवास को प्रगति भवन से प्रजा भवन बनने तक का जानें रोचक इतिहास
तेलंगाना विधानसभा चुनाव मे बंपर जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस ने सत्ता पर काबिज होते ही जो सबसे पहला परिवर्तन किया वो ये था कि प्रगति भवन पर लगी लोहे की बैरिकेड्स और बाड़ को हटा दिया गया था और सीएम रेवंत रेड्डी ने सीधे जनता से सुनवाई की थी। सीधे तौर पर ये प्रगति भवन रातों रात प्रजा भवन बन गया। अब ऐसे में प्रगति भवन का तेलंगाना की राजनीतिक में महत्व को समझना महत्वपूर्ण है।

बता दें 2016 में अपने निर्माण के समय से ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री का नया आधिकारिक निवास सह कार्यालय राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ था। विपक्ष के अनुसार यह प्रगति भवन तत्कालीन सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के लिए 'शासन और प्रगति' और 'उत्पीड़न और भ्रष्टाचार' का प्रतिनिधित्व करता है।
केसीआर के मुख्यमंत्री रहते हुए इस प्रगति भवन में किले जैसी नाकाबंदी थी, आम लोगों की पहुंच से सीएम आवास बहुत दूर थी। आम जनता से सीएम आवास की पहुंच की कमी के लिए केसीआर हमेशा विपक्ष के निशाने पर रहेफ
बता दें 2016 में कांग्रेस ने डबल-बेडरूम घरों के आवंटन और इस प्रोजेक्ट की प्रगति को लेकर राज्य विधानसभा में बीआरएस सरकार पर जमकर हमला बोला था।
कांग्रेस विधायक कोमाटिरेड्डी वेंकटरेड्डी ने सदन में बीआरएस सरकार पवर हमला बोलते हुए कहा था
150 बेडरूम वाला मुख्यमंत्री आवास मार्च-नवंबर 2016 के बीच 9 महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर बनाया गया था, बीआरएस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार जरूरतमंदों के लिए पर्याप्त घर देने में विफल रही है।
केसीआर ने नवनिर्मित मुख्यमंत्री आवास के बारे में कांग्रेस द्वारा की गई टिप्पणी की आलोचना की थी और सीएम आवास की संपत्ति को "तेलंगाना का गौरव" बताया था।
केसीआर ने तब कांग्रेस से सवाल किया था कि हम सीएम आवास में 150 बेडरूम कैसे बना सकते है? इससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस के विचारों में कितना द्वेष है। उन्होंने कहा था इस इस भवन को बनाने का उद्देश्य निर्माण का उद्देश्य "तेलंगाना की प्रोफ़ाइल में सुधार करना" था।
इसके साथ ही तेलंगाना केसीआर ने तब कहा था
निजाम ने हमें लाखों एकड़ ज़मीन दी है, लेकिन विचारों के दिवालियापन के कारण मुख्यमंत्री के पास अच्छा आवास नहीं था। हमने 36-37 करोड़ रुपये में एक ऐसी जगह बनाई है जिसमें एक पार्किंग क्षेत्र है जिसमें 200-300 कारें खड़ी हो सकती हैं, और नौकरशाही और जनता के साथ सम्मेलन आयोजित करने के लिए मुख्यमंत्री के लिए एक मीटिंग हॉल भी है।
उन्होंने कहा था
केसीआर के बाद के कई मुख्यमंत्री वहीं रहेंगे। यह तेलंगाना के मुख्यमंत्री का आधिकारिक निवास है, यह केसीआर का घर नहीं है। यह केसीआर की संपत्ति नहीं है बल्कि इसका स्वामित्व तेलंगाना के लोगों के पास है। इससे विदेशी प्रतिनिधियों की नजर में भी राज्य की छवि बेहतर होगी। यह तेलंगाना का गौरव है।












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