तेलंगाना चुनाव: केसीआर की लहर के बीच सिरसिल्ला बुनकरों की अधिक सरकारी आर्डर और बिजली सब्सिडी की है डिमांड
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 में सत्तारूढ़ बीआरएस जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार सत्ता पर कब्जा जमाने को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही है। बीआरएस को अपनी जीत पर अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों के कारण विश्वास है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के कार्यकाल में जिन जिलों का समुदाय हुआ वो तीसरी बार भी बीआरएस की राज्य में सरकार चाहते हैं। वहीं केसीआर की लहर के बीच सिरसिल्ला के बुनकरों की और अधिक सरकारी आर्डर और बिजली पर सब्सिडी की मांग की है।

सिरसिल्ला तेलंगाना का एक प्रमुख कपड़ा केंद्र माना जाता है, यहां के बुनकरों और उनके परिवार के सदस्यों में से कम से कम तीन ने आत्महत्याएं बीते एक दशक में की, इसके बावजूद कई शैक्षणिक संस्थानों, परिधान उद्योगों के लिए एक परिधान पार्क और कई भोजनालय बनवाए, जिस कारण इनकी काफी देखी जा रही रही है। यहां के नागरिकों को दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार देखा गया है, और जमीनी स्तर पर यहां के विकास के लिए कई पहल भी हो चुकी है।
सिरसिल्ला के बुनकरों के जीवन में हाल के दिनों में जो उन्नति नजर आ रही वो कुछ समय पहले घट रहे पावर-लूम उद्योग में बड़े पैमाने पर सरकारी हस्तक्षेप के कारण संभव हुई है। इसका एक बड़ा हिस्सा बथुकम्मा उत्सव की मुफ्त साड़ियों के साथ-साथ क्रिसमस और रमज़ान के दौरान वितरित की जाने वाली साड़ियों के लिए आने वाले ऑर्डर को जाता है।
सिरसिल्ला शहर साई किरण ने कहा ऐसे कई शहर हैं जिनका विकास नहीं हुआ है, लेकिन हमारा हुआ है। केटीआर की वजह से विकास यहां तक पहुंचा है। इस बात पर साई किरण के सॉफ्टवेयर इंजीनियर दोस्त ने भी हामी भरी
हालांकि अंबिका नगर तो इस क्षेत्र का ऐसा इलाका है जहां लगभग 30,000 बिजली करघे पाए जाते हैं यहां के पवित्रा टेक्सटाइल्स के 61 वर्षीय बुनकर एन कन्हैया जो सिरसिल्ला में अनुमानित 10,000 दिहाड़ी बुनकरों में से एक है। उनके अलावा यहां अधिकांश लोग पद्मशाली समुदाय से हैं, जो पारंपरिक रूप से बुनकर हैं। इनके लिए कम से कम 139 पारस्परिक सहायता प्राप्त सहकारी समितियां (एमएसी) और लगभग 142 लघु उद्योग (एसएसआई) वहां स्थित हैं।












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