तेलंगाना विधानसभा चुनाव: राज्य के कोयला श्रमिकों की पहली पसंद है बीआरएस
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर राज्य की सत्तारुढ़ पार्टी चुनावी अभियान में जुटी हुई है। राज्य की केटीआर सरकार ने पिछले नौ सालों में सत्ता में रहते हुए हर क्षेत्र में और उससे जुड़े लोगों की उन्नति के लिए सराहनीय कदम उठाए हैं। सत्तारूढ़ बीआरएस ने राज्य के कोयला क्षेत्र और उसमें काम करने वाले श्रमिकों का भी हमेशा ख्याल रखा है। जिसकी बदौलत बीते 9 सालों में सिंगरेनी ने देश के लगभग 200 केंद्र और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में टॉप परफॉर्म कर रही है।

सिंगरेनी कोलियरियों के रक्षक के रूप में पेश करने वाली भारत राष्ट्र समिति के नेतृत्व ने अपना ध्यान कोयला क्षेत्र के विकास पर केंद्रित किया। जिसकी बदौलत दस विधानसभा क्षेत्र जहां कोयला खनिकों का काफी राजनीतिक प्रभाव है वहां पर बीआरएस सबसे पसंदीदा पार्टी के रूप में देखी जा रही है। इस कोयला क्षेत्र के बीआरएस कार्यकर्ता चुनाव को लेकर बहुत उत्साहित हैं।
जब देश अन्य जगहों पर सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकतर उपक्रम दबाव में केंद्र द्वारा निजी क्षेत्र को दिए गए और जो अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। वहीं एससीसीएल के कोयला खनिकों ने खुद को मुख्यमंत्री के सुरक्षित हाथों में सुरक्षित महसूस किया। कंपनी के निजीकरण के हर कदम को रोकने में उनका ही पूरा योगदान रहा।
कंपनी का अच्छी किस्मत और मजबूत कार्यबल, जिसमें 39,000 से अधिक खनिक शामिल थे, जिसमें बीते नौ सालों में महत्वपूर्ण पुनरुद्धार हुआ इसके साथ ही सुरक्षित माहौल में कोयला श्रमिकों का भी मनोबल बढ़ा। तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 में कोयला बेल्ट में क्लीन स्वीप करना बीएसआर प्रमुख का लक्ष्य है।
गौरतलब है कि कोयला क्षेत्र के वोटर चुनाव में राज्य की सरकार चुनने में अहम भूमिका निभाते हैं। तेलंगाना में ये 10 विधानस क्षेत्र जहां वो निर्णायक भूमिका है, वो कोठागुडेम (एससीसीएल मुख्यालय), येल्लांडु, पिनापाका, बेल्लमपल्ली, मंचेरियल, चेन्नूर, पेद्दापल्ली, रामागुंडम, भूपालपल्ली और मंथनी विधानसभा क्षेत्र है। इनमें मंथनी को छोड़कर बाकी सभी निर्वाचन क्षेत्रों पर बीआरएस का कब्जा है।
पिछले 2028 के विधानसभा चुनाव में बीआरएस उम्मीदवारों ने बेल्लमपल्ली, मंचेरियल, चेन्नूर और पेद्दापल्ली की सीटें जीती थीं। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों ने मंथनी, कोठागुडेम, भूपालपल्ली, येल्लांडु और पिनापाका सीटें जीती थीं। बाद में मंथानी कांग्रेस विधायक को छोड़कर डी श्रीधर बाबू बाकी सब पाला बदल कर केसीआर की बीआरएस के समर्थन में आए गए।
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