तेलंगाना सरकार के लंबित विधेयकों पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब

संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को या तो राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक पर सहमति देने या सहमति को वापस लेने या राष्ट्रपति के विचार के लिए विधेयक को आरक्षित करने का अधिकार देता है।

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा व जेबी पारदीवाला की पीठ ने राज्यपाल के कार्यालय को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया, लेकिन राज्य सरकार की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। तेलंगाना सरकार की उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें राज्यपाल को 10 लंबित विधेयकों को मंजूरी देने का निर्देश देने की मांग की गई है। ये विधेयक विधानसभा द्वारा पारित किए गए हैं, लेकिन गवर्नर की सहमति का इंतजार कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने कहा कि वह केंद्र को नोटिस जारी करना चाहती है, लेकिन सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने अदालत से आग्रह किया कि वह नोटिस जारी ना करें और वह निर्देश प्राप्त करेंगे। पीठ ने नोटिस जारी नहीं किया और मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च के लिए स्थगित कर दी।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत में जाने के लिए विवश है, क्योंकि राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कई विधेयकों पर राज्यपाल के कार्रवाई करने से इनकार करने के कारण संवैधानिक गतिरोध पैदा हो गया है।

याचिका में कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 200 राज्यपाल को या तो राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक पर सहमति देने, या सहमति को वापस लेने या राष्ट्रपति के विचार के लिए विधेयक को आरक्षित करने का अधिकार देता है। इसलिए, जितनी जल्दी हो सके इस शक्ति का प्रयोग किया जाना है।

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