महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, आदिवासियों पर अपराध नियंत्रण में शिवराज सरकार पूरी तरह नाकाम: पीसी शर्मा
मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार कानून व्यवस्था के मामले में हर मोर्चे पर विफल हो गई है। राष्ट्रीय क्राईम रिकार्ड ब्यूरो ने वर्ष 2021 के लिए जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें आदिवासियों पर अत्याचार
भोपाल, 30 अगस्त 2022: मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार कानून व्यवस्था के मामले में हर मोर्चे पर विफल हो गई है। राष्ट्रीय क्राईम रिकार्ड ब्यूरो ने वर्ष 2021 के लिए जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें आदिवासियों पर अत्याचार में मप्र पहले स्थान पर है। प्रदेश में आदिवासियों पर 2,627 अत्याचार के मामले दर्ज किये गये। बलात्कार के मामले में मप्र का रिकार्ड अत्यंत शर्मनाक रहा, प्रदेश में बलात्कार के 6,462 मामले दर्ज हुए, इनमें से 3,515 मामले नाबालिग से दुष्कर्म के हैं। नाबालिग से दुष्कर्म में मप्र देश में शीर्ष पर है। महिलाओं के साथ रेप के बाद हत्या के मामले में मप्र देश में तीसरे नंबर पर है। पूर्व मंत्री एवं विधायक पीसी शर्मा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह बात कही है।

पीसी शर्मा ने कहा कि वर्ष 2021 में मप्र में कुल 4,75,918 अपराध दर्ज हुए है, जबकि इससे पूर्व 2020 में 4,28,046 अपराध दर्ज हुए थे। इस तरह प्रदेश में 42 हजार से अधिक अपराध एक साल में बढ़े हैं। प्रदेश में वर्ष 2021 में 2,034 लोगों की हत्या हुई, यानि प्रदेश में प्रतिदिन 5 से 6 लोगों की हत्या की जा रही है।
पीसी शर्मा ने कहा कि बलात्कार के अलावा यौन अपराधों में मप्र की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। अप्राकृतिक यौन अत्याचार के मामले में मप्र देश में दूसरे नंबर पर है। इसी तरह अश्लीलता के मामलों मंे मप्र देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है। वर्ष 2021 में प्रदेश में 7,528 लोगों के खिलाफ 7,420 अश्लीलता फैलाने के मामले दर्ज किये गये। प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार के 30,673 मामले दर्ज किये गये, जो वर्ष 2020 की तुलना में 5 हजार अधिक हैं।
पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश में अपहरण के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 में अपहरण के 7,320 मामले दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2021 में 9,511 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं बच्चों से अत्याचार के मामले में मप्र देश में नबंर एक पर है। वर्ष 2021 में बच्चों से अत्याचार के 19,173 मामले सामने आये हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति पर अत्याचार के मामले में भी मप्र देश में तीसरे नंबर पर हैं। जहां वर्ष 2020 में 6,889 मामले सामने आये थे, वहीं 2021 में बढ़कर 7,214 हो गये।
पीसी शर्मा ने कहा कि वहीं वरिष्ठ नागरिकों पर अपराध के मामले में मप्र देश में दूसरे पायदान पर है। वर्ष 2021 में वरिष्ठ नागरिकों के 5273 अपराध दर्ज हुये हैं।
पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश स्तर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी अपराध में वृद्धि हुई है। बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में दिहाड़ी मजदूर, कामगार, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने सबसे ज्यादा आत्महत्याएं की है। देश की कुल आत्महत्याओं की 25 प्रतिशत आत्महत्याएं इसी वर्ग से हैं। जो कि साबित करता हैं कि छोटे और मझोले उद्योंगों पर कितना विपरीत असर पड़ा है।
युवाओं की आत्महत्या: वर्ष 2021 में 1 लाख 60 हजार से ज्यादा युवाओं ने आत्महत्या की है जो 75 साल केे इतिहास में सबसे ज्यादा है। इनमें से अधिकांश युवाओं ने रोजगार चले जाने के कारण अथवा शिक्षित होने के बावजूद उन्हें रोजगार नहीं मिलने के कारण आत्महत्याएं की हैं। युवाओं की आत्महत्या के मामले में 2020 की तुलना में 7.29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कुल आत्महत्याओं के मामले में मप्र देश में तीसरे स्थान पर है।












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