Odisha: ओडिशा में प्रभावित होगा चावल उत्पादन, फसल क्षेत्र में कमी है अहम वजह
ओडिशा में इस बार फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक दावा किया जा रहा है कि लगभग 4.32 लाख टन धान के उत्पादन में कमी आ सकती है। इसकी मुख्य वजह फसल क्षेत्र में कमी मानी जा रही है। सरकार की ओर जारी डेटा के मुताबिक कृषि विभाग ने खरीफ 2023-24 के लिए 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का कार्यक्रम बनाया है। मानसून के देर से आगमन और जुलाई और अगस्त के महीनों में राज्य भर में अनियमित वर्षा के बाद कुछ तटीय जिलों में बाढ़ के कारण खरीफ परिचालन में काफी देरी हुई है। ऐसे में फसल क्षेत्र में कमी आई है, जिसकी वजह से धान की कृषि प्रभावित हुई है।
ओडिशा सरकार ने 2023-24 खरीफ सीजन के दौरान 79 लाख टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा है, जो कि पिछले साल की तुलना में दो लाख टन अधिक है। लेकिन कृषि मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ये तभी संभव है, जब पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक हो। लेकिन अनियमित बारिश और अधिक बारिश की वजह से इस वर्ष धान की फसल के क्षेत्र में कमी आई है, जिसकी वजह से वजह से उत्पादन सामान्य से अधिक होने की उम्मीद नहीं है। कृषि-मौसम विज्ञानिकों के मुताबिक बंपर फसल की इस वर्ष उम्मीद करना दूर की कौड़ी लगता है।

राज्य सरकार ने उपज को 2,730 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2,850 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है। कृषि निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक इस साल भी अच्छी फसल की उम्मीद है। एक बयान में कहा गया कि राज्य भर में कम दबाव के कारण हुई बारिश ने सभी जिलों में बारिश की कमी को पूरा कर दिया है। जबकि केंद्रपाड़ा, कालाहांडी और नबरंगपुर में संचयी वर्षा की कमी 20 प्रतिशत से अधिक है।
मौसम विभाग की ओर जारी साप्ताहिक रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में पिछले सप्ताह 111 मिमी से अधिक अधिक वर्षा हुई है। जिलों से प्राप्त रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर फसल की स्थिति सामान्य है।












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