पंजाब: भाजपा में अब होगा बदलाव, अश्वनी शर्मा कराएंगे विस्तार, सुनील जाखड़ को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
चंडीगढ़। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने भले ही प्रदेश प्रधान बदल दिए हों, लेकिन पंजाब के प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा को कोरोना काल का लाभ मिलना लगभग तय है। 2024 के लोक सभा चुनाव पंजाब भाजपा अश्वनी शर्मा के नेतृत्व में ही लड़ेगी। हालांकि प्रदेश के संगठन में बदलाव जरूर होंगे।

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी में उचित स्थान दिया जाएगा। हाईकमान के संकेत देने के बाद प्रदेश भाजपा के नए पदाधिकारियों को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है। बता दें कि अश्वनी शर्मा को भाजपा ने जनवरी 2020 में प्रदेश की कमान सौंपी थी। यह वह समय था जब कोरोना पीक पर था और किसान संगठन तीन कृषि बिलों के खिलाफ उतर आए थे।
अश्वनी शर्मा को दोबारा प्रदेश की कमान संभाले हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ था कि किसानों ने दिल्ली बार्डर पर जाकर धरना दे दिया। किसान धरने को लेकर अश्वनी शर्मा पर भी उंगलियां उठी थी कि उन्होंने दिल्ली तक सही जानकारी नहीं पहुंचाई। हालांकि कृषि बिल वापस होने और विपरीत परिस्थिति में काम करने का लाभ अश्वनी शर्मा को मिल रहा है।
2022 के विधान सभा चुनाव के बाद 2024 का लोक सभा चुनाव भी अश्वनी शर्मा के नेतृत्व में लड़ना तय माना जा रहा है। प्रदेश प्रधान का तीन वर्ष का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म रहा है, लेकिन भाजपा हाईकमान ने उन्हें नई कार्यकारिणी बनाने के संकेत दिए है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि ऐसा तब भी होता है जब प्रदेश प्रधान को नहीं हटाया जाए। अगर पार्टी ने प्रदेश प्रधान को बदलना ही होता तो वह वर्तमान प्रधान को नई कार्यकारिणी बनाने के संकेत नहीं देती।
अश्वनी शर्मा को भाजपा में शामिल हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को भी संगठन में उचित स्थान देना है। राजनीतिक रूप से यह भी चर्चा रही है कि भाजपा सुनील जाखड़ को बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। जिसका मुख्य कारण यह भी है कि भाजपा में शामिल होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घंटों सुनील जाखड़ के घर पर बिताया, जबकि आमतौर पर केंद्रीय गृह मंत्री किसी नेता के घर पर कम ही जाते हैं।
वहीं, 24 अगस्त तक जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न्यू चंडीगढ़ में होमी भाभा कैंसर अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए आए थे, तब उन्होंने 45 मिनट तक भाजपा नेताओं के साथ अलग से फीडबैक बैठक की। इस बैठक में प्रधानमंत्री ने सुनील जाखड़ को न सिर्फ विशेष तवज्जों दी, बल्कि उन्हें दिल्ली आकर मिलने के लिए भी कहा। तब से ही यह चर्चा गर्म है कि पार्टी जाखड़ को संगठन में उचित स्थान दे सकती है।
सूत्र बताते हैं कि भाजपा कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं में संतुलन भी बैठाना चाहती है, क्योंकि भाजपा में शामिल होने की इच्छा रखने वाले कई नेता इस बात पर नजरें गड़ाए हुए हैं कि जो नेता भाजपा में गए है, पार्टी उनके प्रति कैसा रुख अपनाती है, क्योंकि शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद पहली बार हुआ है जब भाजपा में बड़े स्तर पर दूसरी पार्टियों के नेता शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश प्रधान को कार्यकाल में तो विस्तार होगा, लेकिन संगठन में बदलाव जरूर होगा।












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