घर-घर आटा पहुचांने वाली योजना पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई, पंजाब सरकार को झटका

चंडीगढ़। पंजाब सरकार को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने घर-घर आटा स्कीम पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट से इस फैसले पंजाब के डिपो धारकों में खुशी की लहर है। जानकारी के अनुसार, एन.एफ.एस.ए. डिपो होल्डर्स वेल्फेयर एसोसिएशन पंजाब द्वारा की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने रोक लगाई है।

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बता दें, पंजाब सरकार 1 अक्तूबर से घर-घर आटा पहुंचाने की योजना को लागू करने तैयारी में थी। पंजाब सरकार द्वारा बी.पी.एल. कार्ड धारकों को मुफ्त अनाज स्कीम के नाम पर बांटी जा रही गेहूं कम मिलने, खराब गेहूं या फिर ऐसे कार्ड होल्डरों को जो स्कीम के योग्य न होने की शिकायतें मिल रही थी। जिस पर एक्शन लेते हुए सी.एम. मान ने यह परिवर्तन कर दिया था कि वे पहले जैसे गेहूं लेना चाहते हैं या फिर सरकार की नई स्कीम तहत आटा सप्लाई करना चाहते हैं। 1 करोड़ 42 लाख लाभार्थियों को आटे की सप्लाई शुरू होनी थी।

निगम की सख्ती, LED कंपनी को पड़ेगी महंगी
वहीं, स्मार्ट सिटी कंपनी के 50 करोड़ रूपए से ज्यादा की लागत से कांग्रेस सरकार द्वारा चलाया गया एल.ई.डी. स्ट्रीट लाइट प्रोजैक्ट विवादों में आ गया है। इस प्रोजैक्ट में कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। अब कंपनी द्वारा हाल ही में लगाई गई ज्यादातर नई लाइटें बंद हो जाने से पूरे शहर में हाहाकार मच गई है और आपराधिक घटनाओं में भी दिन-ब-दिन वृद्धि होती जा रही है। इस समय न केवल सैंकड़ों लाइटें खराब पड़ी हुई हैं बल्कि कंपनी द्वारा इन लाइटों को जलाने-बुझाने और संचालित करने के लिए लगाए गए सी.सी.एम.एस. यानी कंट्रोल बॉक्स भी खराब हो गए हैं। कई पैनलों पर अतिरिक्त लोड पड़ जाने से जगह-जगह लाइटें ब्लिंक कर रही हैं। और तो और, कंपनी ने सोढल मेले के दिनों में भी काम नहीं किया जिस कारण न केवल मेला क्षेत्र में कई जगह अंधेरा व्याप्त रहा बल्कि निगम को अतिरिक्त जुगाड़ लगाकर कई लाइटों को चालू करना पड़ा। इस बीच पता चला है कि कंपनी के उच्च अधिकारी ने गत दिवस निगम कमिश्नर से मुलाकात करके बुधवार को काम शुरू करने की हामी भरी है।

कंपनी को हो सकता है लाखों रुपए जुर्माना
करोड़ों रुपए की नई लाइटें लगाने के साथ-साथ एल.ई.डी. कंपनी ने इन लाइटों के संचालन का भी जिम्मा ले रखा है जिसकी एवज में निगम हर महीने लाखों रुपए का भुगतान करता है। निश्चित अवधि में शिकायत दूर न होने पर कंपनी को जुर्माने का प्रावधान भी है। इस समय निगम के शिकायत केंद्र में सैंकड़ों शिकायतें पैंडिंग पड़ी हुई हैं जिस कारण माना जा रहा है कि कंपनी पर लाखों रुपए का जुर्माना इसी बात को लेकर हो सकता है कि उसने पिछले 7-8 दिन से शहर में खराब लाइटों को ठीक नहीं किया।

स्मार्ट सिटी के रुके कामों को लेकर हुई रिव्यू बैठक
इस बीच जालंधर में स्मार्ट सिटी के रुके हुए प्रोजैक्टों को लेकर पंजाब सरकार न केवल गंभीर हो गई है, बल्कि उसने जालंधर स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों को सख्त निर्देश भी भेजे हैं। चंडीगढ़ से आए चीफ इंजीनियर तथा चीफ विजीलैंस ऑफिसर राजीव सेखड़ी ने गत दिवस जहां आदमपुर जाकर ट्रीटमेंट प्लांट के काम की प्रगति को देखा और इसे तेज करने के निर्देश दिए, वहीं सी.ई.ओ. दविंदर सिंह ने भी अपने ऑफिस में एक बैठक काल की। इस दौरान बंद पड़े सभी प्रोजैक्टों को रिव्यू किया गया। फैसला लिया गया कि हर प्रोजैक्ट का एक नोडल ऑफिसर लगाया जाएगा जो स्टेटस रिपोर्ट देगा जिसके बाद 16 सितम्बर को फिर रिव्यू बैठक होगी।

एल.ई.डी. प्रोजैक्ट मामले में भी निगम अधिकारियों से 3 दिन के भीतर हर सी.सी.एम.एस. बॉक्स की रिपोर्ट तलब कर ली गई है। इस दौरान निगम यूनियनों के प्रतिनिधियों रिंपी कल्याण, बंटू सभ्रवाल व अन्यों ने भी निगम कमिश्नर से मुलाकात करके मांगों के समाधान बारे चर्चा की। फैसला हुआ कि ज्वाइंट कमिश्नर शिखा भगत इस मामले में प्रक्रिया निर्धारण करके कमिश्नर को रिपोर्ट देगी जिसके बाद सारा मामला सरकार को रैफर कर दिया जाएगा।

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