अब फैक्ट्रियों में जलाई जाएगी पराली, प्रदूषण कम करने के लिए पंजाब सरकार की नई पहल
चंडीगढ़। पराली से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने अब एक और पहल शुरू की है। सरकार अब औद्यौगिक इकाइयों में कोयले की जगह ईंधन के रूप में पराली जलाने के लिए तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देगी, जिससे खेतों में पराली जलाने की घटनाएं कम होंगी। पंजाब के विज्ञान प्रौद्यौगिकी एवं पर्यावरण मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने यह बात कही। मीत ने कहा कि, आने वाले समय में ईंधन के तौर पर कोयले की जगह पराली का प्रयोग करने के तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रौद्यौगिकी और नई तकनीकों (एसटीआई) को राज्य के विकास की कुंजी के तौर पर विकसित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

फैक्ट्रियों में जलेगी पराली
पंजाब के मंत्री मीत हेयर का कहना है कि, खेतों में जलाई जाने वाले पराली को रोकने के लिए हमारी सरकार मशीनरी से लेकर अन्य तमाम उपायों को अपना रही है। इस बार पराली से प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने नई पहल जो की है, वो यह है कि आने वाले समय में ईंधन के तौर पर कोयले की जगह पराली का प्रयोग करने के तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

रोजग़ार के अवसर भी पैदा होंगे
उन्होंने कहा कि, विज्ञान प्रौद्यौगिकी और नई तकनीकों (एसटीआई) को राज्य के विकास की कुंजी के तौर पर विकसित करने सम्बन्धी मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रतिबद्धता पर चलते हुए इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए फैक्ट्रियों में पराली के इस्तेमाल को लेकर कदम उठाए जाएंगे इससे ना केवल निकासी का बोझ घटेगा बल्कि राज्य में पैलेटाईजेशन प्लांट स्थापित करने के लिए मार्केट शक्तियां पैदा करके रोजग़ार के अवसर भी पैदा होंगे।

'ईको सिस्टम की दिशा में बढ़ें'
विज्ञान प्रौद्यौगिकी मंत्री ने पीएससीएसटी को एसटीआई ईको सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ते रहने और तालमेल बनाए रखने का आग्रह भी किया, जिससे राज्य को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके. मीत हेयर ने आश्वासन दिया कि सभी विभागों को अपनी बड़ी चुनौतियों, जिनका अनुसंधान और विकास के द्वारा समाधान किया जा सकता है, को स्पष्ट करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक विधि विकसित की जाएगी.
विज्ञान प्रौद्यौगिकी एवं पर्यावरण के सचिव राहुल तिवाड़ी ने साफ-सुथरी तकनीकों का प्रदर्शन करने के लिए पीएससीएसटी की पहल पर प्रकाश डाला, जिसके नतीजे के रूप में शुद्ध हवा की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ एमएसएमईज को आर्थिक लाभ हो रहा है।
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