पंजाब चुनाव: जलालाबाद में कैसा है जनता का मूड, सुखबीर सिंह बादल हैं प्रत्याशी

चंडीगढ़, 01 फरवरी: पंजाब की जलालाबाद विधानसभा सीट उन चुनिंदा सीटों में शामिल है, जहां पर मुख्यमंत्री पद की रेस के चेहरों में से एक अकाली-बीएसपी गठबंधन के सीएम प्रत्याशी सुखबीर बादल चुनाव मैदान में हैं। जलालाबाद अकाली दल का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी भी अकाली दल के गढ़ में सेंध लगाने की पूरी कोशिश में है। ऐसे में क्या है वहां की जनता का मिजाज, जानिए।

sukhbir singh badal

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर साफ कर दिया कि सुखबीर बादल बतौर सीएम चेहरे इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में है। ये उनके लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। उनके लिए इलाके का विकास बड़ा मुद्दा है। जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र में करीब 198 गांव है और शहरी इलाका भी है। ग्रामीणों ने स्कूल, पीने के पानी, गांवों की कच्ची गलियों जैसे मुद्दे उठाते हुए कहा कि जो इन मुद्दों के आधार पर काम करने का भरोसा देगा, उनका वोट उसी उम्मीदवार को मिलेगा।

ग्रामीणों ने कहा कि इलाकों में पीने का पानी नहीं है। ग्राउंड वाटर खराब हो चुका है। इस वजह से लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है, लेकिन इस पानी की समस्या के लिए किसी भी विधायक ने कुछ नहीं किया, जबकि जनता ने अकाली दल से लेकर कांग्रेस तक को मौका दिया है। हालांकि ग्रामीण इलाकों में कुछ लोग खुलकर आम आदमी पार्टी के पक्ष में दिखाई दिए।

सुखबीर बादल ने किया जीत का दावा

वहीं जलालाबाद शहर के शहीद उधम सिंह पार्क में मौजूद कुछ लोगों ने खुलकर सुखबीर बादल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल ने इलाके में काफी डेवलपमेंट किया है, जबकि कुछ लोग इशारों-इशारों में आम आदमी पार्टी का समर्थन करते हुए बदलाव लाने की बात करते दिखे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अकाली दल दोनों पर अब भरोसा नहीं है। हालांकि जनता का मिजाज भले ही कुछ हो, लेकिन अकाली दल के अध्यक्ष और इलाके के सांसद सुखबीर बादल ने अपनी जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि जलालाबाद की जनता उनके साथ है। वहीं हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि अगर उनके पति सुखबीर बादल जलालाबाद से चुनाव जीतते हैं और सरकार बनने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो जलालाबाद और उसके साथ ही फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे आसपास के इलाकों का पूरा विकास नये सिरे से किया जाएगा।

सुखबीर बादल पर विपक्षियों का हमला

अकाली दल को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए जलालाबाद से उम्मीदवार पूरन चंद ने सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए उन्हें डिक्टेटर बताया है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय कृषि कानूनों के मुद्दे पर केंद्र सरकार की पैरवी करते हुए कहा कि पंजाब के किसान जल्द ही केंद्र सरकार की मंशा को समझेंगे और बीजेपी के साथ खड़े होंगे। पूरन चंद ने कहा कि उनका इलाके के गांवों में काफी बड़ा वोट बैंक है और बीजेपी काफी वोटों से जलालाबाद सीट से जीतेगी। वहीं आम आदमी पार्टी के जगदीप कंबोज गोल्डी भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उन्होंने बतौर सांसद और इलाके के विधायक रहते हुए कुछ काम नहीं किया है। वहीं कांग्रेस ने जलालाबाद से फिरोजपुर से दो बार बहुजन समाज पार्टी के सांसद रहे डॉ. मोहन सिंह फलियांवालिया को टिकट दिया है। फलियांवालिया ने कहा कि वो इलाके के पुराने नेता हैं और इस बार अकाली दल के गढ़ में सेंध लगाकर दिखाएंगे।

2012 में जलालाबाद से सुखबीर बादल की जीत

आपको बता दें कि जलालाबाद सीट से साल 2012 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार सुखबीर सिंह बादल विधायक चुने गए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार रहे हंसराज को हराया था। उस समय सुखबीर बादल को 80,647 वोट मिले थे, जबकि हंसराज को 30,401 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मलकीत सिंह थे, जिन्हें 17,970 वोट मिले थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर अकाली दल का वोट शेयर 53.98 प्रतिशत था। निर्दलीय उम्मीदवार का वोट शेयर 20.35 प्रतिशत और कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 12.3 प्रतिशत था।

2019 में अकाली दल के उम्मीदवार की हार

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट से सुखबीर सिंह बादल विधायक चुने गए। उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भगवंत मान को हराया था। चुनाव में सुखबीर सिंह बादल को 75,271 वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी उम्मीदवार भगवंत मान को 56,771 वोट मिला था। तीसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रवनीत सिंह बिट्टू थे, जिन्हें 31,539 वोट मिला था। साल 2019 में फिरोजपुर के सांसद के चुनाव से पहले सुखबीर बादल ने जलालाबाद की सीट छोड़ दी, जिसके बाद दोबारा से चुनाव हुआ। उपचुनाव में अकाली दल के उम्मीदवार को कांग्रेस के रमिदर आंवला ने हरा दिया।

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