उत्तरी जोनल काउंसिल की 31वीं बैठक में सीएम मान ने उठाए कई मुद्दे, कही ये अहम बात

उत्तरी जोनल काउंसिल की 31वीं बैठक में शामिल होने गृहमंत्री अमित शाह मंगलवार 26 सितंबर को अमृतर पहुंचे, जहां उन्होंने बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान पंजाब सीएम भगवान ने खुद गृहमंत्री के सामने राज्य के अलग-अलग मुद्दों को ज़ोरदार ढंग से उठाया।

पंजाब सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि अतीत में यह शहर कारोबारी सरगर्मियों का केंद्र रहा है और राज्य सरकार के प्रयासों के स्वरूप यह शहर जल्दी ही मध्य एशिया और उससे पार की मंडियों के लिए प्रवेश द्वार बनेगा।

Bhagwant Mann

मेहनती और बहादुर पंजाबियों ने पांच नदियों की इस धरती पर इतिहास के कई पन्ने पलटते हुए देखे हैं। देश के अन्न भंडार के तौर पर नाम कमाने के साथ-साथ पंजाब को देश की खडगभुजा होने का भी गर्व हासिल है और पंजाबियों को विश्व भर में अपनी बहादुरी, सहनशीलता और उद्यमी होने की भावना के कारण जाना जाता है।

भगवंत सिंह मान ने कहा कि उत्तरी जोनल काउंसिल हमारे आर्थिक विकास के लिए अंतरराज्यीय सहयोग के स्तर को बढ़ाने के लिए यह बहुत बढिया प्लेटफॉर्म है। कहा कि यह हम सभी के हित में है कि हम एकसाथ बैठें और इस क्षेत्र, जो भौगोलिक तौर पर जमीनी हदों और सरहदों के साथ जुड़ा होने के कारण हमेशा नुकसान में रहा है, के सामाजिक-आर्थिक विकास की बेहतरीन संभावनाएं ढूँढें।

मुल्क में सही मायनों में संघीय ढांचे की जरूरत की वकालत करते हुए सीएम मान ने कहा कि समूचे राजनीतिक परिपेक्ष्य में यह बात महसूस की जा रही है कि राज्यों को और ज्यादा वित्तीय एवं राजनीतिक शक्ति दी जाएं। उन्होंने कहा कि इस पक्ष पर सभी एकमत हैं कि राजनीतिक पार्टियों की जंजाल से ऊपर उठकर राज्य सरकारों को अपनी विकास प्राथमिकताओं के चयन और राजस्व के लिए काम करने के लिए ज़्यादा छूट देने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि संघवाद हमारे संविधान के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है, परन्तु बदकिस्मति से पिछले 75 सालों में इस अधिकार पर केंद्रीयकरण का रुझान हावी रहा है। सीएम मान ने कहा, 'यह बात हर कोई जानता है कि आधुनिक युग में राज्य सरकारें अपने लोगों की समस्याओं को समझने और हल करने के लिए ज़्यादा बेहतर स्थिति में हैं।'

भाखड़ा ब्यास प्रशासनिक बोर्ड (बीबीएमबी) में राजस्थान को मैंबर नियुक्त करने की मांग पर जोरदार विरोध करते हुए सीएम मान ने कहा कि पंजाब राज्य पुनर्गठन एक्ट 1966 के प्रस्तावों के अधीन बीबीएमबी का गठन हुआ और यह एक्ट मूलभूत रूप से दो उत्तराधिकारी राज्यों पंजाब और हरियाणा के मसलों के बारे में है। इस एक्ट के सभी प्रस्तावों के साथ राजस्थान और हिमाचल प्रदेश या किसी अन्य राज्य का कोई सम्बन्ध नहीं है।

भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन कारणों से वह भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में राजस्थान या हिमाचल प्रदेश से किसी तीसरे मैंबर को शामिल करने के प्रस्ताव का सख़्ती से विरोध किया। शानन पावर हाऊस प्रोजैक्ट का मुद्दा उठाते हुए सीएम मान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश द्वारा जोगिन्दरनगर में शानन पावर हाऊस को स्थानांतरित करने का मुद्दा उठाया गया है, जिसके लिए यह तर्क दिया जा रहा है कि साल 1925 में मंडी के राजा ने इस प्रोजैक्ट के लिए 99 सालों के लिए जमीन लीज पर दी थी।

उन्होंने कहा कि जिसकी समय-सीमा साल 2024 में खत्म हो रही है। कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि इस मुद्दे को उठाया गया जबकि यह प्रोजैक्ट पंजाब पुनर्गठन एक्ट-1966 के उपबंधों के अंतर्गत पंजाब राज्य बिजली बोर्ड को सौंपा गया था। पंजाब पुनर्गठन एक्ट संसद का एक्ट है जिससे पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश राज्य बने। जिक्रयोग्य है कि इसी एक्ट ने नीचे की ओर बस्सी पावर हाऊस (उल हाइडल प्रोजैक्ट पड़ाव-2) की मलकीयत और कंट्रोल हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड को सौंपी है।

यह स्थिति आधी सदी से अधिक समय से भारत सरकार द्वारा बिना कोई छेड़छाड़ के कायम रखी गई है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब राज्य बिजली बोर्ड ने साल 1975 से 1982 तक अपने खर्चे पर प्रोजैक्ट का विस्तार किया और इसकी क्षमता 48 मेगावाट से बढ़ाकर 110 मेगावाट की। सीएम मान ने कहा कि यह मामला केंद्रीय बिजली मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद अभिव्यक्त की कि भारत सरकार उपरोक्त और सही कानूनी स्थिति बरकरार रखेगी।

उन्होंने कहा कि शानन पावर हाऊस की मलकीयत के सम्बन्ध में लिया गया कोई भी अन्य स्टैंड एक्ट के उलट होगा और पंजाब एवं इसके लोगों के साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी होगी। सीएम मान ने कहा कि बीबीएमबी में सिंचाई और ऊर्जा के सदस्यों के पदों पर सीधे तौर पर खुली भर्ती द्वारा भरने के कदम की सख़्त विरोधता की।

उन्होंने कहा कि 23 फरवरी, 2022 को बीबीएमबी (संशोधन) नियम केंद्र के ऊर्जा मंत्रालय ने जारी किए थे, जिसके मुताबिक सिंचाई और ऊर्जा के सदस्यों के पद खुली भर्ती के द्वारा सीधे तौर पर भरे जाएंगे। भगवंत मान ने इसकी विरोधता करते हुए कहा कि इन नये नियमों ने पुरानी व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ की है, जिसके मुताबिक मैंबर ऊर्जा हमेशा पंजाब से नियुक्त होता था, जबकि मैंबर सिंचाई हरियाणा से नियुक्त होता था।

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