पंजाब: गांवों के विकास के लिए बड़ा फैसला लेने की तैयारी में भगवंत मान सरकार
पंजाब के गांवों में दलित और सवर्ण जातीय भेदभाव दूर करने के सरकार के प्रयास असफल हो रहे हैं। गत 6 वर्षों में जातीय आधार पर पंजाब के गांवों में बने श्मशानघाटों को एक करने में सरकार को सफलता नहीं मिली है।
राज्य के 13,262 गांवों में से सिर्फ 137 गांवों में ही जातीय आधार पर बने श्मशानघाटों को एक किया जा सका है जो महज गांवों की संख्या से एक फीसदी से कुछ अधिक बनता है। शेष गांवों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसके चलते सरकार अब इस योजना के स्वरूप को बदलने की तैयारी में है।

श्मशानघाट को एक करने के लिए सरकार पंचायत को प्रोत्साहन के रूप में 5 लाख रुपए के विकास फंड की राशि देती है। यह मामला पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में भी उठा था। विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने सदन में यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा था कि गांवों में जातीय आधार पर अलग-अलग श्मशानघाट समानता के अधिकार की अवहेलना है और यह मामला छुआछूत का है। इसके जवाब में सरकार ने कहा था कि गांव में एक श्मशानघाट बनाने के लिए सरकार गांव की पंचायत को 5 लाख रुपए प्रोत्साहन राशि देती है। तत्कालीन पंचायत मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा था कि राज्य के 80 प्रतिशत गांवों में 2 अथवा 2 से अधिक श्मशानघाट हैं। उन्होंने कहा था कि जाति आधारित श्मशानघाट बनाने की योजना अकाली सरकार के समय शुरू हुई थी।
अकाली सरकार के समय शुरू हुई इस योजना को समाप्त करने के लिए पूर्व कैप्टन अमरेंद्र सिंह सरकार के समय प्रयास शुरू हुए। जब पूर्व सरकार के कार्यकाल का समय पूरा होने के करीब आया तब वर्ष 2021-22 में प्रथम बार इस योजना के लिए फंड जारी किए गए। करीब 10,000 से अधिक गांवों में दलितों और स्वर्ण जाति के लिए अलग-अलग श्मशानघाट बने हुए हैं। अभी तक 137 पंचायतों ने अपने-अपने गांव के श्मशानघाट को एक किया है। जिन जिलों में श्मशानघाट एक हुए हैं उनमें अमृतसर में 11 गांव, फरीदकोट में 3, होशियारपुर में एक, कपूरथला में 6, मालेरकोटला में 1, लुधियाना में 9, पटियाला में 6, रूपनगर में 2, तरनतारन में 3, मोगा में 4, फतेहगढ़ साहिब में 5, फाजिल्का में 6, गुरदासपुर में 61, पठानकोट में 2, फिरोजपुर में 10 और जालंधर में 7 गांव शामिल हैं। इन ग्राम पंचायतों को 7 करोड़ 85 लाख रुपए विकास फंड प्रोत्साहन राशि के बांटे जा चुके हैं।
विभाग के सूत्रों ने बताया कि जैसे-जैसे किसी गांव का प्रस्ताव आता है, उसको अनुमति देकर राशि जारी कर दी जाती है। गौरतलब है कि पंजाब देश भर में ऐसा एकमात्र राज्य है जहां दलितों की आबादी सर्वाधिक है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 31.9 प्रतिशत दलित आबादी है जिनमें 19.4 दलित सिख हैं और 12.4 दलित हिन्दू हैं।












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