अकाली दल का मास्टर स्ट्रोक, मजीठिया के बाद 'माझे दा पुराना जरनैल' संभालेगा मोर्चा

चंडीगढ़, 23 दिसंबर: शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया (Former Minister Bikram Singh Majithia) पर ड्रग्स मामले में केस दर्ज होने के बाद पंजाब की माझा बेल्ट (Amritsar, Gurdaspur, Pathankot and Tarn Taran) में होने वाले राजनीतिक नुकसान (Political loss) की भरपाई का शिअद (SAD) ने तोड़ ढूंढ़ लिया है. इस बेल्ट पर आगामी चुनाव के मद्देनजर ब्रिक्रम मजीठिया जबरदस्त मोर्चा संभाले हुए थे, लेकिन उनके अंउरग्राउंड होने के बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा (Congress, Aam Aadmi Party and BJP) को लग रहा था कि अब वहां उनकी स्थिति मजबूत होगी.

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बिक्रम मजीठिया पर केस दर्ज होने के बाद शिअद ने डैमेज कंट्रोल करते हुए माझा के पुराने जरनैल खडूर साहिब से पूर्व लोकसभा सदस्य और शिअद (संयुक्त) संरक्षक रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा (Former Lok Sabha Member and SAD (Joint) Patron Ranjit Singh Brahmpura) को पार्टी में वापिस लाने के लिए राजी कर लिया है. पंजाब की सियासत में ब्रह्मपुरा 'माझे दा जरनैल' (Majhe da Jarnail) के नाम से जाने जाते हैं. वह अब अपनी मूल पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में लौटने के लिए तैयार हैं.

बिक्रम सिंह मजीठिया संभाल रहे थे माझा की राजनीति
बताया जाता है कि बिक्रम सिंह मजीठिया और शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल (SAD President Sukhbir Singh Badal) मिलकर संगठन का काम संभाल रहे थे और माझा बेल्ट में पार्टी के नीतिगत फैसले मजीठिया की सहमति से ही लिए जा रहे थे. इसलिए जब तक उनकी जमानत नहीं हो जाती, शिअद के सामने बड़ा संकट है, लेकिन ब्रह्मपुरा को वापिस लाने की रणनीति को शिअद का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. ब्रह्मपुरा ने मीडिया में दिए बयान में कहा है कि वह आज गुरुवार को चंडीगढ़ में शिअद में शामिल होंगे, जिसमें उनके बेटे और खडूर साहिब से पूर्व विधायक रविंदर सिंह सहित एक दर्जन से अधिक शिअद (संयुक्त) नेता शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि या तो मैं या मेरा बेटा खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र से शिअद के टिकट पर निश्चित रूप से चुनाव लड़ेंगे.

2018 में ब्रह्मपुरा ने किया था शिअद से किनारा
ब्रह्मपुरा ने अक्टूबर 2018 में राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींडसा (Rajya Sabha member Sukhdev Singh Dhindsa) (अब शिअद संयुक्त अध्यक्ष) के बाद सभी शिअद पदों से इस्तीफा दे दिया था. उस वक्त ब्रह्मपुरा और पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां और पूर्व सांसद रतन सिंह अजनाला जैसे अन्य नेताओं ने बादल परिवार द्वारा लिए गए फैसलों पर नाराजगी व्यक्त की थी. उन्होंने यहां तक कहा था कि शिअद, अकाल तख्त और एसजीपीसी की पवित्रता को नुकसान पहुंचा है और वे इन संस्थानों के गौरव की बहाली के लिए काम करना चाहते हैं. शिअद ने नवंबर 2018 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए ब्रह्मपुरा, सेखवां और अजनाला को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था.

इसलिए शिअद में कर रहे हैं वापसी
ब्रह्मपुरा ने कहा कि अन्य शिअद (संयुक्त) नेता जो शिअद में शामिल होंगे, उनमें करनैल सिंह पीर मोहम्मद, पूर्व विधायक उजागर सिंह वडाली और मनमोहन सिंह साथियाला और एसजीपीसी सदस्य मोहिंदर सिंह हुसैनपुर शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के अधिकांश नेताओं ने पहले ही ढींडसा साहब से कहा था कि हम न तो भाजपा के साथ जाएंगे और न ही कैप्टन अमरिंदर की पंजाब लोक कांग्रेस के साथ. यह पूछे जाने पर कि क्या वरिष्ठ शिअद नेतृत्व या बादल परिवार के साथ उनकी शिकायतों का समाधान किया गया है, ब्रह्मपुरा ने जवाब दिया कि मुझे उन मुद्दों के बारे में क्या कहना चाहिए? शिअद (संयुक्त) अब लगभग समाप्त हो चुका है तो हमें क्या करना चाहिए? चूंकि हम भाजपा में शामिल नहीं होना चाहते थे और पार्टी कार्यकर्ताओं का दबाव था, इसलिए हमने शिअद में वापस आने का फैसला किया है.

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