तेलंगाना में हथकरघा उद्योग से जुड़े लोग इन कड़ी चुनौतियों का कर रहे सामना
तेलंगाना राज्य में हरकरघा उद्योग कषि और संबद्ध क्षेत्रों के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, इसके बाजवूद हरकरघा से जुड़े हुए लोग कड़ी चुनौतियों को सामना कर रहे हैं। इसमें कच्चे माल पर प्रतिशत टीएसटी का बोझा भी शामिल है। वहीं कारगीर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों को लागू करने में सरकार की सहायता की पुरजोर पैरवी करते हैं, व्योंकि वे अक्सर त्वचा संबंधी बीमारियों से जूझते रहते हैं।

इनसके सामने आने वाली चुनौतियों में कच्चे माल की सोर्सिंग और जीएसटी एक बड़ी परेशानी है। इसकी वजह से कमाई में 20 प्रतिशत की भारी कमी आती है, जिससे इनकी अजीविका पर बुरा असर पड़ताह है। आजीविका पर बुरा आसर पड़ता है
बुनकर शेखरा ने बताया कि हरकरघा प्रोडक्ट पर जीएसटी लगाया गया है बिचौलिए अपन लेन देन में इसे शामिल नहीं करते हैं, जिस कारण हरकरघा श्रमिकों को जीएसटी के रूप में अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा हमारी परेशानियों और चिंताओं की वकालत करने के लिए हथकरघा सहकारी समितियों में चुनाव प्रकिया एक अहम माध्यम है लेकिन पिछले पांच वर्षों से निष्क्रिय है। शेखर ने कहा चुनाव करवाना जरूरी हे तभी हम अपने मु्दो को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और हमारी ओर से कार्य करने के लिए सशक्त बना सकते हैं।
जबकि वर्तमान नेथन्नाकु बीमा योजना का विस्तार 59 से 75 वर्ष की आयु सीमा के बुनकरों को शामिल करने के लिए किया गया है, सरकार से हमारा गंभीर अनुरोध रुपये का मासिक वजीफा आवंटित करना है।
सिद्दीपेट हैंडलूम वीवर कोऑपरेटिव प्रोडक्शन एंड सेल्स सोसाइटी लिमिटेड के मुदिगोंडा श्रीनिवास ने कहा हरकरघा श्रमिकों को कई त्वचा संबंधी बीमारियों के केारण उनके सामने कई चुनौतियां है। भले ही बस्तियों में दवा खाना है लेकिन हमारी विशिष्ट बीमारियों के लिए कई आवश्यक दवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं। इसलिए, हम ऐसी संपूर्ण और कुशल योजना के कार्यान्वयन चाहते है जो हमारे बुनकरों पर वित्तीय बोझ को कम करेगी और उन्हें किसी बाधा के लाभ पहुंचाए।












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