देशभर में लोकप्रिय हो रहीं तेलंगाना के धान की किस्में, जानिए वजह

तेलंगाना सोना, कुनाराम 1638, वारंगल 962 जगतियाल 94423, कुनाराम 118, तेला हम्सा और एमटीयू 1010 राज्य में विकसित धान की कुछ लोकप्रिय किस्में हैं।

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तेलंगाना राज्य देशभर में धान की अधिकतम किस्मों का घर है, जिन्हें प्रति एकड़ खेती के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है। पिछले तीन वर्षों में, राज्य ने भारत में ऐसी 17 किस्मों में से सात का विकास किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे लगभग एक लाख एकड़ धान की खेती से प्रति सीजन एक हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी फीट) पानी की बचत हुई है।

तेलंगाना सोना, कुनाराम 1638, वारंगल 962, जगतियाल 94423, कुनाराम 118, तेला हम्सा और एमटीयू 1010 राज्य में विकसित धान की कुछ लोकप्रिय किस्में हैं। प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय (PJTSAU) ने राज्य बनने के बाद धान की कई किस्में जारी की हैं, जिन्हें विकसित होने में छह साल से अधिक का समय लगा।

इन किस्मों का निरीक्षण करने वाले PJTSAU के पूर्व निदेशक आर जगदीश्वर ने कहा, 'हमारे पास धान की सबसे अधिक किस्में हैं, जिन्हें कम पानी की आवश्यकता होती है। इनमें से कुछ किस्मों का उपयोग अब पड़ोसी आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में किया जाता है।'

जगदीश्वर ने उनके महत्व को समझाते हुए कहा कि धान की खेती के लिए दिनों की संख्या 150 से घटाकर 125 कर दी गई है। उन्होंने बताया, 'जब इन किस्मों को बोया जाता है, तो धान के लिए प्रति एकड़ पानी की आवश्यकता में 500 लीटर (3,000 से 2,500 लीटर) की कमी देखी गई है, जिससे प्रति एक लाख एकड़ फसल पर 1 टीएमसी फीट पानी की बचत होती है।'

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