Jharkhand: हेमंत सोरेन ने की घायल संतोष से बात, दिया मदद का भरोसा, लापता पांचू के परिवार का बुरा हाल
संतोष और पांचू दोनों ओडिशा में हुए रेल हादसे का शिकार हुए हैं। हालांकि गनीमत यह रही कि संतोष सही सलामत घर आ गया है जबकि पांचू अभी भी लापता हैं। उसके चार बच्चे हैं और परिवार में इकलौता कमाने वाला पांचू ही है।

Jharkhand: ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना में घायल सारवां प्रखंड के बीचगढ़ा गांव निवासी संतोष कुमार राउत से कृषि मंत्री के माध्यम से सोमवार को दिन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फोन पर बात की और उनकी समस्याओं के बारे में जाना।
सीएम हेमंत सोरेन ने फोन पर लिया संतोष का हालचाल
मुख्यमंत्री ने हादसे के बाद उन्हें हुई परेशानी और वहां से वे घर कैसे पहुंचे इस बारे में जाना। घटना के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी जाना कि फिलहाल क्या परेशानी है। उनके स्वजनों का मुख्यमंत्री ने हालचाल जाना। दोनों के बीच काफी देर तक मोबाइल पर बात हुई। संतोष रावत ने बताया कि वह घर आ गया है। मुख्यमंत्री से बात कर संतोष काफी खुश नजर आ रहा था।
जानकारी हो कि इसके पूर्व संतोष रावत ने जागरण से आपबीती सुनाई थी और बताया था कि वह ट्रेन से आ रहा था और रास्ते में ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। उसने बताया कि वह अन्य लोगों के साथ ट्रेन के अंदर शौचालय के पास बैठा हुआ था।
उसके साथ पांचू मांझी भी बैठा हुआ था। दुर्घटना के समय उसने देखा कि बगल से आग की लपटें उठ रही हैं और उसके बाद वह बेहोश हो गया। होश आने पर उसने खुद को अस्पताल में पाया। पास में एक शिविर लगा था, जहां उसने नाश्ता किया। बाद में बस से वह घर वापस लौटा।
संतोष रावत ने सपरिवार डकाई दुबे बाबा मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की और ईश्वर से जान बचाने के लिए शुक्रिया अदा की। प्रखंड क्षेत्र के कुशमाहा पंचायत अंतर्गत बैजनाथपुर गांव निवासी बालासोर ट्रेन दुर्घटना में लापता पांचू मांझी के स्वजनों से सोमवार को बीडीओ जहूर आलम ने मिलकर ढाढस बंधाया और आवश्यक जानकारी प्राप्त की। उनकी पत्नी कर्मी देवी से पारिवारिक हालत के बारे में जानकारी ली।
श्रम विभाग के द्वारा उपलब्ध कराए गए शव की तस्वीर दिखाकर उसकी पहचान कराई। बीडीओ जहूर आलम को पत्नी ने बताया कि पांचू नवंबर के लगभग काम के सिलसिले में कर्नाटक गया था और वहां से बेंगलुरु गया था।
बेंगलुरु से ट्रेन पकड़कर वापस ट्रेन पकड़कर आ ही रहा था कि रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। उसके बाद से उसके पति लापता हैं। उनका पता लगाने जेठ व गांव का एक युवक गए हैं, लेकिन उनको भी कुछ पता नहीं चला।
बीडीओ ने उन्हें आश्वस्त किया कि शव की पहचान होते ही प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी, हर संभव मदद प्रखंड प्रशासन द्वारा दिया जाएगा। इसके पूर्व रविवार देर शाम कृषि मंत्री बादल पत्रलेख के निर्देश पर उनकी टीम के लोग पांचू मांझी के स्वजनों से मिलकर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली। उन्हें राशन व अन्य सामान उपलब्ध कराया।
कहा गया कि कृषि मंत्री स्वयं परिजनों से मिलेंगे और किसी प्रकार की कोई समस्या हो तो सीधे इसकी जानकारी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उन्हें दी जाएगी। जानकारी हो कि पांचू के चार बच्चे हैं दो लड़का व दो लड़की। सभी नाबालिग हैं। परिवार का सारा खर्च पांचू की कमाई पर निर्भर करता था।












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