Odisha: शिक्षकों के अनुबंध की अवधि बढ़ाने होगा विचार, ओडिशा सरकार के दिया आश्वासन
अपनी विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर हड़ताल पर रहे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों ने सोमवार को अंतरमंत्रालयी समिति की बैठक और इस साल के अंत तक आवश्यक कदम उठाने के सरकार के आश्वासन के बाद कुछ समय के लिए अपना विरोध वापस लेने की घोषणा की। दरअसल, शिक्षकों के विरोध के चलते प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा था। ऐसे में अभिभावकों ने भी सरकार से हड़ताल को खत्म कराने की पहन करने का अनुरोध किया था।
ओडिशा सरकार ने प्रदेशव्यापी शिक्षकों की हड़ताल के बीच बड़ा निर्णय लिया। अभिभावकों के अनुरोध ओर शिक्षकों के हित को देखते हुए वित्त मंत्री बिक्रम केशरी अरुखा की अध्यक्षता में अंतर-मंत्रालयी समिति ने मांगों पर चर्चा की गई। जिसमें आंदोलनकारी शिक्षकों से अपनी हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक बैठक में सरकार के शीर्ष अधिकारियों के साथ शिक्षक संगठनों के कई बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। इस अहम मीटिंग में मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, वित्त सचिव और एसएमई सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्कूल और जन शिक्षा मंत्री सुदाम मार्ंडी, उच्च शिक्षा मंत्री अतनु सब्यसाची नायक और के अलावा पटनायक सरकार के कुछ मंत्री भी शामिल हुए।

बैठक में क्या तय हुआ?
वित्त मंत्री बिक्रम केशरी अरुखा की अध्यक्षता में अंतर-मंत्रालयी समिति के साथ बैठक में एयूपीटीएफ के सदस्यों ने कहा कि समिति ने वेतन वृद्धि, अनुमानित वेतन वृद्धि और नियमित शिक्षकों की सेवा अवधि में छह साल की अनुबंध अवधि की गणना से संबंधित मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। पैनल ने संविदा के साथ-साथ कला और पीईटी शिक्षकों के मुद्दों के समाधान के लिए कदम उठाने का भी आश्वासन दिया। मीटिंग के बाद ओडिशा प्राइमरी स्कूल टीचर्स एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश मोहंती ने कहा, "इस साल दिसंबर में अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा शिक्षकों की मांगों को पूरा करने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिए जाने के बाद फेडरेशन ने अपना विरोध स्थगित करने की घोषणा की है।"
50,000 स्कूलों में शिक्षा प्रभावित
शिक्षक फेडरेशन की महासचिव चारुलता महापात्रा ने कहा कि अगर सरकार तय समय सीमा के भीतर अपना वादा पूरा करने में विफल रहती है, तो शिक्षक फिर से विरोध शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। हालांकि वित्त मंत्री बिक्रम केशरी अरुखा की अध्यक्षता में अंतर-मंत्रालयी समिति ने कहा कि शिक्षकों की हड़ताल से शिक्षा के क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। पिछले 10 दिनों से करीब एक लाख शिक्षक धरने पर थे। जिसके कारण राज्य भर के लगभग 50,000 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा और मध्याह्न भोजन कार्यक्रम बाधित हुआ।












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